वीवो इंडिया प्राइवेट लिमिटेड: “मेक इन इंडिया” पहल का असली चेहरा

Submitted by cgpiadmin on शनि, 02/09/2017 - 16:46

25 जुलाई, 2017 को उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में कारखाना परिसर में मज़दूरों के साथ हुए टकराव से उत्पन्न “मज़दूर अशांति” से वीवो इंडिया प्राइवेट लिमिटेड सुर्खियों में आ गयी। हमेशा की तरह, इज़ारेदार पूंजीपतियों द्वारा नियंत्रित मीडिया ने घटनाओं को तोड़-मरोड़कर पेश किया। वीवो के मज़दूरों को हिन्दोस्तान को “बदनाम” करने और शासक सरमायदार वर्ग के द्वारा चलाये जा रहे “मेक इन इंडिया” पहल में मुश्किलें पैदा करने के लिए दोषी ठहराया गया।

वीवो चीन की एक स्मार्टफोन का उत्पादन करने वाली कंपनी है, जिसने दिसंबर 2015 में “मेक इन इंडिया” पहल के तहत हिन्दोस्तानी बाज़ार में प्रवेश किया। यह कंपनी इंडियन प्रीमियर लीग 2017 (आई.पी.एल. 2017) की प्रायोजक भी थी। अधिक रोज़गार पैदा करने का दावा करते हुए सरकार अपने बहुचर्चित “मेक इन इंडिया” पहल के तहत बहुराष्ट्रीय पूंजीवादी कंपनियों को हिन्दोस्तान में उत्पादन करने के लिए बढ़ावा दे रही है। इस संदर्भ में वीवो इंडिया प्राइवेट लिमिटेड का मामला काम की अमानवीय परिस्थितियों का एक स्पष्ट उदाहरण है, जो कि इस पहल की खासियत है।

पी.यू.डी.आर. की टीम द्वारा की गयी जांच से पता चला है कि वीवो इंडिया प्राइवेट लिमिटेड का प्रबंधन मज़दूरों के क्रूर शोषण और उत्पीड़न की नीति अपना रहा है। यह कंपनी “हायर एंड फायर” के तहत बिना नोटिस दिए नौकरी से कभी भी निकाल देने की नीति को बेरहमी से लागू कर रही है। यहां मज़दूरों को न तो साप्ताहिक छुट्टी मिलती है, और न ही कोई वैधानिक अधिकार दिये जा रहे हैं। कंपनी के मज़दूर लगातार अपनी शिकायतों के समाधान की मांग करते आ रहे हैं। प्रबंधन ने बड़ी हेकड़़ी के साथ मज़दूरों की आवाज़ को सुनने से इंकार कर दिया है।

इस समय कंपनी में 6,000 से अधिक मज़दूर हैं और ये सभी मज़दूर ठेके पर काम रहे हैं। ये सभी मज़दूर आई.टी.आई. से प्रशिक्षित कुशल कारीगर हैं। इस यूनिट में, चीन से आयत किये गए पुर्जों को जोड़कर स्मार्टफोन बनाये जाते हैं। मई 2017 में, आई.पी.एल. सत्र के अंत में, कंपनी में करीब 24,000 ठेका मज़दूर थे, जिन्हें पिछले दो महीनों में बिना कोई नोटिस दिए धीरे-धीरे काम से निकाल दिया गया है।

यहां काम की परिस्थितियां बेहद दमनकारी हैं। मज़दूरों को बिना किसी छुट्टी के 30 दिन काम करने के लिए मजबूर किया जाता है। पी.एफ. और ई.एस.आई. की कटौती के बाद, महीने में उनकी कुल मज़दूरी केवल 7,100 रुपये रह जाती है। काम से एक दिन की अनुपस्थिति के लिए, उनके वेतन से 2,000 रुपयों की कटौती की जाती है। मज़दूरों को लंच ब्रेक के लिए सिर्फ आधे घंटे का समय दिया जाता है और चाय अवकाश के लिए सिर्फ 10 मिनट का समय मिलता है। इन अवकाशों के अलावा, यदि कोई मज़दूर शौचालय जाने के लिए असेंबली लाइन छोड़ता है, तो उसे सज़ा दी जाती है। मज़दूरों को प्रति घंटे 160 फोन तैयार करने के लक्ष्य को कायम रखना पड़ता है, यदि वे इस लक्ष्य में नाकामयाब होते हैं तो उन्हें नौकरी से निकाला भी जा सकता है। मज़दूरों को पी.एफ. राशि केवल 6 महीने काम करने के बाद ही उपलब्ध होती है, लेकिन कंपनी 5 महीने से अधिक समय के लिए किसी भी मज़दूर को काम पर नहीं रखती है। उनको अक्सर अपने सुपरवाइजर से गाली-गलौच और अपमान का सामना करना पड़ता है और मज़दूरों को अपनी नौकरी जाने का लगातार खतरा बना रहता है।

इन हालतों में, कंपनी से मज़दूरों की छंटनी का एक और दौर चलने के बाद 25 जुलाई, 2017 को मज़दूरों ने हड़ताल कर दी। इसके बाद मज़दूरों पर कंपनी परिसर में संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और प्रबंधन पर हमला करने का आरोप लगाया गया। उन्हें पुलिस और ठेकेदार तथा प्रबंधन के गुंडों द्वारा बुरी तरह से पीटा गया। 30-35 मज़दूर गिरफ्तार किए गए और सैकड़ों मज़दूरों के खिलाफ़ प्रबंधन ने गैरकानूनी सभा करने, दंगा और चोरी करने, घातक हथियार से लैस होने, इत्यादि के आरोप लगाये हैं और उनके खिलाफ़ एफ.आई.आर. दर्ज करवाई है।

“मेक इन इंडिया” पहल के तहत दी गई विभिन्न रियायतों का फायदा उठाने की उम्मीद से स्मार्टफोन निर्माता कंपनियां हिन्दोस्तान में उत्पादन करने के लिए बड़ी संख्या में आई हैं। हिन्दोस्तान का संभावित विशाल बाज़ार उनके लिए अधिक से अधिक मुनाफ़े बनाने का अच्छा मौका देता है। सिर्फ एक वर्ष में 37 से अधिक मोबाइल निर्माताओं ने हिन्दोस्तान में अपनी इकाइयां स्थापित की हैं जिनमें से एक है, चीन की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी, हुवावे। लेकिन, जैसा कि वीवो के मामले में नज़र आता है, इन कंपनियों के मज़दूरों को वेतन लिए गुलामी के सबसे बर्बर रूप का सामना करना पड़ता है और वैश्विक पूंजीवादी निर्माताओं के हितों की सेवा में मज़दूरों को सभी अधिकारों से वंचित रखा जाता है।

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पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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