पूंजीपतियों के लालच को पूरा करने के लिए एयर इंडिया का निजीकरण

Submitted by cgpiadmin on मंगल, 17/10/2017 - 01:30

28 जून, 2017 को आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने एयर इंडिया में केंद्रीय सरकार की हिस्सेदारी की “रणनैतिक बिक्री” के लिए “असूल के तौर” पर मंजूरी दी थी। सरकार के इस फैसले को सही बताते हुए वित्तमंत्री अरुण जेटली ने दावा किया था कि एयर इंडिया जैसी घाटा बनाने वाली कंपनी को चलाना लोगों के पैसों की बर्बादी है।

एयर कॉरपोरेशनस एम्प्लाइज यूनियन (ए.सी.ई.यू) ने अपना बयान जारी किया है, जिसमें यह बताया गया है कि किस तरह से वर्ष 2007 तक मुनाफे में चलने वाली कंपनी को तमाम सरकारों द्वारा की गयी “गड़बड़ियों और विनाशकारी प्रयोगों” की वजह से जानबूझकर “घाटा बनाने वाली” कंपनी में तब्ब्दील कर दिया गया। सरकार द्वारा एयर इंडिया के निजीकरण करने के फैसले की निंदा करते हुए इस बयान में कहा गया है कि निजीकरण का यह फैसला ऐसे वक्त पर लिया गया है, जब सी.बी.आई. यह तहकीकात कर रही है कि एयर इंडिया में ऐसी कौन-सी गड़बड़ी हुई, जिसके चलते मुनाफे में चलने वाली कंपनी घाटे में चली गयी।

सरकार का यह तर्क एकदम खोखला है कि एयर इंडिया को चलाना लोगों के पैसों की बर्बादी है, इसलिए उसका निजीकरण कर दिया जाना चाहिए। इसके कई कारण हैं।

air india struggleसबसे पहले, यदि कर्जों की वसूली का बोझ निकाल दिया जाये तो वर्ष 2015-16 और 2016-17 में एयर इंडिया ने मुनाफा बनाया है। कर्मचारी और विमानों का अनुपात केवल 106 है, और इसमें एयर इंडिया इंडिगो एयरलाइन के बाद दूसरे नंबर पर है, जबकि इंडिगो एयरलाइन्स के विमानों का बेड़़ा (फ्लीट) बहुत छोटा है। यदि यात्रियों की संख्या का अनुपात (पैसेंजर लोड फैक्टर) देखा जाए तो यह पिछले कई वर्षों से लगातार बेहतर होता आया है, और इस वक्त दुनिया भर में एयरलाइन उद्योग के औसत आंकड़ों के बराबर है। यह भी सच है कि 1992 में जब से हिन्दोस्तान में निजी हवाई सेवा को इजाजत दी गयी है, तबसे आज तक कई निजी एयरलाइन कंपनियां को काफी घाटा उठाना पड़ा है, और वह अपना धंधा बंद कर चुकी है - जैसे ईस्ट-वेस्ट, एयर डेक्कन, दमानिया एयरवेज और किंगफिशर एयरलाइन्स।

दूसरे, एयर इंडिया पर 50,000 करोड़ का बकाया कर्जा अकुशल संचालन का नतीजा नहीं है। इसकी असली वजह सरकार द्वारा जानबूझकर लिए गए तीन मुख्य फैसले हैं। पहला फैसला है 2005-06 में एयर इंडिया और इंडियन एयरलाइन्स द्वारा 111 नए हवाई जहाजों की खरीदी, जो कि जरूरत से कही अधिक संख्या में थी। इन दो सार्वजनिक विमान सेवा कंपनियों द्वारा अपनी फ्लीट का विस्तार करने के सारे प्रस्ताव कई वर्षों तक ठुकरा दिए गए, जिससे निजी हवाई कंपनियों को बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का मौका मिल गया। और फिर अचानक अमरीकी बोइंग कंपनी और यूरोपीय एयरबस कंपनी से 70,000 करोड़़ रुपये की भारी कीमत पर जरुरत से ज्यादा हवाई जहाज खरीदने का फैसला लिया गया। जिस तरीके से इस सौदे को अंजाम दिया गया, संभव है कि इसका हिन्दोस्तान-अमरीकी परमाणु सौदे के साथ कोई गुप्त संबंध है।

दूसरा विनाशकारी फैसला था गड़बड़ी में किया गया इंडियन एयरलाइन्स और एयर इंडिया का विलयन, जो कि बड़े पैमाने पर विमानों की खरीदी के एक साल के बाद किया गया। और तीसरा फैसला था सरकार द्वारा घोषित की गयी “खुले आसमान” की नीति, जिसका नुकसान एयर इंडिया के अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार को उठाना पड़ा, जबकि इससे विदेशी कंपनियों को बहुत फायदा हुआ।

इन सभी तथ्यों से पता चलता है कि केंद्र में सरकार चाहे कांग्रेस की हो या भा.ज.पा. की, केंद्र सरकार की नीतियां इस तरह से बनायीं गयी, जिससे एयर इंडिया को घाटा बनाने वाली कंपनी में तब्दील किया जा सके और राज्य के मालिकी की इस सार्वजनिक कंपनी के निजीकरण के लिए हालात तैयार किये जा सके। यह सब इसलिए किया गया क्योंकि इन दोनों कंपनियों में निजी मालिकों के लिए बड़े मुनाफे बनाने की बहुत काबिलियत है।

हिन्दोस्तान के बाजार में एयर इंडिया की 15 प्रतिशत हिस्सेदारी है। यह बाजार दुनिया का चैथा, सबसे बड़ा हवाई यात्रा का बाजार है। एयर इंडिया के पास विशाल जमीन है, जिसमें शामिल है मुंबई के बीचों-बीच 30 एकड़ जमीन और मरीन ड्राइव पर भव्य ईमारत, जिसकी कीमत 1600 करोड़ से अधिक है। एयर इंडिया के पास दिल्ली, लंदन, हांगकांग, नैरोबी, टोक्यो और मॉरिशस में कई संपत्तियां हैं। इसके अलावा, एयर इंडिया के पास दुनिया भर में सभी मुख्य अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट पर पार्किंग के लिए जगह है। उसकी कई मुनाफेदार सहायक कंपनियां हैं। एयर इंडिया का अपना रखरखाव और मरम्मत (मेंटेनेंस एंड रिपेयर) केंद्र है, जिसकी वजह से उसको अन्य एयरलाइन के मुकाबले कम खर्चे का फायदा मिलता है।

एयर इंडिया के निजीकरण का फैसला लोगों के पैसे को बर्बाद होने से बचाने के मकसद से नहीं लिया गया है, जैसा कि वित्तमंत्री दावा कर रहे है। इस फैसले का जनहित से कुछ भी लेना-देना नहीं है। इसके पीछे का मुख्य लक्ष्य है लोगो के पैसों से इज़ारेदार पूंजीपतियों के निजी मुनाफे के लालच को पूरा करना। यह इज़ारेदार पूंजीपति बरसों से लोगों के खून पसीने की कमाई से खड़़ी की गयी संपत्ति को कौड़ियों के दाम पर हथियाना चाहते हैं।

सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या एयर इंडिया का निजीकरण केवल मुनाफों के आधार पर ही किया जाना चाहिए। देश के छोटे शहरों और दूर-दराज के इलाकों में रहने वालों लोगों के हितों का क्या होगा जहां केवल एयर इंडिया की ही सेवाएं उपलब्ध है? यदि सभी हवाई यात्रा और सेवाओं का निजीकरण कर दिया गया, तो उन लोगों को या तो सेवाएं मिलेगी ही नहीं या फिर उनको इसकी भारी कीमत देनी होगी।

1953 में हिन्दोस्तान में जब हवाई उद्योग का राष्ट्रीयकरण किया गया, तब यह बताया गया कि इसका मकसद देश के सभी इलाकों में वाजिब दाम पर हवाई सेवा उपलब्ध कराना है। 1990 के बाद आई निजी हवाई कंपनियों का अनुभव यही दिखता है कि ये कंपनियां सबसे अधिक भीड़-भाड़ वाले हवाई मार्गों पर ही अपनी सेवाएं केंद्रित करती है, क्योंकि इन्ही मार्गों पर अधिकतम मुनाफे बनाये जा सकते हैं। कंपनी को मुनाफेदार बनाने का तर्क देते हुए इस एकमात्र सार्वजनिक हवाई कंपनी का निजीकरण करने का मतलब है, सभी इलाकों को पर्याप्त हवाई सेवा देने की सामाजिक जिम्मेदारी को त्याग देना।

इन सबसे यही निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि एयर इंडिया का निजीकरण न केवल मजदूरों के हितों के खिलाफ है, बल्कि पूरे समाज के आम हितों के भी खिलाफ है। यह फैसला इजारेदार पूंजीपतियों के लालच को पूरा करने के मकसद से लिए गया है। निजीकरण के खिलाफ मजदूरों का विरोध पूरी तरह से जायज है। सभी लोगों को इसका समर्थन करना चाहिए।

Tag:    एयर इंडिया    रणनैतिक बिक्री    किंगफिशर    Oct 16-31 2017    Political-Economy    Privatisation    Rights     2017   

पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

(Click thumbnail to download PDF)

यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)

यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)

हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)

ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)