नर्मदा घाटी में संघर्ष और अधिक मजबूत हुआ

Submitted by cgpiadmin on मंगल, 15/08/2017 - 16:37

जून 2017 को केन्द्र सरकार की सहमति से गुजरात सरकार ने सरदार सरोवर बांध के दरवाजे़ बंद कर दिए। उसी समय यह निर्णय लिया कि नवागाम गांव के पास नर्मदा नदी पर, सरदार सरोवर बांध की ऊंचाई को 17 मीटर बढ़ाकर 138.72 मीटर कर दिया जाएगा। इसके परिणामस्वरूप आज मध्य प्रदेश के लगभग 192 गांव और उनमें रहने वाले 40,000 परिवार डूबने की कगार पर खड़े हैं।

22 जुलाई को विस्थापितों के अधिकार के लिए रैली 22 जुलाई को विस्थापितों के अधिकार के लिए रैली
narmada valley protestविस्थापन के पहले पुनर्वास की मांग को लेकर प्रदर्शन

नर्मदा घाटी में रहने वाले लोग पिछले 31 सालों से, नदी पर बांध बनने की वजह से होने वाले अपने विस्थापन का विरोध कर रहे हैं। इस बार भी बांध के जल भराव वाले इलाको में, जैसे कि बरवानी, अलीराजपुर, धार और खरगांव जिलों के लोगों ने नदी के आस-पास की अनेक जगहों पर एक साथ आकर बहुत ही बहादुर प्रदर्शन किये। नदी के पानी का स्तर लगातार बढ़ते रहने के बावजूद वे गहरे पानी में बैनर तथा पोस्टर लेकर डटकर खड़े रहे, जिनपर लिखा हुआ था “पुनर्वासन के बिना विस्थापन नहीं होगा”। रिपोर्टाें के अनुसार, मेधा पाटकर की अगुवाई में चलने वाले नर्मदा बचाओ आंदोलन के कम से कम 12 नेता तथा कार्यकर्ता 27 जुलाई से पानी में डूबने वाले इलाकों में रहने वाले लोगों की बुरी हालतों के विरोध, में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं।

उच्च न्यायालय ने निर्देष दिए हैं कि 31 जुलाई से पहले उन लोगों का पुनर्वास किया जाए, जो लोग पानी में डूबने वाले इलाकों में रहते हैं। इस तारीख को आगे बढ़ा दिया गया है। नर्मदा बचाओ आंदोलन ने बताया है कि अभी तक कोई भी पुनर्वास नहीं किया गया है और जो जगह पुनर्वास के लिए निर्धारित की गई है वह इंसान क्या जानवर के रहने लायक भी नहीं है।

पिछले 3 दशकों के संघर्ष से लोगों का यही अनुभव रहा है कि पुनर्वास के वादे केवल तोड़ने के लिए किए जाते हंै। न तो उच्च न्यायालय के निर्देशों से और न ही कानून से कोई फर्क पड़ता है। ये तो लोगों के लगातार दृढ़ तथा संगठित संघर्षों का नतीजा है कि उन्हें कुछ हद तक पुनर्वास तथा राहत मिली है। नर्मदा घाटी के इन लोगों को पूरे राज्य भर के लोगों से व्यापक समर्थन मिल रहा है। करीबन 40,000 परिवारों ने अपना विरोध व्यक्त करने के लिए 31 जुलाई को अपने घरों में चूल्हे नहीं जलाए।

Tag:    नर्मदा    विस्थापित    विरोध प्रदर्शन    Aug 16-31 2017    Struggle for Rights    Popular Movements     Rights     2017   

पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

(Click thumbnail to download PDF)

यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)

यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)

हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)

ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)