नौकरी से निकाले गए आई.टी. मजदूरों द्वारा बड़े पैमाने पर छटनी का विरोध

Submitted by cgpiadmin on शनि, 16/09/2017 - 18:30

8 सितम्बर को आई.टी. क्षेत्र के दर्ज़नों मज़दूरों और नौकरी से निकाले गए मजदूरों ने बड़े पैमाने पर की जा रही छंटनी के विरोध में प्रदर्शन आयोजित किया।

फोरम फॉर आई.टी. प्रोफेशनल्स ने बताया कि “पिछले करीब तीन महीने से इस शहर की अलग-अलग आई.टी. कंपनियों ने 25,000 से अधिक मजदूरों को निकला है। कई बार छंटनी बड़े ही बेरहम तरीके की गई है। 10 साल से काम कर रहे मज़दूरों को एक कागज़ पर हस्ताक्षर करने को कहा गया, उन्हें अपनी मशीनों पर काम करने से रोका गया और फिर कंपनी से बाहर निकल जाने को कहा गया। इन लोगों के पास खुद की हिफ़ाजत करने का कोई भी रास्ता नहीं है।

IT workers protest at Freedom Park एक महिला मज़दूर को तब निकाला गया जब वो अपनी प्रसूति अवकाश के बाद वापस आई थी। नौकरी से निकाले जाने के लिए उसे कोई वजह भी नहीं बताया गया। एक केस में, एक आई.टी. मज़दूर को स्टैम्प पेपर पर “कंपनी से अलग होने के समझौते” पर हस्ताक्षर करने के लिए कहा गया, जिसमें यह लिखा था कि वह कंपनी के साथ हुए समझौते को बाहर चुनौती नहीं देगा।

प्रदर्शन कर रहे आई.टी. मज़दूरों ने यह मांग की है कि सरकार आई.टी. क्षेत्र में बड़े पैमाने पर हो रही छंटनी पर एक श्वेत-पत्र जारी करे। केवल ऐसा करने से नौकरी से निकाले गए मज़दूरों की असली तादाद का पता लगाया जा सकता है। इन मज़दूरों ने बताया कि तेलंगाना के आई.टी. क्षेत्र में कोई भी नयी नौकरियां पैदा नहीं हो रही हैं। प्रदर्शन कर रहे एक मज़दूर ने कहा कि “सरकार आई.टी. कंपनियों को तमाम तरह की रियायतें दे रही हैं। लेकिन उसे मजदूरों की कोई फिक्र नहीं है।”

फोरम फॉर आई.टी. प्रोफेशनल्स ने मांग की है कि तमाम श्रम कानूनों - जैसे दुकानें और प्रतिष्ठान अधिनियम (शॉप्स एंड एस्टाब्लिश्मेंट एक्ट), औद्योगिक रोजगार स्थायी आदेश अधिनियम (इंडस्ट्रियल एम्प्लॉयमेंट स्टैंडिंग ऑर्डर्स एक्ट), इत्यादि को सख़्ती से लागू किया जाना चाहिए। इसके अलावा, श्रम आयुक्त को इसमें सक्रिय रूप से अपनी भूमिका निभानी चाहिए। इस वक़्त श्रम आयुक्त के पास 1,600 से अधिक अर्जियां लंबित है, लेकिन इन पर कोई भी कार्यवाही नहीं की जा रही है।

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पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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