नौकरियों में कटौती व नई भर्तियों में गिरावट से बेरोज़गारी बढ़ी है

Submitted by cgpiadmin on रवि, 01/10/2017 - 18:30

हाल में, नौकरी का विज्ञापन देने वाली वेबसाइटों पर आई.टी. और ई-कॉमर्स कंपनियों में काम कर रहे मज़दूरों के आवेदनों में 20-25 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। व्यापार जगत के अखबारों ने अपनी रिपोर्टों में बताया है कि, वर्तमान समय, तकनीकी सेवाओं के क्षेत्र में, पिछले दशक के मुकाबले देश में सबसे बुरा समय है। आउटसोर्सिंग जैसी पारंपरिक सेवाओं से हटकर, अब पूरा जोर नए डिजिटल और क्लाउड सेवाओं पर दिया जा रहा है। इसके अलावा, ग्राहकों द्वारा इस्तेमाल किये जा रहे एप्लीकेशन या आईटी इन्फ्रास्ट्रक्चर के रख-रखाव के लिए इंसानों की जगह रोबोट का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर किया जा रहा है। जबकि नए क्षेत्रों में आमतौर पर नए मज़दूरों को भर्ती किया जाता है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक, स्टार्ट-अप कंपनियों की विफलता से नौजवान मज़दूरों के लिए बेरोज़गारी का संकट और भी बढ़ गया है। स्टार्ट-अप कंपनियों में 2015 में 5,500 के मुकाबले, इस वर्ष 9,200 मज़दूरों की छंटनी हुई है।

अमरीका में विनियामक परिवर्तन और व्यापक आर्थिक दृष्टिकोण के कारण आई अनिश्चितता के चलते, 25 वर्षों में पहली बार, सॉफ्टवेयर और सेवा के क्षेत्र के व्यापार संघ नेसकॉम ने 2017-18 के लिए इस क्षेत्र के विकास अनुमान के आंकड़ों को जारी करना रोक दिया है। आई.टी. और आई.टी. से जुड़ी सेवाओं में ऑटोमेशन के चलते मज़दूरों को नई कुशलताओं में पुनः प्रशिक्षित करने की ज़रूरत है। इस संबंध में, इंफोसिस और विप्रो ने इस वित्त वर्ष की पहली छमाही में ऑटोमेशन के कारण, परियोजनाओं पर काम कर रहे 8000 से अधिक कर्मचारियों को, अन्य कार्यों में स्थानांतरित कर दिया था। यहां तक कि ई-काॅमर्स जैसे क्षेत्रों में, जहां पिछले वर्ष 15.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई है, वहां अनुमान लगाया जा रहा है कि वर्ष 2017 में केवल 12.4 फीसदी की बढ़ोतरी होगी।

विनिर्माण यानी मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र की नौकरियों की उपलब्धता में भी इसी तरह की गिरावट देखी जा रही है। प्रमुख विनिर्माण कंपनियों ने 2016 में अपने कर्मचारियों की संख्या में 30 फीसदी कटौती की है। हिन्दोस्तान में एक बड़ी मानव संसाधन उपलब्ध कराने में सेवा देने वाली कंपनी के अनुसार, 2017 में यह आंकड़ा 40 फीसदी कटौती तक पहुंचने का अनुमान है। 2,500 से अधिक कॉर्पोरेट ग्राहकों की रिपोर्टिंग करते हुए, इस कंपनी ने बताया है कि प्रवेश स्तर की नौकरियों को अधिकतम जोखिम का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि कम संवर्धन में वृद्धि से संबंधित

चिंताओं के बीच कंपनियां लागत-कटौती के तरीकों को लगातार अपना रही हैं। 2015 तक नयी भर्तियों में विनिर्माण क्षेत्र की कंपनियों का सबसे बड़ा हिस्सा था जो कि 75-80 फीसदी था, लेकिन 2016 में यह आंकड़ा घटकर 50-60 फीसदी ही रह गया है तथा इसमें और अधिक गिरावट का अनुमान है।

हाल ही में जारी हुई वर्ष 2017 के लिए मध्यवर्ती आर्थिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट (देखिये मज़दूर एकता लहर, 16-30 सितंबर, 2017 का अंक) में निर्यात और निजी निवेश में गिरावट की वजह से हिन्दोस्तान की अर्थव्यवस्था के धीमे होने का साफ तौर से संकेत मिलता है। विनिर्माण और निर्माण, दोनों ही क्षेत्र, एक गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं।

नोटबंदी और वस्तु एवं सेवा कर (जी.एस.टी.) ने विनिर्माण क्षेत्र के संकट को और भी बढ़ा दिया है। 2017-18 की पहली तिमाही में केवल 1.2 फीसदी की बढ़ोतरी हुई, जबकि 2016-17 की पहली तिमाही में यह 5.3 फीसदी थी। इसके अलावा, असंगठित क्षेत्र पर भी इसका प्रतिकूल असर पड़ा है क्योंकि निर्माण इकाइयों के लिए सामग्रियों की मांग गिर गई है।

बैंकिंग क्षेत्र, जो एन.पी.ए. (न चुकाये जाने वाले ऋण) और विलयन के आने वाले खतरे का सामना कर रहा है, में भी नौकरियों में कटौती की घोषणा की गई है। यस बैंक ने लगभग 2500 नौकरियों का सफाया कर दिया है, जो कि उनकी कुल मजदूरों की संख्या का 10 प्रतिशत से अधिक है। इससे पहले, एच.डी.एफ.सी. बैंक ने मार्च 2017 तक की तीन तिमाही में 11,000 कर्मचारियों की छंटनी की है।

जनवरी 2017 में, अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (आई.एल.ओ.) ने भविष्यवाणी की थी कि विश्वभर में बेरोजगार लोगों की संख्या 2017-18 की वित्तीय वर्ष के अंत तक 20 करोड़ से अधिक हो जाएगी। हिन्दोस्तान में बेरोजगारों की संख्या 1.8 करोड़ होगी, जो कि वैश्विक बेरोजगारों का करीब 10 फीसदी होगा। आई.एल.ओ. ने यह भी अनुमान लगाया कि जिन लोगों के पास आज रोजगार है, आने वाले समय में उनका रोजगार भी खतरे में पड़ सकता है, और यह बात दुनिया भर में सभी देशों पर, और खास तौर से कुछ देशों में लागू होगी जिसमे हिन्दोस्तान भी शामिल है।

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पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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