गौरी लंकेश की हत्या की कड़ी निंदा की जानी चाहिए! ज़मीर के अधिकार की रक्षा करनी होगी!

Submitted by cgpiadmin on रवि, 17/09/2017 - 00:30

प्रसिद्ध पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता, कन्नड़ प्रकाशन गौरी लंकेश पत्रिके की संपादिका गौरी लंकेश की 5 सितंबर शाम को उनके निवास पर बेरहमी से गोली मार कर हत्या कर दी गई।

शोषित और दबे-कुचले लोगों के अधिकारों के लिए लड़ने वालों के बीच, गौरी लंकेश का नाम बहुत आदर से लिया जाता था, क्योंकि वह अपनी बहादुर खोजी पत्रकारिता के आधार पर सत्ता में बैठे लोगों के गुनाहों का पर्दाफाश करती आई थी। राजकीय आतंकवाद के शिकार लोगों के लिए इंसाफ के लिए उन्होंने हमेशा आवाज़ उठाई थी। एम.एम.कलबुर्गी, गोविंद पंसारे और नरेंद्र दाभोलकर जैसे सामाजिक कार्यकर्ताओं की क्रूर हत्याओं की तरह ही उनकी भी हत्या कर दी गयी। दकियानूसी विचारों का और हुक्मरानों द्वारा लोगों के बीच नफ़रत फ़ैलाने की कोशिशों का लगातार विरोध करने के लिए लोग इनका बहुत आदर करते थे।

G Lankesh protest on 11 Sept
G lankesh Bangaluru first protests

इन सभी की हत्याओं की जांच गंभीरता से नहीं की गयी है, और अभी तक गुनाहगारों को पकड़ा नहीं गया है। इस वजह से इन हत्याओं में राज्य और उसकी एजेंसियों की भूमिका पर भी सवाल उठना जायज़ है।

ज़मीर का अधिकार, कोई भी विचार रखने और उसको व्यक्त करने का अधिकार, एक ऐसा मानव अधिकार, जिसे किसी भी इंसान से अलग नहीं किया जा सकता। किसी भी बहाने से इस अधिकार का उल्लंघन न हो, यह सुनिश्चित करना राज्य का फ़र्ज़ है।

गौरी लंकेश की हत्या के खिलाफ़ कर्णाटक के बेंगलुरु, मैंगलोर, उडुपी, मंड्या, गुलबर्गा, धारवाड़, हूबली और नई दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद, चंडीगढ़, तथा देश के कई अन्य शहरों में विरोध प्रदर्शन आयोजित किये गए है। समाज के सभी तबकों से राजनीतिक कार्यकर्ता, मानवाधिकार कार्यकर्ता, लेखक, कवि, छात्र, नौजवान और महिलाएं, गौरी लंकेश की हत्या की निंदा करने और लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों पर बढ़ते फासीवादी हमलों के खिलाफ़ बड़ी संख्या में आगे आए हैं। इन विरोध प्रदर्शनों से लोग, राज्य की तमाम तरह की धमकियों और आतंक के खिलाफ़ अपने अधिकारों की हिफ़ाजत में संघर्ष को आगे बढ़ाने के लिए अपनी प्रतिबद्धता को मजबूती से दोहरा रहे हैं।

Tag:   

Share Everywhere

गौरी लंकेश    ज़मीर के अधिकार    प्रसिद्ध पत्रकार    सामाजिक कार्यकर्ता    कन्नड़ प्रकाशन    Sep 16-30 2017    Political-Economy    Communalism     Rights     2017   

पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

(Click thumbnail to download PDF)

यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)

यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)

हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)

ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)