सर्व हिन्द मज़दूर अधिवेशन में शासक वर्ग के मज़दूर-विरोधी, जन-विरोधी हमले के खिलाफ़ संघर्ष को तेज़ करने का फैसला लिया गया

Submitted by cgpiadmin on मंगल, 15/08/2017 - 17:29

नयी दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में 8 अगस्त, 2017 को एक सर्व हिन्द मज़दूर अधिवेशन हुआ। एटक, सीटू, इंटक, एच.एम.एस., ए.आई.यू.टी.यू.सी., टी.यू.सी.सी., सेवा, ए.आई.सी.सी.टी.यू., यू.टी.यू.सी. और एल.पी.एफ. ने संयुक्त रूप से इस अधिवेशन को आयोजित किया था। रक्षा संयंत्रों, इस्पात कारखानों, कोयले की खदानों, रेलवे, बैंक, बीमा और अर्थव्यवस्था के अनेक अन्य क्षेत्रों के मज़दूरों की फेडरेशनों से 6000 से अधिक प्रतिनिधियों ने अधिवेशन में भाग लिया। मज़दूर एकता कमेटी के एक प्रतिनिधिमंडल ने अधिवेशन में सक्रियता से भाग लिया।

 

TU Leadersट्रेड यूनियनों के नेतागण मजदूरों को संबोधित करते हुए
6000 worker representativesतालकटोरा स्टेडियम में मजदूरों के सम्मलेन का एक दृश्य

इंटक के अध्यक्ष डाक्टर संजीव रेड्डी, एटक की सचिव कामरेड अमरजीत कौर, एच.एम.एस. के महासचिव कामरेड हरभजन सिंह सिद्धू, सीटू के महासचिव कामरेड तपन सेन, ए.आई.यू.टी.यू.सी. के सचिव कामरेड शंकर साहा, ए.आई.सी.सी.टी.यू. के महासचिव कामरेड राजीव डिमरी, सेवा के महासचिव कामरेड मनाली, एल.पी.एफ. के महासचिव कामरेड एम. शनमुगम और यू.टी.यू.सी. की कार्यकारी समिति के सदस्य एन.के. प्रेमचंद्रन ने सभा को संबोधित किया। 

मज़दूरों को संबोधित करते हुए, वक्ताओं ने शासक वर्ग के मज़दूर-विरोधी, जन-विरोधी हमलों के खिलाफ़ संघर्ष को तेज़ करने का ऐलान किया। उन्होंने सामुदायिक और सांप्रदायिक आधार पर लोगों को बांटने तथा समाज में अमन और शांति भंग करने के शासकों के पैशाचिक प्रयत्नों को हराकर, मेहनतकशों की एकता मजबूत करने का संकल्प प्रकट किया। उन्होंने मज़दूर वर्ग और ट्रेड यूनियनों की एकता को बनाए रखने के लिए काम करने का वादा किया। उन्होंने किसानों और समाज के अन्य संघर्षशील तबकों के साथ एकता और भाईचारा बनाने व मजबूत करने का फैसला लिया।

वक्ताओं ने इस बात की कड़ी निंदा की कि सबसे बड़े हिन्दोस्तानी और विदेशी इज़ारेदार पूंजीवादी घरानों को बेशुमार मुनाफे़ कमाने के लिए, हमारी जनता की भूमि, श्रम और कुदरती संसाधनों को लूटने की पूरी छूट दी जा रही है। उन्होंने मज़दूरों के शोषण को बढ़ाने के लिए श्रम कानूनों में लाये जा रहे परिवर्तनों की निंदा की। उन्होंने इसके खिलाफ़ संघर्ष को तेज़ करने का वादा किया।

अधिवेशन ने सरदार सरोवर परियोजना से प्रभावित लोगों के पुनर्वास की मांग को लेकर चल रही भूख हड़ताल का समर्थन किया।

अधिवेशन में यह फैसला लिया गया कि फौरी कार्यक्रम बतौर, नवम्बर 9, 10 और 11, 2017 को संसद पर एक तीन-दिवसीय धरना कार्यक्रम होगा, जिसके लिए बड़ी संख्या में लोगों को लाना होगा। इससे पहले, हर राज्य और जिले में तथा औद्योगिक स्तर पर, अधिवेशन किये जायेंगे। संसद पर नवम्बर 9, 10 और 11 के धरने के बाद, देशभर में अनिश्चितकालीन हड़ताल करने की योजना बनायी गयी।

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी मज़दूर वर्ग के सभी कार्यकर्ताओं से आह्वान करती है कि शासक वर्ग के मज़दूर-विरोधी, जन-विरोधी हमलों के खिलाफ़ संघर्ष के दौरान, मज़दूर वर्ग की एकता को मजबूत करें।

सर्व हिन्द मज़दूर अधिवेशन में अपनाए गए घोषणा पत्र के कुछ अंश

सम्मेलन ... गौर करता है कि सरकार देशभर की समस्त ट्रेड यूनियनों द्वारा संयुक्त रूप से न्यूनतम मज़दूरी, सामाजिक सुरक्षा, स्कीम वर्कर्स को मज़दूर का दर्ज़ा एवं भुगतान व सुविधाएं, निजीकरण और बड़े पैमाने पर ठेकेदारी का विरोध जैसी 12 सूत्रीय मांग के लिए देशभर में किए गए आंदोलनों को लगातार अनदेखा कर रही है। सरकार की मज़दूर-विरोधी नीतियों के खिलाफ़ करोड़ों मज़दूरों की सक्रिय भागीदारी के साथ की गई, कई राष्ट्रव्यापी संयुक्त हड़ताली कार्यक्रमों, जिनमें की 2 सितम्बर, 2015 और 2 सितम्बर, 2016 की हड़तालें प्रमुख हैं, के बावजूद केन्द्र सरकार ... हमले बढ़ाती जा रही है। संगठित और असंगठित क्षेत्र दोनों ही समान रूप से पीड़ित हैं।

... उद्योगों की बंदी और कामबंदी का परिदृश्य और आईटी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर नौकरियों के खत्म होने की भविष्यवाणी आग में घी डालने का कम कर रही है। लोक परिवहन, बिजली, दवाइयों आदि समेत अनिवार्य वस्तुओं के दामों में वृद्धि आम तौर से लोगों के रोज़गारों की ज़िन्दगी पर दबाव के साथ-साथ दरिद्रता बढ़ा रही है। ... जीएसटी  ने आग को भड़काने का काम किया है। सार्वजनिक क्षेत्र और कई कल्याणकारी योजनाओं के लिए सरकारी खर्च में हुई भारी कटौती ने मज़दूरों और खासतौर से असंगठित क्षेत्र के मज़दूरों की हालत को और खतरनाक बना दिया है।

सरकार ... समान काम के लिए समान वेतन और लाभ, 15वीं इंडियन लेबर कांफ्रेंस तथा सर्वोच्चय न्यायालय के निर्णय के मानदंडों के अनुसार मिनिमम वेज का प्रतिपादन, आंगनबाड़ी, मिड-डे-मिल और आशा आदि स्कीम वर्करों को मज़दूरों का दर्ज़ा देने के ... सर्वोच्चय न्यायालय के फैसले को लागू करने से इंकार कर रही है।

... सबसे ताजातरीन हमला इम्पलाइज प्रोविडेन्ट फंड आर्गेनाइजेशन, कोल माइन्स प्रोविडेन्ट फंड और इम्पलाइज स्टेट इन्श्योरेंस कार्पोरेशन और कई-कई अन्य कल्याणकारी अधिनियमों के तहत मौजूदा वैधानिक सामाजिक सुरक्षा ढांचे को विघटित और विखंडित कर सामाजिक सुरक्षा कोड को प्रस्तुत करने की ओर बढ़ रही है।

सभी सामरिक महत्व के सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों जिनमें रक्षा (डिफेंस) उत्पादन, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, इश्योरेंस, रेलवे, जन सड़क परिवहन, तेल शामिल हैं का विनिवेशीकरण, युक्तिपूर्ण बिक्री, आउटसोर्सिंग से प्राइवेट क्षेत्र के हित में निजीकरण कर रही है। ... रेलवे द्वारा बनाए गए रेलवे ट्रैक पर प्राइवेट रेलों को चलाए जाने की अनुमति दी गई है।

विभिन्न मेट्रो शहरों में 23 रेलवे स्टेशनों को निजीकरण के लिए चुना गया है। रेलवे कर्मचारी रोज़गार सुरक्षा, जनतांत्रिक ट्रेड यूनियन अधिकारों और वेतन, भत्ते, सामाजिक सुरक्षा आदि में ली गई उपलब्धियों को बचाने के संदर्भ में निजीकरण के सबसे बड़े शिकार होंगे। ...

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों पर वैधानिक और कार्यकारी तरीकों से हमले हो रहे हैं। सरकार का एकमात्र उद्देश्य निजीकरण है और उन्हीं निजी कॉर्पोरेट बेईमानों को अनुचित लाभ पहुंचाना है। जिन्होंने बैकों से लिया कर्ज़ अदा नहीं किया और जिनके कारण बैंक क्षेत्र काफी दिक्कत में है। कुछ बैंकों में अनुबंध कर्मचारियों की छंटनी शुरू कर दी गई है। इश्योरेंस सेक्टर भी इसी तरह के हमलों से जूझ रहा है। हमारे प्रमुख बदंरगाहों को भी निजीकरण करने के लिए वैधानिक प्रावधान अंतिम चरण में है।

केन्द्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों के प्रमुख और सामरिक महत्व के सेक्टरों ... के निजीकरण के प्रचंड अभियान में हैं। ... सरकारी क्षेत्र के मज़दूरों एवं कर्मचारियों के साथ-साथ सभी स्कीम वर्करों की ओर से संयुक्त आंदोलन ... को सम्मेलन अपना पूर्ण समर्थन देता है।

राज्य सरकारों की ... केन्द्र सरकार की मंशा इसी ससंद सत्र में नए ‘मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम 2017’ को लाने की जल्दी है जो कि पूरी तरह से मार्ग परिवहन को निजीकरण करने की अनुमति देगा। यह सम्मेलन ... परिवहन क्षेत्र में राज्य सरकारों और केन्द्र सरकारों के जन-विरोधी और मज़दूर-विरोधी योजनाओं की भत्र्सना करता है।

... सम्मेलन विभिन्न राज्यों में संघर्षशील किसानों और साथ ही साथ किसान संगठनों के संयुक्त नेशनल फोरम के साथ अपनी एकजुटता व्यक्त करता है। कृषि क्षेत्र जो कि अर्थव्यवस्था में सबसे ज्यादा रोज़गार देने वाला क्षेत्र है जिसमें हो रही आत्महत्याओं के बावजूद ऐसी कॉर्पोरेट-पक्षीय, जमींदार-पक्षीय नीतियों को बढ़ाया जा रहा जिनकी वजह से कृषि क्षेत्र में संकट खड़ा हो रहा है।

... सम्मेलन वर्तमान सरकार के तहत सरकारी मशीनरी के संरक्षण में समाज में चलाए जा रहे साम्प्रदायिक और विभाजक षड्यंत्रों के विरुद्ध अपनी तीव्र निंदा लिखता है। ... यह माहौल आमतौर पर मज़दूरों और मेहनतकश जनता की एकता को भंग कर रहा है ... मज़दूर वर्ग को इन साम्प्रदायिक विभाजक शक्तियों के लिए अपनी मजबूत आवाज़ उठानी चाहिए।

... देश के सभी भागों में आमतौर से मज़दूरों और मेहनतकशों पर होने वाले हमलों से राष्ट्र के सामने संकट गहराता जा रहा है।

वहीं दूसरी ओर, मज़दूर वर्ग ने आत्मघाती जन-विरोधी नीतियों के विरुद्ध जारी हड़तालों समेत अन्य संघर्षों से ट्रेड यूनियन आंदोलन की मजबूत एकता बड़ी की है।

सम्मेलन निम्नलिखित कार्यक्रमों को अपनाता है :

  1. अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों में उठाई गई अपनी मांगों के संदर्भ में संयुक्त आंदोलनों को खड़ा करने और आंदोलनों को तेज़ करने की दिशा में काम करना।
  2. ब्लॉक/जिला/केन्द्रीय/राज्य सरकार के औद्योगिक केन्द्रों पर भीषण प्रचार, लामबंदी और सम्मेलन आयोजित करना।
  3. राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 9, 10 और 11 नवंबर, 2017 को तीन दिन का लगातार हर रोज़ एक विशाल पड़ाव आयोजित करना, जिसमें देशभर के लाखों मज़दूर भागीदारी करेंगे।
  4. सरकार की जन-विरोधी, राष्ट्र-विरोधी नीतियों के खिलाफ़ अनिश्चितकालीन देशव्यापी हड़ताल के लिए तैयार हों!

सम्मेलन विभिन्न सेक्टरों में कार्यरत देशभर की मज़दूर जनता को आह्वान करता है कि संबद्धताओं से ऊपर उठकर इस कार्यक्रम को पूरी तरह सफल बनाएं।

Tag:    workers rally    सर्व हिन्द सम्मलेन    Aug 16-31 2017    Struggle for Rights    Economy     Popular Movements     Rights     2017   

पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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