9 अगस्त को देशभर में किसानों द्वारा प्रदर्शन

Submitted by cgpiadmin on शनि, 02/09/2017 - 17:17

देशभर के 150 से भी अधिक जिलों में हजारों किसानों ने भूमि अधिकार आंदोलन के आह्वान पर 9 अगस्त को प्रदर्शन किया। भूमि अधिकार आंदोलन, किसानों, कृषि मज़दूरों, वनवासियों, दलितों और आदिवासियों के भूमि अधिकारों के लिए काम कर रहे संगठनों का गठबंधन है। अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति (ए.आई.के.एस.सी.सी.) ने मंदसौर में मारे गए किसानों के गांवों की मिट्टी को लेकर देष के अलग-अलग भागों में यात्रा का आयोजन किया था, जिसका समापन दिल्ली में किया गया। किसानों की इस यात्रा का समर्थन भूमि अधिकार आंदोलन ने भी किया था।

Farmers protest on 9 August

किसानों की दो प्रमुख मांगों के समर्थन में समन्वय समिति ने यह आह्वान देशभर में दिया गया था कि उनके सभी ऋण माफ कर दिए जाएं और उन्हें स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुसार सभी फसलों के लिए उत्पादन की लागत में 50 प्रतिशत अधिक लाभकारी मूल्य दिया जाए। देशभर में, किसानों ने अपनी मुख्य मांगों को पूरा करवाने के लिए रैलियों, सभाओं और जेल भरो आंदोलन का आयोजन किया। आयोजकों ने सभी जिलों में गांव-गांव का दौरा किया और किसानों से अपील की कि 9 अगस्त से शुरू होने वाले विरोध प्रदर्शनों में शामिल हों।

राजस्थान में ऐसे प्रदर्शन 15 जिलों में किये गये। हरियाणा में, रोहतक के जिला आयुक्त के कार्यालय के सामने प्रदर्शन हुआ। हिमाचल प्रदेश के शिमला में केंद्रीय स्तर पर एक प्रदर्शन हुआ जिसमें हजारों किसानों ने भाग लिया। पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा, ओड़िशा, बिहार, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब और मध्य प्रदेश के कई जिलों में विरोध प्रदर्शन किये गये। रीवा में, किसानों ने अपने साथ 400 से अधिक पशुओं को लेकर विरोध किया। राजस्थान के झुनझुनु जिले में हजारों किसान सड़कों पर उतरे। आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक सहित दक्षिणी राज्यों के दर्जनों जिलों में भी विरोध प्रदर्शन हुये।

देशभर में यह मांग बढ़ रही है कि राज्य सब्जियों और दूध सहित सभी कृषि उत्पादों के लिए लाभकारी खरीदी मूल्य निर्धारित करे तथा राज्य निर्धारित कीमतों पर उनके उत्पादों की खरीदी सुनिश्चित करे। पिछले तीन सालों से बेमौसम बारिश और गंभीर सूखे के कारण फसलों की पैदावार की कीमतों में अस्थिरता की वजह से किसानों की बर्बादी बढ़ गई है। मध्य प्रदेश में किसानों का संघर्ष 6 जून को मंदसौर में बेरहमी से कुचल दिया गया, जिससे देशभर के कई राज्यों में किसान विरोध प्रदर्शनों के लिए लामबंध हुए। इस बीच, तमिलनाडु के किसानों ने भी अपने राज्य और दिल्ली में ऐसी ही मांगों को लेकर शक्तिशाली प्रदर्शन आयोजित किए।

हजारों किसानों के एकजुट आंदोलन को देखकर केंद्र सरकार और विभिन्न राज्य सरकारें उन्हें सहायता देने के तमाम प्रकार के वादे करने पर मजबूर हो गईं। लेकिन ये वादे खोखले निकले, जिसकी वजह से किसानों को अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखना पड़ा।

9 अगस्त को हुए विरोध प्रदर्शन के बाद, तत्कालीन भविष्य के लिये, ए.आई.के.एस.सी.सी. ने अभियान की योजना बनाने के मकसद से 11 अगस्त को दिल्ली में एक मीटिंग की। उसने किसानों की मांगों पर व्यापक एकता बनाने का आह्वान किया और इस मुद्दे पर काम करने वाले सभी संगठनों को अभियान से जुड़ने का आह्वान भी दिया। ए.आई.के.एस.सी.सी. का उद्देश्य पूरे देश के किसानों को संसद के शीतकालीन सत्र की शुरुआत के साथ बड़े पैमाने पर विरोध करने के लिए दिल्ली पहुंचाने का है।

विरोध यात्रा तीन चरणों में आयोजित करने की योजना बनाई गई है। इस विरोध यात्रा की शुरुआत 31 अगस्त से होगी और ये हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश तथा जम्मू और कश्मीर से होते हुए जाएगी। 16 सितंबर को, इस विरोध यात्रा का दूसरा चरण देश के दक्षिणी हिस्सों से शुरू होगा। इसके बाद, पूर्वी और उत्तर-पूर्वी राज्यों में 10 अक्तूबर से 10 नवंबर तक विरोध प्रदर्शनों का आयोजन किया जाएगा। योजना में 2 अक्तूबर को बिहार के चंपारण में एक किसान रैली का आयोजन भी शामिल है। इन सभी विरोध प्रदर्शनों के नतीजे के रूप में, पूरे देश के किसानों को 20 नवंबर को दिल्ली में होने वाले महाप्रदर्शन के लिए लामबंध किया जाएगा।

11 अगस्त को योजना बनाने के लिये दिल्ली में हुई सभा में दो प्रस्ताव पारित किए गए। पहले प्रस्ताव में मध्य प्रदेश सरकार द्वारा “नर्मदा घाटी में रहने वाले लोगों के विरोध प्रदर्शन को रोकने के लिए गैर-लोकतांत्रिक तरीकों का इस्तेमाल” किए जाने की निंदा की गई। दूसरा प्रस्ताव तमिलनाडु के किसानों की मांगों के समर्थन में था।

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पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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