“श्रम सुधारों” के विरोध में फ्रांस में प्रदर्शन

Submitted by cgpiadmin on रवि, 01/10/2017 - 21:30

सितम्बर, 2017 में फ्रांस में श्रम कानूनों में बदलाव के विरोध में हड़तालों की एक लहर सी आई है। सरकार के कार्यकारी आदेशों द्वारा देश के श्रम कानूनों में तेजी से बदलाव लाये जा रहे हैं, जो कंपनी मालिकों को मजदूरों के साथ वेतन और काम के हालातों से सम्बंधित वार्ता में और अधिक अधिकार देते हैं। साथ ही मजदूरों को नौकरी से निकालने के खर्चे को भी कम करते हैं। खास तौर से यह “सुधार” मजदूरों को नौकरी से निकालने संबंधी खर्चों को कम कर देंगे और कानूनों और अधिक लचीला कर देंगे। इसके अलावा काम के घंटो को तय करने संबंधी नियमों में भी कंपनी मालिकों को ज्यादा आजादी दी जाएगी।

Demo against labour reforms in France-1
Demo against labour reforms in France-2
Demo against labour reforms in France-3

फ्रांस के राष्ट्रपति इम्मानुएल मैक्रॉन इन सुधारों को मजदूरों के हित में होने की तस्वीर पेश करने की कोशिश कर रहे हैं। उनका दावा है कि इससे कंपनी मालिक और ज्यादा मजदूरों को नियमित अनुबंधों पर रख पायेंगे, क्योंकि अब वे मजदूरों को किसी भी वक्त निकाल सकते हैं, और कोई कानून उनके लिये रोढ़ा नहीं बनेगा। मजदूर वर्ग और उसकी यूनियनें सरकार के इस तर्क से सहमत नहीं है। वे बड़ी तादाद में सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

12 सितंबर को पूरे देश भर के सभी शहरों में हड़ताल प्रदर्शन आयोजित किये गए। चार लाख से अधिक मजदूरों ने इसमें हिस्सा लिया। पहला प्रदर्शन दक्षिण फ्रांस में मारसैय, पेरिपिग्नन और नाईस में, पश्चिम में बोर्दो और उत्तर में ले हावरे और चैन में आयोजित किया गया। जब पुलिस ने प्रदर्शनकारियों का रास्ता रोकने की कोशिश की, तब प्रदर्शनकारी पुलिस से भिड़ गए।

फ्रांस के सबसे बड़े मजदूर संगठन में से एक जनरल कॉन्फेडरेशन ऑफ लेबर (सी.जी.टी.), यूनियन सहित कई छोटी और बड़ी यूनियनों ने इसमें हिस्सा लिया, जिसमें शामिल है सार्वजनिक क्षेत्र की यूनियन एफ.एस.यू., सोलिदैरेस और छात्र संगठन युनेफ।

इस पहले हड़ताल प्रदर्शन के बाद, यूनियनों ने 18, 21, 23, 25 सितम्बर को हड़ताल प्रदर्शनों का ऐलान किया। सड़क और समुद्री परिवहन के मजदूर, सी.जी.टी. जिसमें सड़क परिवहन, सार्वजनिक संस्थाओं, स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र के मजदूर शामिल है, ने इस हड़ताल प्रदर्शन में शामिल होने का ऐलान किया।

जैसा कि तय किया गया 18 और 21 सितंबर को हजारों मजदूर धरना प्रदर्शनों में सड़कों पर उतर आये।

मनोरंजन उद्योग के श्रमिकों ने 22 सितंबर के प्रदर्शन में मैक्रॉन के बदलावों को रेखांकित किया - मजदूर क्यों इन सुधारों का विरोध कर रहे है। उन्होंने समझाते हुए बताया कि - “आज हम यहाँ इसलिए मौजूद हैं क्योंकि सरकार कार्यकारी आदेशों से मजदूर संहिता को खत्म कर रही है। इस मजदूर संहिता ने 19वीं सदी से पूंजीपतियों की ज्यादतियों से फ्रांस में मजदूरों की हिफाजत की है। सरकार यह कह रही है कि हर एक क्षेत्र, जैसे कि मनोरंजन उद्योग के मजदूरों के लिए सामूहिक आधार पर वेतन और मुआवजे के लिए चर्चा करने की बजाय, हर एक थिएटर, हर एक कंपनी, हर एक ट्रूप और नेटवर्क को अलग-अलग चर्चा करनी चाहिए। लेकिन ऐसा करने से पूरा उद्योग टुकड़ों में बंट जाएगा।”

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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