उत्तर प्रदेश में किसानों की कर्ज़ माफी का फरेब

Submitted by cgpiadmin on रवि, 01/10/2017 - 19:30

उत्तर प्रदेश में पिछले चुनाव के तुरंत बाद, सरकार ने बड़े धूम-धड़ाके के साथ किसानों की फसलों के लिए कर्ज माफी की योजना का ऐलान किया। इस योजना के तहत् छोटे और सीमांत किसानों के लिए एक लाख रुपये तक की कर्ज माफी दी जानी थी। लेकिन यह पूरी योजना अब केवल मज़ाक बन कर रह गयी है।

योजना के तहत अलग-अलग जिलों में मंत्रियों द्वारा किसानों को कर्ज माफी का प्रमाण पत्र देते हुए दिखाया गया। अब यह बात सामने आई है कि कई किसानों को 1 रुपये और डेढ़ रुपये की कर्ज माफी दी गयी।

इटावा के एक गाँव अहेरीपुर में एक किसान को 28,000 रुपये के कर्ज पर 1 रूपया 80 पैसे की कर्ज माफी मिली है। इसी तरह मुकुटपुर के एक किसान, जिसके ऊपर 2 लाख का कर्ज था उसको 1 रूपया 50 पैसे की कर्ज माफी दी गयी। बिजनोर की बलिया देवी को 9 पैसे की कर्ज माफी दी गयी है। हमीरपुर में एक कर्जा माफी समारोह में एक किसान मुन्नी लाल को 215 रुपये और 3 पैसे की कर्ज माफी का प्रमाण पत्र श्रम और रोजगार मंत्री द्वारा सौंपा गया, जबकि मुन्नी लाल ने 50,000 रुपये का कर्ज लिया था।

कर्जा माफी के नाम पर चल रहे इस फरेब के खिलाफ किसानों ने मिर्जापुर में राज्य के वित्त मंत्री राजेश अग्रवाल की सामने धरना प्रदर्शन किया।

राज्य सरकार द्वारा जारी किये गए आंकड़ों के मुताबिक कर्ज माफी के पहले चक्र में 34,262 किसानों को 1 रुपये से 1000 रुपये तक की कर्ज माफी दी गयी। इनमें से 4,814 किसानों को 1 रुपये से 100 रुपये तक की कर्ज माफी मिली है।

उत्तर प्रदेश में विधान सभा के लिए चुनाव प्रचार के दौरान प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी ने वादा किया था कि यदि भाजपा सत्ता में चुनकर आती है तो किसानों के लिए कर्ज माफी करना उनके लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी। इसके लिए राज्य के बजट में 36,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया और ऐसा दावा किया गया कि इससे 86,000 किसानों को फायदा मिलेगा। इसके बाद यह पूरी योजना एक भद्दा मजाक साबित हुई है जहां किसानों को कर्ज माफी के नाम पर भीख जैसे टुकड़े बांटे गए।

किसान के अधिकारों के लिए सक्रियता से लड़ रहे कार्यकर्ताओं ने बताया कि पिछले 50 वर्षों में सरकार ने किसानों से हजारों करोड़ों रुपये कमाए हैं। 1966-67 के अकाल के बाद अनाज का उत्पादन बढ़ाने के नाम पर सरकार ने किसानों के हित को नजरंदाज किया और बाजार में अनाज के दाम को कम रखने के नाम पर किसानों की फसलों को दी जाने वाली कीमत को दबाये रखा। लेकिन यह बात सभी जानते है कि एक तरफ देहातों में अनाज पैदा करने वाले किसान गरीबी और बदहाली की खाई में डूबते जा रहं हैं, तो दूसरी तरफ शहरों में मेहनतकश लोग लगातार खाद्य पदार्थों की तेजी से बढ़ती कीमतों से परेशान हैं।

इस तरह से गरीबों के लिए रियायती दामों पर अनाज देने का बोझ भी किसानों पर ही डाला जा रहा था। अब किसानों को अपनी मेहनत की कीमत वसूलने का वक्त आ गया है और वे राज्य से मांग कर रहे हैं कि उनको केवल कर्ज माफी ही नहीं चाहिए, बल्कि उनको पर्याप्त आमदनी की गारंटी भी चाहिए।

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पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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