माल और सेवा कर के विरोध में प्रदर्शन

Submitted by cgpiadmin on मंगल, 15/08/2017 - 15:39

1 जुलाई, 2017 को माल और सेवा कर (जीएसटी) के थोपे जाने के बाद, एक महीने से ज्यादा का समय हो गया है। इसके थोपे जाने के कई महीने पहले से और उसके बाद के दिनों से, देशभर में इसके खिलाफ़ कई प्रदर्शन चल रहे हैं। सभी क्षेत्रों में कई दुकानें और कारखाने बंद हो गए हैं। इन विरोध प्रदर्शनों में कई यूनियनों ने हिस्सा लिया। भारतीय उद्योग व्यवसाय मंडल जिसमें लगभग 17,000 बड़े और मध्यम व्यापारियों के संगठन शामिल हैं, उन्होंने देशभर में एक-दिवसीय भारत बंद का बुलावा दिया। जीएसटी के लागू किये जाने के दो दिन पहले अहमदाबाद में विरोध प्रदर्शन शुरू हुए, जिनमें करीबन 50,000 कपड़ा व्यापारियों ने बंद का आयोजन किया। इस लहर को सूरत के हीरा और कपड़ा व्यापारियों ने आगे बढ़ाया। सूचना मिली है कि गुजरात में करीब 3,00,000 व्यापारी बंद में शामिल हुए। 

Surat Traders protestसूरत में GST के खिलाफ विशाल जन प्रदर्शन

सूरत से लेकर इरोड तक और अमृतसर से लेकर इचलाकरंजी तक, बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए और इन शहरों में उत्पादन का काम लगभग ठप्प हो गया। जीएसटी के विभिन्न पहलुओं के विरोध में सूरत में जब प्रदर्शन शुरू हुए तो करीब 10,00,000 करघे शांत हो गए। टैक्सटाइल जीएसटी संघर्ष समिति ने सूरत में देश के सबसे बड़े कपड़ा बाज़ार में 2 जुलाई को एक अनिश्चितकालीन बंद का आह्वान किया। बुनकर भी एक हफ्ते से

अधिक समय के लिए हड़ताल पर गए। उन्होंने बताया कि “जीएसटी से हमारे माल की कीमत में कम से कम 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी, जबकि आज तक इस पर शून्य प्रतिशत कर था”।

तमिलनाडु में, ईरोड, करूर, नमक्कल, तिरुपुर, पल्लडम, सोमनौर और कोयंबटूर के कपड़ा शहरों में हथकरघा इकाइयों, बिजली से चलने वाले करघे, रंगाई, पैकिंग और प्रसंस्करण इकाइयों ने वस्त्र निर्माण के विभिन्न चरणों में जीएसटी को लागू करने का विरोध किया। तेलंगाना के कपड़ा व्यापारियों ने जीएसटी के दायरे से छूट की मांग की है।

कपड़ा उद्योग के अलावा, पूरे दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, राजस्थान और बिहार में प्लाइवुड उद्योग द्वारा बड़े प्रदर्शन देखने को मिले।

तमाम क्षेत्रों के, छोटे और मध्यम उद्यम इस अप्रत्यक्ष कर को लागू किये जाने के खिलाफ़ प्रदर्शनों में सबसे आगे रहे हैं। उनका कहना है कि सामान की कई श्रेणियों पर कर की दरें बहुत ज्यादा हैं और इसकी प्रक्रिया भी बेहद पेचीदा है। उन्हें डर है कि जीएसटी की वजह से वे अपना कारोबार मुनाफे़ में नहीं चला पाएंगे।

5 अगस्त को जीएसटी परिषद ने बैठक की और कुछ कदमों का ऐलान किया, जो कि कपड़ा और कृषि क्षेत्र पर जी.एस.टी के प्रभाव को कम करेंगे।

लेकिन यह साफ है कि जीएसटी से उद्योग और व्यापार के कई क्षेत्रों में काम कर रहे लाखों लोगों पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा। हालांकि सरकार यह प्रचार कर रही है कि सामानों की कीमतों में गिरावट आएगी, व्यापार और व्यापारिक अखबारों में इसके विरोध में लेख आ रहे हैं कि जी.एस.टी की वजह से उपभोग की वस्तुओं की कीमतों पर क्या असर होगा।

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पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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