भारतीय रेल द्वारा यात्रियों की सुरक्षा में लापरवाही की निन्दा करें!

Submitted by cgpiadmin on मंगल, 17/10/2017 - 00:30

29 सितम्बर, 2017 को मुम्बई के उपनगर एल्फिन्स्टन रोड रेलवे स्टेशन पर हुई एक दुर्घटना में कम से कम 23 लोगों की मौत गई और बहुत बड़ी संख्या में लोग गम्भीर रूप से घायल हो गये। मध्य तथा पश्चिम रेलवे के उपनगरीय स्टेशनों को जोड़ने वाले पैदल पुल पर हुई भगदड़ से यह हादसा हुआ। हर तरफ से हो रही कड़ी आलोचना तथा लोगों के तीव्र गुस्से की ख़बरें मिलने के बाद, महाराष्ट्र सरकार तथा रेल प्रशासन को दिखावे के लिए ही सही, कुछ न कुछ करना पड़ा है। महाराष्ट्र सराकर ने बड़ी शीघ्रता से एक समिति का यह कह कर गठन किया है कि वह लोकल रेल सेवाओं की सुरक्षा के ऊपर लगातार निगरानी रखेगी। रेल मंत्री ने भी बड़ी तत्परता से रेल अधिकारियों को यह आदेश दिया है कि वे सभी उपनगरी स्टेशनों की सुरक्षा की पड़ताल या ऑडिट करें। उन्होंने घोषित किया कि रेल

अधिकारी सुरक्षा संबंधित सभी कार्यवाहियों को प्राथमिकता देंगे और यह भी अश्वासन दिया कि पैदल पुलों को और चौड़ा बनाने का काम तथा अधिक पैदल पुल बनाने का काम आनेवाले 15 महीनों के अंदर पूरा किया जाएगा। लेकिन इसके बाद दो दिनों के अंदर ही यह भी ख़बर मिली कि इस दुर्घटना के लिए उन्होंने रेल अधिकारियों को, अयोग्य तथा भ्रष्ट ठहराते हुये, इसके लिये दोषी ठहराया है।

एक तरफ़ त्वरित कार्यवाहियों के अश्वासन और दूसरी तरफ अधिकारियों पर इल्ज़ाम लगाने के पीछे क्या मकसद है? इसका एक मकसद तो लोगों का गुस्सा ठंडा करना है। लेकिन असली मकसद तो यह है कि रेल सुरक्षा के बारे में किसी तरह के गम्भीर विचार-विमर्श को टालना और उसके साथ-साथ रेल यात्रियों की बढ़ती असुरक्षितता के सही कारणों को छुपाना।

मुम्बई उपनगरीय रेल सेवा की परिस्थिति कितनी ख़तरनाक है, यह समझना बिल्कुल कठिन नहीं है। 1952 में मुम्बई उपनगरी रेल सेवा में सालाना 29.2 करोड़ लोग यात्रा किया करते थे। 2016 तक इनकी संख्या सालाना 270 करोड़ तक पहुंच गयी है। इसका मतलब है कि इस दौरान यात्रियों की संख्या करीबन नौ गुना बढ़ गयी। इस दौरान में उपनगरी रेल सेवा की संख्या 741 से 2,800 हुई यानी कि चार गुना भी नहीं बढ़ी। इससे साफ दिखता है कि उपनगरीय रेल सेवा यात्रियों की ज़रूरतों को बिल्कुल पूरा नहीं कर सकती। मुम्बई की लोकल सेवाओं का इस्तेमाल रोज़ाना करीबन 75 लाख यात्री करते हैं। हर लोकल ट्रेन में उसकी क्षमता से औसतन 2.6 गुना अधिक यात्री सफर करते हैं। परिणामतः लोकल ट्रेन से गिरकर या पटरियों को पार करते हुये रोज़ाना 9 से 10 लोगों की मौत हो जाती है। 2015 तक, पिछले दस सालों में उपनगरीय रेल सेवा लोकल ट्रेनों से गिर कर 6989 लोगों की तथा पटरियों को पार करते हुये 22,289 लोगों की मौत हो गयी। यात्रियों की बढ़ती संख्या के मुताबिक लोकल रेल सेवाओं तथा सुरक्षा प्रावधानों को बढ़ाने के लिए कोई भी कदम नहीं उठाये गये हैं।

परिस्थिति बहुत ही ख़तरनाक है और लोगों को लगता है कि आने वाले दिनों में ऐसी अनेक दुर्घटनाएं हो सकती हैं। लोग इस बात पर बहुत गुस्से में हैं कि यह कैसे हो सकता है कि बुलेट ट्रेन बनाने के लिए सरकार के पास पैसे की कोई कमी नहीं है, लेकिन सुरक्षा प्रावधानों तथा यात्रियों के लिए आवश्यक सुविधाओं के लिए धन ही नहीं है। लोग इस बात की भी कड़ी आलोचना कर रहे हैं कि लोगों के बीच साम्प्रदायिक भावनाएं भड़काने के लिए स्टेशनों के नाम बदलने में, सरकार रुचि दिखाती है, लेकिन सुरक्षा के मामले में कुछ नहीं करती है।

आज तक भारतीय रेल के मुताबिक पैदल-पारपथ पुलों को “आवश्यक सुविधा” नहीं, बल्कि “विशेष सुविधा” माना जाता था! पिछले कई सालों से एल्फिन्स्टन रोड तथा अन्य स्टेशनों की अत्यंत ख़तरनाक अवस्था के बारे में लोगों ने चेतावनियां दी थीं। परंतु अधिकारियों ने इसके बारे में कुछ भी नहीं किया। यह इसलिए कि सत्ता में आनेवाली अलग-अलग सरकारों के लिए लोगों की सुरक्षा कुछ मायने की नहीं हैं। इसलिए एल्फिन्स्टन रोड की दुर्घटना को अपघात कहना गलत है।

एल्फिन्स्टन रोड स्टेशन पर लोगों का जो कत्लेआम किया गया, उसके लिए मजदूर एकता लहर सरकार का तथा भारतीय रेल के अधिकारियों की निन्दा करती है! और यह मांग करती है कि संबंधित मंत्रियों सहित संबंधित अधिकारियों को इस हत्या के लिए ज़िम्मेदार ठहराया जाए।

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पार्टी के दस्तावेज

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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