अमरनाथ यात्रा पर आतंकवादी हमला - इससे किसको फायदा है?

Submitted by cgpiadmin on मंगल, 01/08/2017 - 15:30

10 जुलाई को अमरनाथ मंदिर की यात्रा से वापस आ रहे तीर्थ यात्रियों की बस पर तथाकथित आतंकवादियों द्वारा गोलियां चलाई गईं। इस हमले में 7 यात्रियों के मारे जाने की खबर है, जिनमें 6 औरतें थीं, जबकि 32 यात्री बुरी तरह से घायल हो गये थे।

सभी समुदायों से, अलग-अलग धार्मिक विश्वास और राजनीतिक विचारधारा से संबंध रखने वाले कश्मीर के लोगों ने एकजुट होकर इस घिनौने अपराध की निंदा की है। उन्होंने मांग की है कि इस जघन्य अपराध को अंजाम देने वालों की पहचान की जाए और उन्हें गिरफ्तार करके सज़ा दी जाए।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, वह बस स्थानीय अधिकारियों के पास पंजीकृत नहीं थी। यह बस उन बसों के काफिले का हिस्सा भी नहीं थी जिनको राज्य द्वारा सुरक्षा प्रदान की गई थी। यह निर्धारित समय सीमा के बाद चलायी जा रही थी।

हिन्दोस्तान की सरकार इस अपराध की जांच करने और अपराधियों की पहचान करने के लिए कोई विश्वसनीय कदम उठाती नज़र नहीं आ रही है। इस बात पर भी कोई रोशनी नहीं डाली जा रही है कि राज्य द्वारा दी जा रही सुरक्षा के बिना एक गैर-पंजीकृत बस यात्रा क्यों चल रही थी। हमेशा की तरह अधिकारियों ने तुरंत ही पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित “इस्लामी आतंकवादियों” और “अलगाववादियों” को इसके लिए दोषी ठहराया है।

ऐतिहासिक अनुभव को देखा जाये तो यह साफ नज़र आता है कि यह कांड राजनीतिक उद्देश्यों के लिए किया गया एक अपराध है न कि धार्मिक कट्टरता की वजह से किया गया अपराध। इसलिए यह महत्वपूर्ण सवाल पूछा जाना चाहिए कि: राजनीतिक तौर पर इससे किसको फायदा होगा?

लोगों के एकजुट विरोध को तोड़ने और उन्हें एक-दूसरे के साथ लड़वाने और कत्ल करने, साथ ही लोगों पर और अधिक दमन को जायज़ ठहराने के लिए, आतंकवाद का इस्तेमाल करने का हिन्दोस्तानी राज्य का लम्बा और घिनौना इतिहास रहा है। यह सभी जानते हैं कि हिन्दोस्तानी राज्य, अमरीकी साम्राज्यवाद और वैश्विक वित्तीय पूंजी की कई एजेंसियां इस तरह के कई गुटों को खुफिया तरीके से संगठित और प्रायोजित करती हैं, उनको प्रशिक्षण और धन देती हैं, जो बेगुनाह लोगों के आतंकवादी जनसंहार को अंजाम देते हैं। लोगों को बांटना, उनको आतंकित करना, लोगों की संप्रभुता को, और इस क्षेत्र में शांति और सुरक्षा को जोखिम में डालना, यह हिन्दोस्तानी राज्य, अमरीकी साम्राज्यवाद और वैश्विक वित्तीय पूंजी की इन एजेंसियों का ही एजेंडा है। और ऐसे आतंकवादी जनसंहारों से उनके ही लक्ष्य हासिल होते हैं। यही कारण है कि इन आतंकवादी हमलों के पीछे वास्तविक ताक़तों का कभी भी पर्दाफाश नहीं होता है और न ही कभी उनको सज़ा मिलती है।

अमरनाथ तीर्थ यात्रियों पर हमला ऐसे समय पर किया गया है, जब पूरे कश्मीर के लोग सड़कों पर उतर कर सेना के शासन का विरोध कर रहे हैं। हिन्दोस्तानी सेना और अर्ध-सैनिक बलों द्वारा लगभग हर रोज़ की जा रही लोगों की हत्या के खिलाफ़, उनको अपाहिज बनाये जाने के खिलाफ़, गिरफ्तारी, यातना और निर्दोष लोगों के उत्पीड़न के खिलाफ़ गुस्सा बढ़ता ही जा रहा है। हिन्दोस्तानी राज्य, इसका विरोध करने वाले लोगों को “उग्रवादी”, “इस्लामिक आतंकवादी” और “राष्ट्र-विरोधी” करार देते हुए, सशस्त्र बलों की क्रूर कार्यवाहियों को जायज़ ठहरा रहा है। ऐसी स्थिति में अमरनाथ तीर्थ यात्रियों पर हमले का इस्तेमाल कश्मीरी लोगों के संघर्ष को बदनाम करने और उन्हें खतरनाक दुश्मन के रूप में पेश करने के लिए किया जा रहा है। इस घटना का इस्तेमाल लोगों के बीच सांप्रदायिक तनाव फैलाने और कश्मीर में सेना के शासन और राजकीय आतंक को बरकरार रखने को जायज़ ठहराने के लिए किया जा रहा है।

कश्मीरी लोगों या उनके समर्थकों में से किसी को इस भयानक हमले से कोई फायदा नहीं है, बल्कि जो कश्मीरी लोगों के संघर्ष का विरोध करते हैं, उन्हें इससे बहुत फायदा है।  द

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पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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