आर.सी.ई.पी. में गुप्त व्यापार समझौता वार्ता के खिलाफ़ प्रदर्शन

Submitted by cgpiadmin on शनि, 02/09/2017 - 16:47

रीजनल कॉम्प्रेहेंसिव इकॉनामिक पार्टनरशिप (क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक सांझेदारी-आर.सी.ई.पी.) के 19वें दौर की वार्ता 18-28 जुलाई, 2017 के बीच हैदराबाद में अयोजित की गयी। आर.सी.ई.पी. का गठन 2002 में हुआ था। यह 16 देशों का एक मंच है जहां ये देश आपसी व्यापार के मुद्दों पर चर्चा करते हैं, जैसे कि उनके बीच किस हद तक व्यापार बाधाओं को खत्म किया जा सकता है, जिसमें आयात शुल्क, इत्यादि शामिल हैं। इस सांझेदारी में दक्षिण-पूर्व एशिया के आसियान (ए.एस.ई.ए.एन.) के 10 देश - सिंगापुर, मलेशिया, थाईलैंड, वियतनाम, इंडोनेशिया, लाओस, कंबोडिया, ब्रूनेई, म्यांमार और फिलीपींस तथा छह अन्य देश - ऑस्ट्रेलिया, चीन, हिन्दोस्तान, जापान, न्यूजीलैंड और दक्षिण कोरिया, जो आसियान देशों के साथ व्यापार समझौते में प्रवेश कर चुके हैं।

RCEP protest 1
RCEP protest 2

आर.सी.ई.पी. की सौदेबाजी की किसान संगठनों सहित, स्वास्थ्य सेवा, कृषि, मज़दूर अधिकार, वित्तीय और सार्वजनिक सेवाओं के लिये काम करने वाले अनेक जन संगठनों ने कड़ी निंदा की है। उनका कहना है कि जब व्यापार और पूंजी निवेश से जुड़े ये समझौते लागू किये जायेंगे, तब हिन्दोस्तान के लोगों पर इसका बेहद बुरा असर होगा। इस समझौता वार्ता में हिस्सा लेने के लिए उन्होंने हिन्दोस्तानी सरकार पर सवाल उठाये, क्योंकि इन समझौतों के अनुसार कोई भी विदेशी पूंजी निवेशक हिन्दोस्तान की सरकार पर मुकदमा चला सकता है, सरकार द्वारा नीतियां बनाये जाने पर सीमाएं लगायी जा सकती हैं, और जीवन-बचाने वाली दवाइयों तक हमारी पहुंच और स्वयं के बीज बनाने की संप्रभुता को खतरे में डाला जा रहा है।

 

जैसे ही ये समझौते लागू होते हैं आर.सी.ई.पी. में शामिल सभी देशों को अपने आयात शुल्क को घटाकर एक सर्वसम्मत रियायत दर पर लाना होगा। ये सौदेबाजी गुप्त रूप से लोगों की पीठ के पीछे की गई है। इसलिए जाहिर है कि लोग इससे बेहद चिंतित हैं कि सरकार किसी ऐसे समझौते पर हस्ताक्षर न कर दे जिसका लोगों पर भारी नकारात्मक प्रभाव होगा। कुछ रिपोर्टें बताती हैं कि मौजूदा मुक्त व्यापार समझौते (एफ.टी.ए.) बरकरार रखे जायेंगे और आर.सी.ई.पी. इसमें कई नयी रियायतों की सूची जोड़ देगा। कुछ अन्य रिपोर्टें बताती हैं कि आर.सी.ई.पी. के इस हैदराबाद समझौता वार्ता दौर में चर्चा की गई कि जिन 92 सामग्रियों का व्यापार हो रहा है उन पर से आयात शुल्क पूरी तरह हटा दिये जायें। इस बारे में कोई साफ जानकारी नहीं है कि क्या हिन्दोस्तान ने इन प्रस्तावों को मान लिया है या फिर इस प्रस्ताव की असली शर्तें क्या हैं। लेकिन हैदराबाद समझौता वार्ता दौर से लोगों में यह डर फैल गया है कि यदि हिन्दोस्तान इस समझौते पर हस्ताक्षर करता है तो हिन्दोस्तानी बाज़ार में इन 15 देशों से निर्यात किये जा रहे माल पर आयात शुल्क शून्य हो जायेगा, तो दूध, सभी तरह के फल, सब्जियां, दालें, आलू, मसाले, बागान फसलें, बीज, मखमल और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों के आयात के लिए हिन्दोस्तान के बाज़ार के दरवाजे़ खोल देने पड़ेंगे। अंदाज़ा लगाया जा रहा है कि इससे हिन्दोस्तान के करोड़ों किसानों की रोज़ी-रोटी खतरें में पड़ सकती है। (15 करोड़ लोग तो केवल डेरी उद्योग क्षेत्र से हैं)

हिन्दोस्तान के किसानों को पहले से ही लागू कई मुक्त व्यापार समझौतों की वजह से नुकसान उठाना पड़ रहा है, जैसे कि आसियान-हिन्दोस्तान एफ.टी.ए. और हिन्दोस्तान-श्रीलंका एफ.टी.ए.। पाम तेल, काली मिर्च और चाय के सस्ते आयात के चलते दक्षिण हिन्दोस्तान के कई किसान बर्बाद हो गए हैं। उनका यह डर बिलकुल जायज़ है कि यदि हिन्दोस्तान के कृषि बाज़ार को आर.सी.ई.पी. देशों से आने वाले सस्ते माल के लिए खोल दिया गया तो और अधिक पैमाने पर किसान बर्बाद हो जायेंगे। न केवल पाम तेल और कोयला बल्कि कई रसायनों, इस्पात, रबर, प्लास्टिक जैसे अर्थव्यवस्था के कई क्षेत्रों पर एफ.टी.ए. का व्यापक असर हुआ है।

हिन्दोस्तान की सरकार आर.सी.ई.पी. का इस्तेमाल करके हिन्दोस्तान से आई.टी. और आई.टी. समर्थित सेवाओं के निर्यात में आने वाली सभी बाधाओं को कम करने या पूरी तरह से हटाने के लिए करना चाहती है। इसके साथ ही चीन, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड तथा कई अन्य देश हिन्दोस्तान को निर्यात किये जाने वाली उत्पादित वस्तुओं और कृषि के माल पर निर्यात शुल्क और अन्य बाधाओं को कम करना चाहते हैं। जापान और दक्षिण कोरिया दवाइयों के क्षेत्र में और अधिक कड़े पेटेंट कानूनों की मांग कर रहे हैं, जिससे हिन्दोस्तान में बनायी जाने वाली जेनेरिक (गैर ब्रांड वाली) दवाओं के उत्पादन और निर्यात पर असर होगा, क्योंकि हिन्दोस्तान में बनायी गयी दवाइयां पेटेंट दवाइयों से काफी सस्ती हैं। ऐसी खबर है कि हिन्दोस्तान की सरकार आई.टी. और आई.टी. समर्थित सेवाओं के निर्यात में बढ़ोतरी करने के लिए हिन्दोस्तान के किसानों और छोटे उत्पादकों के हितों की बलि चढ़ाने के लिए तैयार हो सकती है। इन खबरों की वजह से देश के किसानों और छोटे उत्पादकों के बीच इन प्रस्तावित समझौतों को लेकर काफी चिंता और प्रतिरोध फैला हुआ है।

 

हिन्दोस्तान की सरकार इन समझौतों पर चल रही चर्चा को बेहद गुप्त रखे हुए है। दो महीने पहले हनोई में हुई वार्ता के बारे में कुछ भी साफ तौर से नहीं बताया गया है, और यही अस्पष्टता हैदराबाद समझौता वार्ता दौर तक बरकरार है। कई बड़़े और छोटे व्यापारी संगठन, किसान संगठन और डेरी को-ऑपरेटिव मांग कर रहे हैं कि सितम्बर में होने वाले अगले दौर के लिए तैयारी शुरू होने से पहले सरकार को उनके साथ सलाह मशवरा करना चाहिए।

Tag:    व्यापार    समझौता    Sep 1-15 2017    Struggle for Rights    Economy     Popular Movements     Rights     2017   

पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

(Click thumbnail to download PDF)

यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)

यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)

हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)

ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)