अमरीका द्वारा अफ़गानिस्तान और दक्षिण एशिया रणनीति का ऐलान : लोगों के लिए भयानक खतरा

Submitted by cgpiadmin on रवि, 17/09/2017 - 02:30

21 अगस्त, 2017 को अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अमरीका की अफ़गानिस्तान और दक्षिण एशिया रणनीति का ऐलान किया।

ट्रंप ने ऐलान किया कि अमरीका अफ़गानिस्तान से अपनी फ़ौज को नहीं हटाएगा। अमरीका के पिछले राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अमरीकी फ़ौज को अफ़गानिस्तान से हटाने का वादा किया था। फ़ौज को हटाने की बजाय, ट्रम्प ने ऐलान किया कि अमरीका अफ़गानिस्तान और पाकिस्तान में अपनी मौजूदगी और दखलंदाज़ी को और अधिक बढ़ाएगा ताकि वह तालिबान और अन्य ताक़तों के खिलाफ़ “जीत” हासिल कर सके। 

अपने भाषण में अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा कि इस इलाके में अमरीकी साम्राज्यवाद के रणनैतिक हितों की हिफाज़त करने के नज़रिये से ऐसा करना ज़रूरी है।

ट्रम्प के ख्याल में अमरीका द्वारा इस इलाके से अपनी फ़ौज हटाने से तालिबान और अन्य ताक़तें अफ़गानिस्तान के काबुल में मौजूदा सरकार का तख़्तापलट करते हुए तुरंत अपनी सत्ता जमा लेंगी।

अमरीका ने पाकिस्तान पर आरोप लगाया कि वह उन तमाम आतंकवादी गुटों को सुरक्षित इलाके प्रदान कर रहा है जो अमरीकी सेना का कत्ल कर रहे हैं, उसने पाकिस्तानी फ़ौज को खुली धमकी दी कि यदि वह इन ताक़तों के खिलाफ़ कोई कदम नहीं उठायेगी हो, तो अमरीका उसके खिलाफ़ कार्यवाही करेगा।

अपने भाषण में अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने हिन्दोस्तान के साथ अपने सैनिक रणनैतिक साझेदारी के महत्व पर भी जोर दिया। राष्ट्रपति ट्रम्प ने ऐलान किया कि केवल अफ़गानिस्तान में ही नहीं, बल्कि पूरे हिन्द-प्रशांत महासागर के इलाके में, हिन्दोस्तान अमरीका के लिए एक बहुमूल्य सांझेदार है।

अफ़गानिस्तान और दक्षिण एशिया के लिए अमरीकी रणनीति बेहद खतरनाक है।

राष्ट्रपति ट्रम्प ने पाकिस्तान और अफ़गानिस्तान में फौजी हस्तक्षेप को सही बताते हुए, इन देशों पर आरोप लगाया कि वे 20 से भी अधिक आतंकवादी गुटों को पनाह दे रहे हैं, जो अमरीका की सुरक्षा के लिए खतरा बने हुए हैं। ऐसा कहते हुए अमरीका इस बात को छुपाने की कोशिश कर रहा है कि पिछले तीन दशकों में खुद अमरीकी साम्राज्यवाद ने इन दोनों देशों में और कई अन्य देशों में दर्ज़नों आतंकवादी गुट बनाये हैं, उनको ट्रेनिंग दी है और हथियारों से लैस किया है। यह सब उसने दुनिया पर अपना दबदबा बनाने की अपनी रणनीति के तहत किया है। दुनियाभर के कई देशों और इलाकों में इन आतंकवादी गुटों ने तबाही मचा रखी है। 2001 में अफ़गानिस्तान पर हमला करने और अमरीका तथा मित्र देशों द्वारा “आतंकवाद पर जंग” छेड़ने के 16 साल बाद, दुनियाभर के लोग अब यह समझने लगे हैं कि पूरी दुनिया में अमरीका ही आतंकवाद का सबसे बड़ा प्रायोजक है।

अमरीका का अफ़गानिस्तान से बाहर निकलने का कोई इरादा नहीं है, वह वहां के लोगों को बिना किसी विदेशी दखलंदाजी के खुद अपना भविष्य तय करने का मौका नहीं देना चाहता। वह तो इस इलाके के विभिन्न देशों में अस्थिरता फैलाने के लिए और उनको धमकी देने के लिए अफ़गानिस्तान का इस्तेमाल करना चाहता है। इन देशों में पाकिस्तान, ईरान, रूस, मध्य एशिया और चीनी गणराज्य शामिल हैं। अपने इस मकसद को मद्देनजर रखते हुए वह अफ़गानिस्तान और पाकिस्तान में अपनी फौजी मौजूदगी को बढ़ाने तथा उसे और अधिक मज़बूत करने की तैयारी कर रहा है।

पाकिस्तान के लोग बेहद खतरनाक स्थिति में फंसे हुए हैं। पाकिस्तान के हुक्मरानों ने अपने सैनिकी अड्डे, अमरीकी साम्राज्यवादियों द्वारा अफ़गानिस्तान पर हमला करने और उस पर अपना कब्ज़ा जमाने के लिए सौंप दिए हैं। इसके खिलाफ़ पाकिस्तान और अफ़गानिस्तान के लोगों में बहुत गुस्सा और आक्रोश फ़ैल गया है। अफ़गानिस्तान की देश भक्त शक्तियां, जो अमरीकी कब्ज़ाकारी सेना के खिलाफ़ और अपने देश की कठपुतली सरकार के खिलाफ़ लड़ रही हैं, उन शक्तियों के लिए पाकिस्तान के लोगों के बीच बहुत समर्थन है। अफ़गानिस्तान की इन देश भक्त शक्तियों के लिए पाकिस्तानी लोगों के समर्थन को आतंकवाद के लिए समर्थन नहीं कहा जा सकता, जैसा कि अमरीका आरोप लगा रहा है।

पाकिस्तान खुद कई आतंकवादी हमलों का शिकार होता रहा है। पाकिस्तान की सरकार का दावा है कि इन हमलों का स्रोत अफ़गानिस्तान की सीमा के उस पार है। उनका कहना है कि ये हमले अफ़गानिस्तान में स्थित आतंकवादी संगठन कर रहे हैं, जिन्हें कथित रूप से हिन्दोस्तानी राज्य प्रायोजित करता है। इस बात को ध्यान में रखा जाना चाहिए कि पिछले कुछ दशकों से हिन्दोस्तानी सरकार अफ़गानिस्तान सरकार के साथ करीबी के संबंध बना रही है। इसमें अफ़गानिस्तान की सेना को ट्रेनिंग देना भी शामिल है।

एशिया में अपने रणनैतिक लक्ष्य को हासिल करने के लिए अमरीकी साम्राज्यवादी हिन्दोस्तान और पाकिस्तान को एक दूसरे के खिलाफ़ भड़का रहे हैं। इस काम के लिए वे आतंकवादी गुटों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो उन्होंने खुद खड़े किये हैं। इस तरह से जो आतंकवादी गुट अफ़गानिस्तान में स्थित हैं और पाकिस्तान पर हमले करते हैं, वे अमरीकी कब्ज़ाकारी ताक़तों के समर्थन के बगैर टिक नहीं पायेंगे। उसी तरह से हिन्दोस्तान में हुई आतंकवादी कार्यवाहियों के पीछे भी अमरीका का ही हाथ है।

साथ ही अमरीका ने जानबूझकर अफ़गानिस्तान में हिन्दोस्तान और पाकिस्तान के हुक्मरानों के मंसूबों को हवा दी है। हिन्दोस्तान के हुक्मरान अफ़गानिस्तान में एक ऐसी सरकार चाहते हैं जो उसको पाकिस्तान को घेरने के अपने रणनैतिक लक्ष्य को हासिल करने में मदद देगी। उसी तरह से पाकिस्तान भी अफ़गानिस्तान में ऐसी सरकार चाहता है जो उसके साथ करीबी का रिश्ता रखती हो, और उसके हितों से मेल खाती हो। हिन्दोस्तान और पाकिस्तान दोनों ही राज्य अफ़गानिस्तान में अमरीकी साम्राज्यवाद का खेल खेलते आये हैं।

मौजूदा समय में अमरीकी साम्राज्यवादी चीन को घेरने और पूरे एशिया पर अपना दबदबा जमाने के लिए, चीन और दक्षिण पूर्व एशिया इलाके में हिन्दोस्तानी हुक्मरान वर्गों के मंसूबों को जानबूझकर भड़का रहे हैं। इसके लिए वे हिन्दोस्तान को आधुनिक सैनिक हथियार और हार्डवेयर मुहैया कर रहा है, और हिन्द-प्रशांत महासागर के इलाके में एक सैनिक रणनैतिक सांझेदारी बनाने के लिए उसे अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। हिन्दोस्तान के हुक्मरान वर्ग इस संभावना से बेहद खुश हैं। हिन्दोस्तानी हुक्मरान वर्गों के साम्राज्यवादी मंसूबों की खातिर, चीन और पाकिस्तान के खि़लाफ़ इस प्रतिक्रियावादी जंग में हिन्दोस्तान के खींचे जाने का खतरा बहुत बढ़ गया है। 

पाकिस्तान के लोगों और सरकार ने अपनी संप्रभुता पर अमरीकी राष्ट्रपति द्वारा किये गये खुलेआम हमले की बड़़े गुस्से के साथ निंदा की है। पिछले कई दशकों से पाकिस्तान की तमाम सरकारें अफ़गानिस्तान और इस इलाके में अमरीकी खेल में शामिल रही हैं। पाकिस्तान के लोग अपनी सरकारों की इन कार्यवाहियों पर सवाल उठा रहे हैं।

अफ़गानिस्तान के लोग चाहते हैं कि अमरीकी फ़ौज उनके देश से निकल जाए। लेकिन हिन्दोस्तानी राज्य चाहता है कि अफ़गानिस्तान पर अमरीका का फौजी कब्ज़ा बरकरार रहे, ताकि पाकिस्तान के साथ टक्कर में वह अफ़गानिस्तान में अपने हितों को आगे बढ़ा सके। हिन्दोस्तान की सरकार ने अफ़गानिस्तान में अमरीका की फौजी मौजूदगी को बढ़ाने की योजना का स्वागत किया है, और पाकिस्तान को दी गयी धमकी का भी स्वागत किया है। हिन्दोस्तानी राज्य का यह रवैया बेहद अदूरदर्शी और खतरनाक है। हिन्दोस्तान के मजदूर वर्ग और मेहनतकश लोग इसकी इजाजत नहीं दे सकते कि एशिया पर दबदबा कायम रखने की अमरीका की शैतानी रणनीति में हिन्दोस्तान फंस जाए। एशिया के सभी लोगों और देशों की आज़ादी और संप्रभुता को सबसे बड़ा खतरा अमरीकी साम्राज्यवाद से है। पाकिस्तान का कड़वा अनुभव साफ़ दिखाता है कि अमरीकी साम्राज्यवाद के साथ किसी भी तरह का सैनिक गठबंधन हमारे लोगों के लिए बेहद खतरनाक है।

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी अफ़गानिस्तान और दक्षिण एशिया में अमरीकी साम्राज्यवाद की रणनीति की निंदा करती है। यह रणनीति इस इलाके के सभी लोगों और देशों की संप्रभुता और एशिया में शांति के खि़लाफ़ है। हिन्दोस्तान द्वारा इस शैतानी रणनीति का हिस्सा बनने का ज़ोरदार विरोध करना चाहिए।

Tag:    भयानक खतरा    तख़्तापलट    ट्रेनिंग द    Sep 16-30 2017    World/Geopolitics    Popular Movements     War & Peace     2017   

पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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