“ग़दरियों की पुकार-इंक़लाब” पुस्तक का टोरंटो में विमोचन

Submitted by cgpiadmin on सोम, 02/10/2017 - 00:30

17 सितंबर, 2017 को टोरंटो, कनाडा में एक शानदार कार्यक्रम में “ग़दरियों की पुकार-इंक़लाब” पुस्तक का विमोचन पंजाबी, हिंदी, और अंग्रेजी भाषा में किया गया। यह पुस्तक हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी द्वारा किये गये गहन अध्ययन और आतंरिक चर्चा का नतीजा है, जिसकी अगुवाई कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा की गयी।

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ग़दर हेरिटेज आर्गेनाईजेशन द्वारा आयोजित इस समारोह में समाज के अलग-अलग तबकों के लोगों ने हिस्सा लिया। पुस्तक के विमोचन का ऐलान करने वाले एक बैनर से मंच को सजाया गया था। इसके अलावा हॉल में कई अन्य बैनर और प्लेकार्ड लगे हुए थे, जिन पर ग़दरियों की बहादुर और इंक़लाबी कार्यवाहियों की झलक दिखाई गयी थी। मीटिंग हाॅल के माहौल से यह साफ था कि 1913 में ग़दरियों द्वारा हिन्दोस्तान की पहली इंक़लाबी पार्टी बनाये जाने और 1915 की बग़ावत की एक सदी से अधिक अरसे बाद भी ग़दरियों के कार्य और उनके शब्द आज भी कनाडा में बसे देशभक्त हिन्दोस्तानियों की नयी पीढ़ियों को प्रेरित करते हैं। अपने देश को तमाम तरह की गुलामी, शोषण और दमन से आजाद करने के लिए कनाडा में बसे हिन्दोस्तानियों को अपना सब कुछ न्यौछावर करने के लिए ग़दरियों की पुकार ने हमेशा से प्रेरित किया है और आज भी कर रही है।

इकबाल संबल ने समारोह का संचालन किया। सबसे पहले पंजाबी, हिंदी और अंग्रेजी भाषाओं में प्रकाशित पुस्तकों का विमोचन किया गया।

इसके बाद कनाडा में बसे हिन्दोस्तानी समुदाय के कई प्रगतिशील नेताओं ने आज की पीढ़ी के लिए “ग़दरियों की पुकार-इंक़लाब!” पुस्तक की प्रासंगिकता पर अपने विचार पेश किये।

सबसे पहले बात रखते हुए, डा. बलजिंदर सेखों ने इस किताब के लिए सुनियोजित तरीके से शोध करने और उसे प्रकाशित करने के लिए कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रशंसा की। उन्होंने बर्तानवी हुक्मरानों द्वारा अपने राज को बरकरार रखने के लिए इस्तेमाल की गयी रणनीति के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि इस रणनीति में शामिल था “बांटो और राज करो” की नीति के तहत साम्प्रदायिकता और सांप्रदायिक हिंसा फैलाना और साथ ही साथ हिन्दोस्तानी लोगों के संघर्षें को कुचलने के लिए बर्बर बल प्रयोग करना।

समाज के एक जाने-माने कवि और नाटककार ओंकारप्रीत ने कहा कि यह किताब एकदम सही वक्त पर आई है और इंक़लाब से जुड़े कई सवालों के जवाब देती है। उन्होंने कहा कि इस किताब में खास तौर से हमारे इतिहास के अनुभव से सबक लेते हुए हिन्दोस्तानी क्रांति के सिद्धांत को विकसित किये जाने पर जोर दिया गया है। हिन्दोस्तानी इंक़लाब की कामयाबी के लिए यह ज़रूरी है कि यह सिद्धांत हिन्दोस्तानी राजनीतिक विचार के सकारात्मक योगदान को दुनिया के सबसे उन्नत विज्ञान मार्क्सवाद के साथ एकीकृत करने के लिए विकसित किया जाना चाहिए। यह किताब हमें इस बात से अवगत कराती है कि ग़दर आज भी जारी है और हमारा संघर्ष आगे बढ़ रहा है। अपने भाषण के अंत में एक कविता के द्वारा सभी लोगों को क्रांतिकारी संघर्षों में जोरशोर से हिस्सा लेने की आवश्यकता पर जोर दिया।

कॉमरेड गुरुदेव सिंह ने कहा कि “ग़दरियों की पुकार-इंकलाब” पुस्तक में हिन्दोस्तानी शासक वर्ग और साम्राज्यवादियों द्वारा ग़दरियों के बारे में फैलाई गयी झूठी बातों का पर्दाफाश किया गया है। ऐसा एक झूठ जिसे जानबूझकर प्रचारित किया गया है, यह है कि ग़दरी अशिक्षित और उग्र स्वभाव के थे, जिन्हें किसी भी क्रांतिकारी सिद्धांत का पता नहीं था और वह केवल उनकी भावनाओं से प्रेरित थे। कॉमरेड गुरुदेव ने जोर देकर कहा कि इस पुस्तक से यह बात सामने आई है कि ग़दरियों का काम सबसे उन्नत सिद्धांत द्वारा निर्देशित था। वे बस्तीवादी राज से आज़ादी के साथ-साथ समाज में क्रांतिकारी बुनियादी बदलाव के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हुए थे। उन्होंने हिन्दोस्तान के एक संयुक्त राज्य के दृष्टिकोण को प्रस्तुत किया, जिसमें हिन्दोस्तान के सभी राष्ट्रों, राष्ट्रीयताओं के लोग और जनजातीय लोग स्वेच्छा पर आधारित संघ में एक साथ आएंगे। ग़दरियों द्वारा हिन्दोस्तान में बसे विभिन्न लोगों की आकांक्षाओं और राष्ट्रीय अधिकारों को स्वीकार करते हुए, हिन्दोस्तान के संयुक्त राज्य की अवधारणा को आगे बढ़ाने से पता चलता है कि वे कितने दूरदर्शी थे।

कॉमरेड गुरुदेव ने कहा कि ग़दरियों को बदनाम करने के लिए एक और झूठ का प्रचार किया जाता है कि ग़दरी और कांग्रेस पार्टी दोनों एक ही उद्देश्य के लिए लड़े थे, केवल उनके तरीके अलग-अलग थे। सच्चाई यह है कि कांग्रेस पार्टी बड़े पूंजीपतियों और बड़े जमींदारों का प्रतिनिधित्व करती थी। वह बस्तीवादी राज्य के भीतर ही शोषक वर्गों के लिए कुछ रियायतों के लिए लड़ रही थी। कांग्रेस पार्टी का मकसद था दमनकारी बस्तीवादी राज्य तंत्र को बनाए रखते हुए बर्तानवी हुक्मरानों की जगह हिन्दोस्तानी पूंजीपतियों की हुकूमत कायम करना। इसके विपरीत, ग़दरियों का मकसद था बर्तानवी बस्तीवादी हुकूमत को खत्म करके मजदूरों और किसानों की सत्ता स्थापित करना। बर्तानवी राज्य की जगह वे एक ऐसे राज्य को स्थापित करना चाहते थे, जो बर्तानवी राज्य से बिलकुल अलग होगा। इस पुस्तक से पता चलता है कि किस तरह से ग़दरियों के समय से लेकर आज तक दो वर्गों - सर्वहारा वर्ग और पूंजीपति वर्ग - के विपरीत लक्ष्यों के बीच संघर्ष चल रहा है जो और तेज़ होता जा रहा है। हम सभी को ग़दरियों का आह्वान है कि हम आने वाले क्रांतिकारी तूफानों के लिए तैयारी करें। सभी कम्युनिस्टों को एकजुट होकर राजनीतिक रूप से एकजुट मजदूर वर्ग और लोकतांत्रिक आंदोलन को अगुवाई देते हुए, पुराने हिन्दोस्तान की जगह पर एक नए हिन्दोस्तान का निर्माण करना होगा।

हरबंस माल्ही ने कहा कि किताब बताती है कि ग़दरियों ने अंग्रेजों की बांटो और राज करो नीति का किस तरह से विरोध और पर्दाफाश किया। उन्होंने यह भी कहा कि उनको इसी किताब से यह पता चला कि 1857 के महान ग़दर को कुचलने के बाद, बर्तानवी शासकों ने रानी विक्टोरिया के आदेश पर 1857 के ग़दर के बारे में सभी पुस्तकों के प्रकाशन पर प्रतिबंध लगा दिया था ताकि ग़दर के सभी विचारों और उसकी यादों को लोगों के दिलो-दिमाग से मिटाया जा सके। लेकिन तमाम तरह के दमन के बावजूद अंग्रेज हिन्दोस्तानी लोगों के दिलो-दिमाग से ग़दर के विचारों को ख़त्म नहीं कर पाए। हरबंस माल्ही ने कहा कि आज़ादी हासिल करने के नाम पर 1947 में कांग्रेस पार्टी और मुस्लिम लीग द्वारा अंग्रेजों के साथ पीठ-पीछे सौदेबाजी करने से हिन्दोस्तान के लोगों को काफी नुकसान हुआ है। गोरे साहबों की जगह भूरे साहबों ने ले ली और बर्तानवी बस्तीवादियों द्वारा कायम किये गए हिन्दोस्तान रक्षा अधिनियम और भूमि अधिग्रहण अधिनियम 1894 और अन्य बस्तीवादी कठोर कानूनों को बरकरार रखा गया।

जरनैल सिंह अच्चारवाल ने कहा कि हिन्दोस्तान के मौजूदा शासक ग़दरियों के सच्चे इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश कर रहे हैं और उसको दबाने की कोशिश कर रहे हैं।

हरदीप कौर ने किताब के प्रकाशकों को यह बताने के लिए बधाई दी कि ग़दरियों द्वारा किए गए संघर्षों के बारे में हमें क्या सीखना ज़रूरी है। इंक़लाबियों की संख्या छोटी हो सकती है लेकिन उनका मार्गदर्शन लोगों के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण मशाल है। अंत में उन्होंने पूरे जोश से कहा “हिन्दोस्तान में जाओ, और देखो आपके पास कितने अधिकार हैं। हिन्दोस्तान को एक इंक़लाब की जरूरत है”।

‘स्रोकरण दी अवाज़’ अखबार के हरबंस ने कहा कि जो लोग संघर्ष नहीं करते, वे कभी भी ग़दरियों के महान योगदान और ग़दर के अर्थ को नहीं समझ सकते।

राज विर्क ने बताया कि हम अपने बचपन में सुनते थे कि हिन्दोस्तानियों को कुछ स्थानों पर जाने की इजाज़त नहीं थी और उनके साथ नस्ली भेदभाव किया जाता था। हम इसके बारे में और जानना चाहते थे और यह किताब हमारे समुदाय पर हुए जातिवाद हमलों के खिलाफ़ ग़दरियों द्वारा चलाये संघर्ष के बारे में बताती है।

अपनी समापन टिप्पणियों में, इकबाल संबल ने समारोह में आये सभी लोगों को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि हिन्दोस्तानी लोगों ने बहुत दुःख सहे हैं। अब हिन्दोस्तान को सभी प्रकार के शोषण और दमन से मुक्त करने के लक्ष्य को हासिल करने का समय आ गया है। यह संघर्ष काफी लंबा और कठिन संघर्ष है। लेकिन क्रांतिकारी और देशभक्त हिन्दोस्तानियों ने इस संघर्ष को कभी नहीं छोड़ा है। उन्होंने ऐलान किया कि: गदर जारी है! उन्होंने सभी देशभक्त और प्रगतिशील लोगों को एक साथ आकर, ग़दरियों की पुकार के इर्द-गिर्द एकजुट हो जाने का बुलावा दिया।

पुस्तक विमोचन समारोह गर्मजोशी और संघर्षशील माहौल में संपन्न हुआ। इस माहौल में कनाडा में रहने वाले देशभक्त हिन्दोस्तानी लोगों की महान क्रांतिकारी विरासत, ग़दर पार्टी की विरासत की झलक मिलती है और साथ ही ग़दरियों के मिशन को आगे ले जाते हुए एक नयी बुनियाद पर नए हिन्दोस्तान का निर्माण करने के उनके दृढ़ संकल्प को भी दर्शाती है।

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पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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