जी.एस.टी. के रहस्य का पर्दाफाश

Submitted by cgpiadmin on शनि, 16/09/2017 - 23:30

संपादक महोदय 

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के विषय पर एक बेहतरीन लेख को प्रकाशित करने के लिए मैं मजदूर एकता लहर का आभार व्यक्त करता हूं। प्रेस और मीडिया में इस विषय पर बहुत कुछ लिखा जा चुका है, लेकिन वे सब जी.एस.टी. के सार और उद्देश्य को और अधिक पेचीदा बनाते है।

इस लेख में आपने जी.एस.टी. के सार और उद्देश्य को बेहद सरल भाषा में समझाया है, जो कि लेख के शीर्षक में ही साफ़ झलकता है। इस लेख में आपने इस कानून के तीन मुख्य पहलुओं को उजागर किया है, जो उसके वर्ग-चरित्र की पोल खोल देता है।

1)       जी.एस.टी. से पूंजी का संकेन्द्रण बढ़ेगा

2)       जी.एस.टी. से कर लगाने के अधिकार का और अधिक केन्द्रीकरण होगा, और

3)       जी.एस.टी. का लक्ष्य है मेहनतकश जनसमुदाय की लूट को बढ़ाना  

यह कोई आश्चर्य की बात नहीं कि पूंजीपतियों के नेता और उनके तमाम संगठन इसे सबसे बड़ा आर्थिक सुधार बताकर उसका ढिंढोरा पीट रहे है। इस कानून को “एक राष्ट्र, एक कर, एक बाज़ार” जैसे अंधराष्ट्रवादी उपनाम देकर, वे मेहनतकश लोगों, छोटे और मंझोले उत्पादकों, विक्रेताओं और खरीदारों को बेवकूफ बना रहे हैं कि इससे सभी लोगों का, और देश का भला होगा।

यह कानून, आम तौर से पूंजीवाद के हित में होने के अलावा, ख़ास तौर से इज़ारेदार पूंजीपतियों के हित में है, जो हमारे देश की अर्थव्यवस्था पर हावी है, और अन्य सभी उत्पादकों और खरीदारों की मेहनत की कमाई निचोड़कर अपने लिए अधिकतम मुनाफ़े बनाते है। यह बड़े सरमायदारों, हमारे देश के हुक्मरान वर्गों के हितों में लिया गया एक और कदम है। इस कानून को बनाने की प्रक्रिया पिछले 15 साल से अधिक समय से चल रही है, और बड़े सरमायदारों की सभी पार्टियां इसको बनाने में शामिल रही हैं। 

इस कानून के आधुनिक टेक्नॉलॉजी पर पूरी तरह से निर्भर होने की वजह से छोटे और मंझोले कंपनियों का विनाश तेज़ी से होगा। जैसे कि लेख में बताया गया है, जिन लोगों की आधुनिक टेक्नोलॉजी तक पहुंच नहीं है, उन्हें आधुनिक टेक्नाॅलॉजी के यंत्र खरीदने होंगे, या उन सेवाओं को किराये पर लेना होगा। हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर, एंटी-वायरस पैकेज, इंटरनेट डाटा, इत्यादि के लिए उन्हें हर साल खर्चा करना होगा, जिससे उनका उपक्रम चलाने का खर्चा बढ़ जाएगा।   

हिन्दोस्तानी राज्य के अन्य कानूनों की ही तरह जी.एस.टी. कानून भी ऐसा है कि, हर कोई अपने हिसाब से उसकी व्याख्या कर सकता है। इस वजह से कानून की गलत समझ हो सकती है। यह सरकारी तंत्र द्वारा उत्पीड़न का ज़रिया बन सकता है, फिर सरकारी दावे चाहे जो हों। बड़ी कंपनियां अपने रिटर्न जमा करने और कानूनी केस लड़ने के लिए चार्टेड अकाउंटेंट और वकीलों की फ़ौज रख सकती है, लेकिन छोटे कंपनियों को हर एक कदम फूंक-फूंक कर रखना होगा। इसका मतलब है कि अधिक टैक्स का भुगतान करना होगा, भले ही वो लागू हो या न हो। टैक्स अधिकारी अब उनको आसानी से पकड़ सकते है, क्योंकि टैक्स अधिकारियों के पास अब केंद्रीकृत जानकारी मौजूद होगी। ये एक खुला राज है कि मौजूदा व्यवस्था में चार्टेड अकाउंटेंट का काम है, कंपनियों को कम टैक्स देने के तरीके सुझाना। बड़ी कंपनियां ऐसा कर सकती है, जबकि छोटे और मंझोले कारोबारी ऐसे चार्टेड अकाउंटेंट और वकील नहीं रख सकते। यह बेहद ख़ुशी की बात है कि हजारों-लाखों छोटे और मंझोले उत्पादक और व्यापारी जी.एस.टी. के खिलाफ़ सड़कों पर प्रदर्शन में उतर आये है। इससे साफ़ है कि मेहनतकश लोग और छोटे उत्पादक, जिनका बड़े इज़ारेदार घरानों से कोई नाता नहीं है, जी.एस.टी. से होने वाले परिणामों के बारें में जागरूक है। वे जानते हैं कि इस व्यवस्था के चलते उनके भविष्य में केवल अंधेरा है और इसलिए वे सड़कों पर उतर रहे हैं। जैसे-जैसे हालात बदलेंगे और संकट और गहराता जाएगा, यह आक्रोश बढ़ता ही जायेगा।

आपका

विवेक कुमार

Tag:    जी.एस.टी.    पूंजी का संकेन्द्रण    Sep 16-30 2017    Letters to Editor    Economy     2017   

पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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