“हमारे साथ मानव बतौर व्यवहार होना चाहिए तथा हमें सरकारी कर्मचारियों के समान वेतन चाहिए!” - महाराष्ट्र के आंगनवाडी मज़दूरों की मांग

Submitted by cgpiadmin on सोम, 16/10/2017 - 13:03

महाराष्ट्र के 1.1 लाख से ज्यादा आंगनवाडियों में काम करनेवाली 2 लाख से ज्यादा मज़दूर 12 सितम्बर 2017 से हडताल पर हैं। वे मांग कर रही हैं कि उनके साथ मानव बतौर व्यवहार होना चाहिए। वे मांग उठा रही हैं कि उनके साथ सरकारी कर्मियों जैसा व्यवहार होना चाहिए। वे मांग उठा रही हैं कि उनकी वरिष्ठता के मुताबिक उन्हें सुधारित वेतन मिलना चाहिए। उनकी यह भी मांग है कि नये मज़दूर के लिए न्यूनतम वेतन रु. 7000 प्रतिमाह होना चाहिए और जो पिछले 20 सालों से यह काम कर रही हैं उन्हें प्रतिमाह रु. 13000 तक मिलना चाहिए। आज उन्हें प्रतिमाह रु. 3500 से रु. 5000 के बीच वेतन मिलता है। 2005 में महाराष्ट्र के तब के मुख्य मंत्री ने उन्हें पेन्शन दिलाने के बारे में जो आश्वासन दिया था, वह उन्हें मिलना चाहिए, यह भी उनकी मांग है।

age anganwadi-workers-Mahatashtra

हिन्दोस्तान में आंगनवाडीएक तरीके का ग्रामीण माता व बाल देखभाल केन्द्र होता है। शिशुओं में भूख तथा कुपोषण की समस्या को सुलझाने के लिए, 1975 में भारत सरकार ने एकीकृत शिशु विकास सेवा (Integrated Child Development Services, (ICDS) के तहत उन्हें शुरू किया था। आम तौर पर भारत के गांवों में आंगनवाडी केन्द्र मूलभूत स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करते हैं, जैसे कि गर्भ निरोधक सलाह तथा आपूर्ति, पोषण संबंधित शिक्षा तथा अनुपूरण, और पाठशाला-पूर्व क्रियाएं। केन्द्रों का मुखीय पुनर्जलयोजन क्षार (oral rehydration salts) मूलभूत दवाएं तथा गर्भनिरोधकों के भंडारों बतौर इस्तेमाल भी होता है। वे भारत के सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा प्रणालि का एक अंग हैं।

हिन्दोस्तान एक ऐसा देश है जिस में दुनिया के स्तर पर बाल कुपोषण की मात्रा अधिकतम है और शिक्षा की प्रभावकारिता सब से कम में है। इसलिए ज़रूरत है कि आंगनवाडी मज़दूरों की सहायता से सरकार बाल देखभाल के प्रयास बढ़ाएं। इसके विपरीत 2015 के बाद ICDS के लिए केन्द्रीय बजट में कुछ बढ़ौत्तरी हुई ही नहीं है। इसका मतलब है कि बढ़ती हुई महंगाई की परिस्थिति में बजट बढ़ने के बजाय कम हुआ है।

वास्तव में आंगनवाडी मज़दूर तथा सहायक सब से महत्वपूर्ण सेवाओं में कार्यरत हैं। लेकिन सरकार तो हमेशा यही कहती आयी है कि वे “स्वयंसेवी’’ होती हैं, और इसलिए उन्हें “मानदेय’’ दिया जाता हैं, और ना कि वेतन। 2011 के बाद इनको सुधारा नहीं गया है। सरकार मज़दूरों को प्रतिमाह मात्र रु. 3000 तथा सहायकों को प्रतिमाह रु. 1500 देती आयी है। अनेक राज्यों की सरकारें इस में थोड़ा बहुत जोड़ती हैं।

 

विशेषज्ञों ने तथा कार्यकर्ताओं ने भी इस बात पर ज़ोर दिया है कि इन मज़दूरों से कम वेतन में बहुत ज्यादा काम करवाया जाता है। आंगनवाडी मज़दूर तथा सहायक बहुत बुरी परिस्थिति में काम करती हैं: आधारभूत सुविधाएं बदतर हैं, अधिकतम जगहों में जो खाद्यपदार्थें की आपूर्ति होती है, वह अनियमित तथा घटिया क्वालिटी की होती है, शैक्षिक संसाधनों का अभाव होता है, मानधन मिलने में देर होती है, इ. पोषण के लिए पैसा आने में देर होती है। तब बहुत बार ये मज़दूर खुद के जेबों से पैसा दे देती हैं। ऐसी हालातों में शिशुओं की तथा गर्भवती या दूध पिलानेवाली माताओं की सेवाओं पर ही आखिर गैर परिणाम होता है।

आंगनवाडी मज़दूर तथा सहायक तो इस प्रणालि की रीढ होती हैं और उनकी भूमिका को मान्यता मिलनी चाहिए। अगर शिशुओं के अधिकारों की हिफ़ाज़त के बारे में सरकार गंभीर है, तो आंगनवाडी मज़दूर तथा सहायकों जैसी ज़मीनी तौर पर काम करनेवालों की भूमिका का उसने आदर करना चाहिए। उन्हें पर्याप्त वेतन देना इस दिशा में पहला कदम होगा।

हाल ही में आंध्र प्रदेश, तमिलनाडू, कर्नाटका तथा दिल्ली की आंगनवाडी मज़दूरों ने उपजीविका के अपने अधिकार के लिए लड़ाई लड़ी है। 2 महिनों से ज्यादा काल तक चलनेवाले उनके बहादुर संघर्ष के बाद दिल्ली की आंगनवाडी मज़दूरों ने कई मांगें जीती हैं।

महाराष्ट्र के आंगनवाडी मज़दूरों की जायज मांगों को स्वीकारने के बजाय राज्य सरकार ने उनके संघर्ष को नाकाम करने के लिए अनेक चालें चली। आंगनवाडी मज़दूरों की ज़िम्मेदारियां निभाने के लिए उसने ASHA (Accredited Social Health Activists) मज़दूरों का इस्तेमाल करने की कोशिश की। लेकिन यह चाल असफल हुई क्यों कि महाराष्ट्र भर के दसों हज़ारों गांवों में 56 लाख से ज्यादा बच्चों की देखभाल आंगनवाडी मज़दूर करती हैं। उसके बाद सरकार ने यह कह कर वेतन में एकतरफ़ा अत्यल्प बढ़ोत्तरी घोषित की कि कई युनियनों ने यह प्रस्ताव मंज़ूर किया है। लेकिन यह कोशिश भी पूर्णतः नाकामयाब हुई और आंगनवाडी मज़दूरों ने अपनी हड़ताल जारी रखी। कई मंत्रियों का कहना है कि धन कम है। लेकिन इस के ख़िलाफ़ मज़दूरों ने सही सवाल उठाया है, कि “तकरीबन एक हज़ार पूंजीपतियों के लाखों करोड़ों के कर्ज़ें माफ़ करने के लिए आप के पास पैसा है, तो 56 लाख बच्चों के कल्याण सेवा पर कुछ सैंकड़ो करोड़ रुपये आप क्यों नहीं खर्च कर सकते? अब हड़ताली मज़दूरों के ख़िलाफ़ सरकार ने एक जनहित याचिका दर्ज़ की है। उसका कहना है कि आंगनवाडी एक “आवश्यक सेवा’’ है, और इसीलिए मेस्मा (महाराष्ट्र के काले कानून) तहत यह हड़ताल अवैध है।

प्रसार माध्यमों के द्वारा बहुत प्रचार किया जा रहा है कि कैसे हड़ताल की वजह से हज़ारों कुपोषित शिशुओं को मौत का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन वास्तव में तो इस दलील से सरकार ही फंस रही है, क्यों कि इस से यही सिद्ध होता है कि आंगनवाडी मज़दूर लोगों के लिए एक बहुत महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारी निभा रही हैं।

आंगनवाडी मज़दूरों को गांवों से तथा शहरों से भी बहुत समर्थन मिल रहा है। मज़दूर एकता लहर आंगनवाडी मज़दूरों को अपना पूरा समर्थन देता है। मज़दूर एकता लहर सब स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को ललकारता है कि आंगनवाडी मज़दूर कितना महत्वपूर्ण काम कर रही हैं, इस बात का प्रसार करें।

Tag:    मानव बतौर व्यवहार    आंगनवाडी मज़दूरों    Oct 16-31 2017    Voice of the Party    Privatisation    Rights     2017   

पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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