समझौते की राजनीति में नहीं फंसना चाहिए

Submitted by cgpiadmin on शनि, 02/09/2017 - 16:18

संपादक महोदय,

मैंने मज़दूर एकता लहर के 1-15 अगस्त के अंक में प्रकाषित पार्टी के बयान “हिन्दोस्तान के लोग तभी आज़ाद होंगे जब हम 1947 में स्थापित किये गये बड़े पूंजीपतियों के राज की जगह पर अपना राज स्थापित करेंगे” को पढ़ा। मुझे इस लेख ने एक ऐसे छुपे हुए इतिहास के बारे में अवगत करवाया जो प्रेरणादायक है। प्रधानमंत्री और शासक वर्ग के वक्ता कहते हैं कि हमारे देश के क्रान्तिकारी शहीदों का उदेश्य 70 वर्ष पहले ही हासिल हो गया। देष को आज़ाद हुए 70 साल हो चुके हैं, मगर अभी भी हमारे देश के बहुत से लोगों को खाने के लिये दो वक्त की रोटी नहीं है। महिलाओं और बच्चों के लिये स्वास्थ सेवा की सुविधा नहीं है। नौजवानों को रोजगार नहीं, मजदूरों को 12 से 16 घंटे काम करना पड़ता है फिर भी काम की सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं है। किसान आत्महत्या कर रहे हैं, मज़दूर अपने हक़ के लिए संघर्ष करते हैं तो उन्हें पुलिस का डंडा पड़ता है। नौजवान अपने अधिकारों के लिए आवाज़ उठाते हैं तो उन्हें देशद्रोह के नाम पर जेल में डाल दिया जाता है। पुलिस और न्याय व्यवस्था लोगों के हितों में काम नहीं करते। क्या हमें लगता है कि हम आज़ाद हैं?
आज भी हम उसी व्यवस्था को झेल रहे हैं जिसे बर्तानवियों ने अपने राज को चलाने के लिये बनाया था और हमारे देश के क्रान्तिकारियों के उद्देश्यों को चकनाचूर किया था तथा उनके बारे में झूठा प्रचार फैलाया था।
हमें अपने देष के क्रांतिकारी इतिहास से सीखना होगा और क्रांतिकारियों के उद्देश्यों को पूरा करना होगा, ठीक उसी तरह जिस तरह 1857 का महान ग़दर ने सबको हिला दिया था। उनका उद्देश्य यह नहीं था जो आज है, उनका उद्देश्य था बर्तानवी राज को खत्म करके एक नया राज्य स्थापित करना। जहां सभी को महसूस हो कि वे देश के भविष्य के मालिक हैं, जहां उन्हें सुख और सुरक्षा मिले। हमारे सभी क्रान्तिकारी अपने जाति और धर्म को छोड़कर एकजुट हुए थे।
संक्षेप में, मैं यह कहना चाहती हूं कि हम सभी को यह समझना होगा कि हमारा भविष्य, हमारे हाथ में है। हमें समझौते की राजनीति में नहीं फंसना चाहिए। हमें एक नया राज्य स्थापित करना होगा। उसके लिये हम सभी को संगठित होकर पूंजीपतियों की राज्य व्यवस्था की जगह पर मज़दूरों और किसानों का राज्य स्थापित करना होगा। तभी हम आज़ाद होंगे।
आपकी एक पाठिका

 

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पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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