राजस्थान भर में किसानों का संघर्ष

Submitted by cgpiadmin on मंगल, 01/08/2017 - 14:30

कर्ज़ा मुक्ति आंदोलन संघर्ष समिति के तत्वाधान में पूरे राजस्थान के किसानों ने 17 जुलाई को सड़कों पर जुलूस निकाले और चक्का जाम अभियान चलाया। राजस्थान के 39 किसान संगठन इस संघर्ष समिति में शामिल हैं।

Rajasthan farmers protest इस आंदोलन के परिणाम स्वरूप सरकार ने 22 जुलाई को उन सभी 39 संगठनों के पदाधिकारियों को किसानों की समस्याओं पर चर्चा करने के लिये आमंत्रित किया है।

इस आंदोलन के तहत, जिला हनुमानगढ़ की नोहर उप-तहसील में आठ स्थानों पर चक्का जाम किया गया, जिसकी अगुवाई किसान-मजदूर-व्यापारी संघर्ष समिति तथा कई अन्य संगठनों ने की। नोहर से होकर राजस्थान के अनेक भागों में जाने वाले मुख्य मार्गों को बंद कर दिया गया। इस आंदोलन में इलाके के सैकड़ों किसानों ने हिस्सा लिया। इस प्रदर्शन में लोक राज संगठन के सर्व हिन्द उपाध्यक्ष हनुमान प्रसाद शर्मा सहित, मनीराम लकेसर, कुलदीप भांभू, ओम प्रकाश सहु, विनोद स्वामी, धर्मपाल खाती, चेतराम लकेसर आदि ने भाग लिया और अगुवाई दी।

इस मौके पर किसान-मजदूर-व्यापारी संघर्ष समिति द्वारा सरकार को दिये ज्ञापन में निम्नलिखित मांगें उठाई गईं :

  1. स्वामीनाथन किसान आयोग की सिफारिशों के अनुसार किसानों को फसलों का 50 प्रतिशत लाभ दिया जाये।
  2. हिन्दोस्तान की सरकार द्वारा मूल्य स्थाइत्व के लिये लाख करोड़ रुपये का कोष बनाया जाये।
  3. प्रगतिशील भूमि सुधार लागू किया जायें।
  4. कृषि क्षेत्र में निवेश लागत कम करने के लिये खाद, बीज, कीटनाशक, इत्यादि महत्वपूर्ण निवेशों को जीएसटी से बाहर रखा जाये।
  5. सभी राष्ट्रीयकृत व सहकारी बैंकों तथा अन्य प्रमुख ऋणदाता एजेंसियों के कृषि ऋण माफ़ किये जायें।
  6. भूमि अधिग्रहण कानून-2013 के संशोधन के लिये मोदी सरकार द्वारा लाया गया संशोधन वापस लिया जाये।
  7. केन्द्र व राज्य सरकार किसान पेंशन लागू करे, जिसमें हर पुरुष/महिला जो किसान, खेत मज़दूर या ग्रामीण दस्तकार को 60 वर्ष की उम्र में 10,000 रुपये मासिक पेंशन दी जाये।
  8. आवारा पशुओं से कृषि की रक्षा करने के लिये किसानों को अनुदान दिया जाये।
  9. असिंचित क्षेत्र को सिंचित करने के लिये चल रहे आन्दोलनों की मांगों के अनुसार उन क्षेत्रों को सिंचित घोषित किया जाये।

उपरोक्त मांगों के साथ-साथ उन्होंने स्थानीय मांगों को भी अपने मांगपत्र में उठाया। इसमें मांग की गई कि 29 अप्रैल, 2017 के समझौते के अनुसार नहरों में पर्याप्त पानी दिया जाये और पानी के वितरण के लिये उचित मात्रा में मोघों का निर्माण माप के अनुसार किया जाये। नहरों से पानी चोरी को रोका जाये। ताकि किसानों को सिंचाई के लिये पर्याप्त पानी मिले।

Tag:    चक्का जाम    कर्ज़ा मुक्ति आंदोलन    Aug 1-15 2017    Struggle for Rights    Rights     2017   

पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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