बढ़ती तादात में रेलगाड़ियों का पटरियों से उतरना तथा लोगों की मौत!

Submitted by cgpiadmin on शनि, 16/09/2017 - 19:30

19 अगस्त, 2017 को उत्तर प्रदेश में मुज़फ़्फ़रनगर के पास, हरिद्वार से पुरी जाने वाली कलिंग उत्कल एक्स्प्रेस के 14 डिब्बे पटरियों से उतर गये। परिणामतः 23 लोगों की मौत हुई तथा सैंकड़ों घायल हो गए। उसके 3 दिन बाद ही उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़़ से दिल्ली जाने वाली कैफ़ियत एक्स्प्रेस का, कानपुर के पास, पटरियां पार करने वाले एक डम्पर से टक्कर हो गयी। इससे भी कई डिब्बे पटरियों से उतर गये और अनेक लोग घायल हो गए। पिछले 5 सालों में रेलगाडियों के 586 दुर्घटना हुए हैं, जिन में 53 प्रतिशत, यानि कि अधिकतर दुर्घटनाएं डिब्बों के पटरियों से उतरने की वजह से हुई हैं।

जहां तक उत्कल एक्स्प्रेस का सवाल है, दुर्घटना के नज़दीक पटरियों की मरम्मत चल रही थी। परंतु दोनों तरफ के रेलवे स्टेशनों के स्टेशन मास्टरों को इसके बारे में जानकारी ही नहीं थी। इसकी वजह से इस मार्ग पर चलने वाली रेलगाड़ियों को वे चेतावनी दे नहीं पाये।

एक रेल मंत्रालय के अधिकारी के मुताबिक, “मरम्मत करने का समय घटता जा रहा है। इसकी वजह से अधिकृत इज़ाज़त के बिना, मरम्मत करना अब आम बात हो गयी है।” लेकिन ऐसी मरम्मत के दौरान, प्रमाणित परिचालन कार्यप्रणाली का उल्लंघन किया जा रहा है। मिसाल के तौर पर, लाजमी है कि जहां मरम्मत का काम हो रहा है, उससे 1.2 किलोमीटर की दूरी पर एक फ्लैगमैन (झंडा लिये आदमी) को तैनात किया जाए, जो आने वाली रेलगाड़ियों के चालकों को चेतावनी दे सके कि उन्हें गति धीमी करनी चाहिए। जहां तक उत्कल एक्स्प्रेस का सवाल है, ऐसी कोई चेतावनी नहीं दी गयी थी, जिसकी वजह से इतने सारे लोगों की मौत हुई।

इसके पहले पटरियों की मरम्मत तथा देखरेख का काम गैंगमेनों के द्वारा किया जाता था। भारतीय रेल के चतुर्थ श्रेणी मज़दूरों में बहुसंख्य गैंगमेन ही हुआ करते थे। 25 साल पहले, तब की कंाग्रेस सरकार ने निजीकरण तथा उदारीकरण द्वारा वैश्वीकरण की नीति लागू की। उसके बाद की सभी सरकारों ने, चाहे भाजपा की सरकार हो, या तीसरे मोर्चे की, यही नीति जारी रखी है। तबसे तृतीय श्रेणी तथा चतुर्थ श्रेणी के मज़दूरों की कुल संख्या लगातार घटती जा रही है। सेवानिवृत्त होने वालों की जगहें खाली रखी जाती हैं तथा चतुर्थ श्रेणी की नौकरियों को खत्म करने की नीति को भारतीय रेल लागू कर रहा है। पटरियों की देखरेख, मरम्मत तथा निगरानी का काम निजी ठेकेदारों को दिया जा रहा है, जो बहुत कम वेतन में और पर्याप्त प्रशिक्षण के बिना, ठेका मज़दूरों से यह काम करवाते हैं। रेलगाड़ियों के पटरियों से उतरने की घटनाओं के बढ़ने की यह एक वजह है।

इसकी दूसरी वजह है कि जो पटरियां 50-60 किलोमीटर प्रति घंटा की गति के लिए ही काबिल हैं, उन पर जबर्दस्ती से रेल मंत्रालय 120-130 किलोमीटर प्रतिघंटा की गति लागू कर रहा है। भारतीय रेल के खुद के आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली-हावड़ा मार्ग पर, रोज़ाना 58 से ज्यादा रेलगाड़ियां नहीं चलनी चाहिए। इसके बावज़ूद, इस मार्ग पर रोजना 105-110 रेलगाड़ियां चलती हैं। दिल्ली-हावड़ा, दिल्ली-मुम्बई तथा दिल्ली-गुवाहाटी मार्गों पर 110-120 से ज्यादा रेलगाड़ियां रोज़ भागती हैं।

परिणामतः इन पटरियों पर मानक भार से 1.8 से 2.5 गुना भार पड़ रहा है। इससे रेल पटरियों के टूट जाने की वजह से, डिब्बों के पटरियों से उतरने की घटनाएं बढ़ती हैं।

भारतीय रेल की लोक-विरोधी तथा समाज-विरोधी निजीकरण की नीति से बढ़ती संख्या में दुर्घटनाएं तथा लोगों की मौत हो रही हैं। भारतीय रेल के सभी मज़दूरों कोे तथा हिन्दोस्तान के सभी श्रमिकों को इसका डटकर विरोध करना चाहिए! 

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पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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