“ग़़दरियों की पुकार - इंकलाब” पुस्तक का नई दिल्ली में विमोचन

Submitted by cgpiadmin on मंगल, 15/08/2017 - 17:26

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी द्वारा “ग़दरियों की पुकार - इंकलाब” पुस्तक के पहले संस्करण का विमोचन नई दिल्ली में किया गया। यह पुस्तक हिंदी, अंग्रेजी और पंजाबी में प्रकाशित की गयी है। इस मौके पर मौजूद लोगों ने उत्साह से पुस्तक का स्वागत किया। उपस्थित भागीदारों में कई राजनीतिक पार्टियों के प्रतिनिधि, वकील, पत्रकार, शिक्षाविदों के साथ कई महिला व युवा संगठनों के कार्यकर्ता शामिल थे।

Ghadar book release in delhi
नई दिल्ली में पुस्तक विमोचन
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कामरेड प्रकाश राव
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कामरेड शियोंमगल सिद्धांतकर
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प्रोफेसर चमन लाल
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प्रशांत भूषण
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शिवानंद कणवी 
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एन.डी.पंचोली
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कामरेड प्राण शर्मा

पुस्तक का विमोचन कामरेड प्रकाश राव (हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के प्रवक्ता), कामरेड शियोंमगल सिद्धांतकर (सी.पी.आई.-एम.एल.-न्यू प्रोलेतेरियन के महासचिव), प्रोफेसर चमन लाल (प्रसिद्ध समाज-विज्ञानी और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के सेवानिवृत प्रोफेसर), प्रशांत भूषण (सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता), शिवानंद कणवी (वरिष्ठ पत्रकार और बैंगलूरू के नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडीज़ में सहायक प्राध्यापक), एन.डी.पंचोली (सामाजिक कार्यकर्ता और सिटीजन फॉर डेमोक्रेसी के नेता) और कामरेड आर.के.शर्मा (सोशलिस्ट यूनिटी सेंटर ऑफ इंडिया-कम्युनिस्ट) ने मिलकर किया। 

पुस्तक की प्रस्तावना पेश करते हुए कामरेड प्रकाश राव ने कहा कि यह पुस्तक ग़दरियों के बारे में फैलाये गए दो झूठों का पर्दाफाश करती है। एक झूठ यह है कि: ग़दरी बहादुर ज़रूर थे, मगर उनके पास कोई क्रांतिकारी सिद्धांत नहीं था। दूसरा झूठ कि: कांग्रेस पार्टी और ग़दर पार्टी के लक्ष्य में कोई अंतर नहीं था, केवल उनके संघर्ष के तरीके अलग थे।

इस किताब में मौजूद सामग्री और तथ्यों का विश्लेषण करते हुए यह दिखाया गया है कि आज से 100 साल पहले बस्तीवाद-विरोधी आन्दोलन के दौरान हिन्दोस्तान ग़दर पार्टी ने हिन्दोस्तानी संघ राज्य की परिकल्पना एक संयुक्त राज्य हिन्दोस्तान के रूप में की थी, जो कि एक बेहद विकसित राजनीतिक सोच थी। दुनियाभर में फैला पार्टी का तानाबाना यह दिखाता है कि उनके पास बेमिसाल संगठन खड़ा करने का हुनर था। प्रथम विश्व युद्ध के मौके का इस्तेमाल बर्तानवी हुकूमत से मुक्ति के लिये किया जा सकता है, उनका यह विश्लेषण उनकी उच्चस्तरीय राजनीतिक समझ को दर्शाता है। ग़दरियों का विश्लेषण कि खुल्लम-खुला सांप्रदायिक संगठनों और तथाकथित “धर्म-निरपेक्ष” कांग्रेस पार्टी, दोनों की ही भूमिका आज़ादी के आंदोलन के लिए हानिकारक है, यह उनकी सूझबूझ का एक और अनोखा उदाहरण है। उनकी यह विकसित समझ और सूझबूझ, उस रुझान के ठीक खिलाफ़ है जिससे कम्युनिस्ट आंदोलन आज भी ग्रसित है - ये धारा है मौजूदा हिन्दोस्तानी राज्य के तंत्रों और धर्म-निरपेक्षता की उसकी आधिकारिक विचारधारा से समझौता करना।

ग़दर पार्टी के बारे में फैलाये गए दूसरे झूठ का पर्दाफाश करते हुए कामरेड प्रकाश राव ने बताया कि हिन्दोस्तान ग़दर पार्टी का लक्ष्य और कांग्रेस पार्टी के लक्ष्य से पूरी तरह खिलाफ़ था। ग़दर पार्टी ने मज़दूरों, किसानों, सैनिकों और देशभक्त बुद्धिजीवियों को बस्तीवादी राज्य को पूरी तरह से उखाड़ फेंकने और उसकी जगह पर एक नए राज्य की स्थापना करने के लिए संगठित किया। उन्होंने एक ऐसे हिन्दोस्तानी राज्य की कल्पना की थी जो उन लोगों के अधिकारों की रक्षा करेगा, जो मिलकर इस हिन्दोस्तान बनाते हैं। इसके ठीक विपरीत कांग्रेस पार्टी ने मौजूदा बस्तीवादी राज्य और लूट की व्यवस्था में हिन्दोस्तान के पूंजीपतियों के हितों को शामिल करने की दिशा में काम किया। उनका मकसद था बर्तानवी बस्तीवादी हुकूमत की जगह पर बड़े हिन्दोस्तानी पूंजीपतियों और बड़े जमीनदारों की हुकूमत को कायम करना और बर्तानवी हुक्मरानों द्वारा बनाये गए राज्य के तमाम दमनकारी तंत्रों को कायम रखना, ताकि वे सभी हिन्दोस्तानियों को बांटकर उनपर अपनी हुकूमत चला सकें।

कामरेड प्रकाश राव ने इस बात पर रोशनी डालते हुए कहा कि ग़दर पार्टी अपने प्रचार और आंदोलन के द्वारा बर्तानवी सेना के हिन्दोस्तानी सैनिकों को ब्रिटेन के दूसरे उपनिवेशों, जैसे चीन के लोगों पर गोलियां चलाने से रोक पाने में कामयाब रही।

ग़दरियों की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि वे कभी भी अपने व्यक्तिगत नाम और शोहरत के लिए नहीं लड़े। उन्होंने खुद को सामूहिक नेतृत्व और व्यक्तिगत जिम्मेदारी के असूल के आधार पर संगठित किया था। इस पार्टी में कभी किसी भी तरह की गुटबाजी नहीं थी।

कामरेड प्रकाश राव ने आगे बताया कि इस पुस्तक में हमारे क्रांतिकारी इतिहास से अहम सबक निकाले गए हैं, जो आज के दौर में 150 बड़े इज़ारेदार पूंजीपति घरानों की अगुवाई में चलायी जा रही बड़े सरमायदारों की हुकूमत के खिलाफ़ संघर्ष को आगे बढ़ाने के लिए ज़रूरी है। 100 वर्ष पहले छेड़े गए बस्तीवाद-विरोधी संघर्ष में दो विपरीत धाराओं के बीच का संघर्ष आज भी जारी है। यह संघर्ष ग़दरियों के लक्ष्य को हासिल करने का संघर्ष है और इस संघर्ष से उन लोगों का तख्ता पलट किया जायेगा जिन्होंने साम्राज्यवाद के साथ समझौता किया और हिन्दोस्तान पर राज करने का लोगों का अधिकार छीन लिया। अपनी बात का समापन करते हुए उन्होंने कहा कि इस संघर्ष का लक्ष्य है हिन्दोस्तान के मज़दूरों, किसानों, महिलाओं और नौजवानों को इस देश का मालिक बनाना।

कामरेड शियोमंगल सिद्धान्तकर ने इस किताब को प्रकाशित करने में कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी द्वारा किये गए शोधकार्य और मेहनत की तारीफ़ की। उन्होंने कहा कि सभी कम्युनिस्ट पार्टियों के क्रांतिकारियों को इस किताब को पढ़ना चाहिए। हिन्दोस्तान ग़दर पार्टी के क्रांतिकारी कार्यक्रम और विचारधारा का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह एक बहुत महत्वपूर्ण बात है, कि ग़दर पार्टी ने साम्राज्यवादी युद्ध को बर्तानवी हुकूमत को खत्म करने की जंग में बदलने की कोशिश की। ग़दर पार्टी द्वारा प्रकाशित साप्ताहिक अखबार की दस लाख से अधिक प्रतियां वितरित की जाती थीं, यह अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है। यह उनके संगठनात्मक और संचार कौशल को दर्शाता है और हम कम्युनिस्टों को इससे सीखाना चाहिए। उन्होंने सभी कम्युनिस्ट पार्टियों को बुलावा दिया कि वे इस किताब को अपने सदस्यों के बीच व्यापक पैमाने पर प्रसारित करें।

प्रोफेसर चमल लाल ने कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी को इस किताब को प्रकाशित करने के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह किताब हमारे देश और लोगों के क्रांतिकारी इतिहास और परंपरा के एक बहुत ही महत्वपूर्ण अध्याय पर लिखी गयी है। उन्होंने सैन फ्रांसिस्को में ग़दर पार्टी के मुख्यालय में अपनी यात्रा के बारे में बताया। उन्होंने सभी कम्युनिस्टों और प्रगतिशील लोगों को बुलावा दिया कि वे इस पुस्तक में दिए गए क्रांतिकारी संदेश को लोगों के सभी तबकों के बीच लेकर जायें, जो मौजूदा दमनकारी व्यवस्था के खिलाफ़ लड़ रहे हैं।

प्रशांत भूषण ने इस किताब को प्रकाशित करने के लिए कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह को बधाई दी। उन्होंने एक नया हिन्दोस्तानी संघ राज्य बनाने के ग़दरियों की परिकल्पना की सराहना की। उन्होंने कहा कि आज सबसे बड़ी चुनौती है, कि किस तरह से समाज का फैसला लेने के काबिल लोगों को बनाया जा सकता है। आज सारी राजनीतिक सत्ता चंद मुट्ठीभर लोगों के हाथों में सीमित है, जो लोगों का शोषण करते हैं। उन्होंने इस बात पर लोगों का घ्यान खींचा कि वैसे तो लोग हर पांच साल में अपना वोट देते हैं, लेकिन इस व्यवस्था में सरकार के फैसलों पर कोई भी प्रभाव डालने की कोई संभावना नहीं है। लोगों के हाथों में फैसला लेने की ताक़त देने के दिशा में चुनाव व्यवस्था में बदलाव की ज़रूरत पर उन्होंने जोर दिया। 

शिवानंद कणवी ने मौजूदा संघर्ष को दिशा देने के लिए हमारे क्रांतिकारी परंपरा के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इस किताब की एक खासियत यह है कि इसमें ग़दरियों द्वारा बिना-समझौताकि संघर्ष चलाने के बात को साफ तौर से सामने रखा गया है। ग़दरियों का यह रवैया बर्तानवी बस्तीवादियों के साथ समझौता करने वाले वर्गों: पूंजीपति और जमीनदारों के वर्ग का प्रतिनिधित्व करने वाली पार्टियों, कांग्रेस पार्टी और मुस्लिम लीग के रवैये के एकदम विपरीत था। उन्होंने बताया कि 1947 में वही समझौता करने वाले सत्ता में आये और उन्होंने वैसे ही शोषण और दमन पर आधारित व्यवस्था का निर्माण किया, जैसे कि बर्तानवी हुकूमत में हुआ करता था। हिन्दोस्तान के आर्थिक विकास के कार्यक्रम की योजना भी उन लोगों ने ही बनायी, जिन्होंने बर्तानवी साम्राज्यवादियों के साथ हाथ मिलाया था। आज हमारे देश और समाज का एजेंडा और रास्ता पूंजीपति घरानों के बोर्ड रूम में तय किया जाता है। और यह हमारे देश के लोगों के सामने पेश आ रही अनगिनत समस्या की जड़ भी है। हमें एक ऐसी व्यवस्था का निर्माण करना होगा जहां समाज के फैसले लेने और उसकी दिशा तय करने में लोग सशक्त होंगे।

एन.डी. पंचोली ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी को इस किताब को प्रकाशित करने पर बधाई दी। उन्होंने हमारे देश के क्रांतिकारी इतिहास के सच को आज के नौजवानों के सामने पेश करने पर जोर दिया। अलग-अलग उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि किस तरह से हमारे हुक्मरान इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश करते हैं। क्रांति के लिए अनगिनत लोगों ने कुरबानी दी है। बर्तानवियों ने 1857 के ग़दर को वहशी तरीके से कुचल डाला वैसे ही उन्होंने 1915 के विद्रोह को भी कुचल डाला। हमारे देश के हुक्मरान “ग़दर” शब्द का अर्थ गलत रूप से पेश करते हैं, ताकि लोगों से ग़दर के असली लक्ष्य और संदेश को छुपाया जा सके। ग़दरियों ने हमारे देश के लोगों को देश का मालिक बनाने के लिए संघर्ष चलाया, न कि एक शोषक को हटाकर दूसरे शोषक को सत्ता पर बैठाने के लिए। अंत में उन्होंने कहा कि ग़दर आज भी जारी है!

कामरेड प्राण शर्मा (दिल्ली सचिव, सोशलिस्ट यूनिटी सेंटर ऑफ इंडिया-कम्युनिस्ट) ने कहा कि इस किताब को प्रकाशित करते हुए कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी हमारे देश के क्रांतिकारी इतिहास के एक महत्वपूर्ण अध्याय को सामने लाई है। इसके लिए उन्होंने कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि 1857 के ग़दर में, 1915 में ग़दर के उठाव में और आज़ादी के कई और संघर्षों में हिन्दू और मुसलमान लोगों ने कंधे से कंधा मिलाकर लड़ाई की। बर्तानवी हुक्मरान हम लोगों को धर्म और संप्रदाय के आधार पर बाँटने के लिए जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि आज हमें समाज की तमाम समस्याओं के प्रति वैज्ञानिक विचारधारा और रवैये के आधार पर सामाजिक और राजनीतिक क्रांति की ज़रूरत है, जैसे कि ग़दरियों ने अपने वक्त में किया था। 

कार्यक्रम का समापन क्रांतिकारी माहौल में हुआ। ग़दरियों के संघर्ष को उसके मुकाम तक ले जाने, लोगों के हाथों में राजनीतिक सत्ता निहित करने और समाज को तमाम शोषण और दमन से मुक्त करने के हौसले और फैसले की भावना सभी के चेहरों पर साफ नज़र आ रही थी।

Tag:    ग़़दरियों की पुकार    बस्तीवाद-विरोधी    धर्म-निरपेक्ष    Aug 16-31 2017    Voice of the Party    History    Popular Movements     Rights     2017   

पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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