“ग़दरियों की पुकार - इंक़लाब” किताब का मुम्बई में विमोचन

Submitted by cgpiadmin on शनि, 02/09/2017 - 17:26

“ग़दरियों की पुकार - इंक़लाब” किताब को हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी ने हिंदी, पंजाबी तथा अंग्रेजी में प्रकाशित किया है। इस किताब का विमोचन मुम्बई में 5 अगस्त, 2017 को किया गया। अनेक महिलाओं, नौजवानों तथा मज़दूरों के अलावा, समारोह में कामगार एकता कमेटी, ऑल इंडिया गार्ड्स काउंसिल, सोशलिस्ट यूनिटी सेंटर आॅफ इंडिया (कम्युनिस्ट), ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन, लड़ाकू गारमेंट मज़दूर संघ, स्पार्क (लोक राज संगठन), इंडियन एयरपोर्ट इम्प्लॉइज़ यूनियन, बस्तर सॉलिडेरिटी ग्रुप, बिगुल दस्ता तथा पुरोगामी महिला संगठन के प्रतिनिधियों ने भी समारोह की शगीदारी की तथा किताब का विमोचन किया।

Mumbai book release

कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के नौजवानों ने एक बहुत आकर्षक प्रस्तुति बनायी थी, जिसके द्वारा किताब की झलक पेश की गयी। भूतपूर्व बर्तानवी शासक तथा आज के सत्ताधारी भी अपने शहीदों के प्रेरणादायक इतिहास को छुपाने की पूरी कोशिश करते हैं, क्योंकि वे बहुत अच्छी तरह से जानते हैं कि वह इतिहास, दमन-शोषण का अंत करने की आज की लड़ाई में बहुत मायने रखता है। महाराष्ट्र सहित अपने देश के अधिकतम इलाकों में बहुत कम लोग ऐसे हैं जो हिन्दोस्तान ग़दर पार्टी के शानदार कार्य से वाकिफ़ हैं। प्रस्तुति को अनेक गानों तथा कविताओं के द्वारा और रोचक बनाया गया था, उन गानों और कविताओं में से कइयों को भूतपूर्व योद्धाओं ने रचा था और कइयों को आज के नौजवान शायरों ने।

आज के इंक़लाबी आंदोलन के लिये हिन्दोस्तान ग़दर पार्टी का कार्य कितना मायने रखता है, इस पर हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के प्रवक्ता ने सविस्तार बात रखी। ग़दरी सिरफिरे और विचारहीन नहीं थे, जैसा कि सत्ताधारी वर्ग उन्हें प्रस्तुत करता है। उनका व्यक्तिगत आतंकवाद पर विश्वास नहीं था। हिन्दोस्तान के लिए उनका एक नज़रिया था, तथा उपनिवेशवादी शासन को उखाड़ने की परिस्थिति बनाने के लिए, हिन्दोस्तान की आम जनता को उस नज़रिये के इर्द-गिर्द क्रियाशील बनाने का महत्व वे जानते थे। जिसके लिए ग़दरियों ने बहुत ही समृद्ध साहित्य बनाया। यह आचंभित करने वाली बात है कि उन दिनों, जब इंटरनेट तो छोड़ो, बल्कि परिवहन के आधुनिक माध्यम भी नहीं थे, अनेक हिन्दोस्तानी भाषाओं में प्रकाशित उनके समाचार पत्र, दसों-लाखों की संख्या में दुनियाभर में वितरित हुआ करते थे!

हिन्दोस्तान ग़दर पार्टी का राजनीतिक लक्ष्य था उपनिवेशवादी राज्य को उखाड़ फेंकना तथा उसकी जगह पर मज़दूरों, किसानों की हुकूमत स्थापित करना। उनका यह लक्ष्य इंडियन नैशनल कांग्रेस तथा उस प्रकार की अन्य पार्टियों से बिल्कुल विपरीत था। ये पार्टियां उपनिवेशवादी राज्य के भीतर ही हिन्दोस्तानी पूंजीपतियों तथा ज़मीनदारों के हितों को बरकरार रखने के लिए कार्यरत हुआ करती थीं। ग़दरी स्पष्ट कहते थे कि उनके संघर्ष का लक्ष्य न सिर्फ़ उपनिवेशवादी शासन को ख़त्म करना है, बल्कि अपने लोगों के हर प्रकार के दमन तथा शोषण का अंत करना है।

आज भी मुख्य रूप से पहचानने वाली बात यही है कि हम मज़दूरों, किसानों का दुश्मन सत्ताधारी वर्ग है, जिसकी अगुवाई सबसे अमीर लगभग 150 घराने करते हैं। उन्हें यह राज्य तंत्र बर्तानवियों से विरासत में मिला है और उन्होंने उसे और विकसित किया है। ठीक उनके पुर्खों के जैसे ही, वे भी अपने देश के श्रमिकों के हितों के ख़िलाफ़, विदेशी साम्राज्यवादियों से सहयोग करते हैं। उनका भी लक्ष्य है कि श्रमिकों की सत्ता की स्थापना को प्रतिबंधित करना। श्रमिकों को जागृत करना और इस दमनकारी शासन को उखाड़ कर फेंकना, ये हमारे सामने ज़रूरी कार्य है। सत्ताधारी वर्ग के राज्य के बारे में हमें कोई भी भ्रम नहीं होना चाहिए।

हिन्दोस्तान ग़दर पार्टी का नज़रिया अंतर्राष्ट्रीयतावादी था। उनका लक्ष्य था उपनिवेशवादी हिन्दोस्तान की जगह पर संयुक्त राज्य हिन्दोस्तान बनाना। उनकी इच्छा थी कि यह राज्य, इस उपमहाद्वीप के अनेक राष्ट्रों तथा राष्ट्रीयताओं का स्वेच्छा पर आधारित संघ हो। दुनियाभर के लोगों की उपनिवेशवाद तथा साम्राज्यवाद के ख़िलाफ़ एकता की आवश्यकता वे पहचानते थे तथा उसका प्रचार भी करते थे। वे दुनियाभर में तैनात बर्तानवी हिन्दोस्तानी सेना की इकाइयों में काम करते थे और उन्हें बुलावा देते थे कि वे उपनिवेशवाद-विरोधी संघर्षों को कुचलने की बजाय, अपनी बंदूकों को उपनिवेशवादी मालिकों के ख़िलाफ़ इस्तेमाल करें।

इंडियन नैशनल कांग्रेस की गद्दारी का लगातार पर्दाफाश करने के साथ-साथ, हिन्दोस्तान ग़दर पार्टी ने हिंदू राष्ट्र की संकल्पना के ख़तरे को भी पहचाना था। उन्हें मालूम था कि कांग्रेस के अलावा बर्तानवी राज्य, हिंदू राष्ट्र के समर्थकों को और इंडियन मुस्लिम लीग को भी बढ़ावा देता था। वास्तव में तो साम्प्रदायिकता को बढ़ावा देना, बर्तानवी हिन्दोस्तान का परखा हुआ तरीका था। आज हमें पहचानना चाहिए कि हिन्दोस्तानी राज्य ही साम्प्रदायिकता का स्रोत है। कांग्रेस पार्टी तथा भाजपा सहित सत्ताधारी वर्ग की सभी पार्टियां साम्प्रदायिकता को बढ़ावा देने में तथा मौजूदा व्यवस्था को बरकरार रखने में अपनी-अपनी भूमिका निभाती हैं।

हिन्दोस्तान ग़दर पार्टी समूह की ताक़त पर विश्वास करती थी। आज के लिए वह सब से महत्वपूर्ण सीखों में है!

जिस प्रकार हिन्दोस्तान ग़दर पार्टी ने सभी इंक़लाबियों को एक होकर बर्तानवी राज्य को उखाड़ने का बुलावा दिया था, उसी प्रकार आज हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी हमारे सामूहिक लक्ष्य को हासिल करने के लिए सब कम्युनिस्टों को एकजुट होने का बुलावा देती है।

इस किताब को प्रकाशित करने के लिए अनेक संगठनों के वक्ताओं ने कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी का आभार प्रकट किया। कई वक्ताओं ने कहा कि हमारे लिये इस पुस्तक के विमोचन समारोह में भाग लेना बहुत ही प्रेरणादायक रहा।

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पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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