“आतंकवाद पर जंग” के बहाने अमरीका एशिया में दबदबा बना रहा है

Submitted by cgpiadmin on गुरु, 02/11/2017 - 00:30

प्रिय संपादक,

यह ख़त पार्टी के अख़बार मज़दूर एकता लहर के 16-31 अक्तूबर, 2017 के अंक में छपे लेख - “आतंकवाद पर जंग” के नाम पर अमरीकी साम्राज्यवाद एशिया पर अपना दबदबा कायम करने की कोशिश कर रहा है - के संदर्भ में है।

जैसा कि लेख में बताया गया है कि “पाकिस्तान की सरकार ने अपनी फौज़ को अफगानिस्तान के अंदर भेजने की इजाज़त नहीं दी है।“ इस कदम से यह समझ में आता है कि पाकिस्तान का अमरीका के साथ अनुभव कैसा रहा है। जब भी पाकिस्तान ने अमरीका को अपनी सीमाओं में हस्तक्षेप करने की अनुमति दी है या अमरीका से सहायता ली है उसे संकटों का सामना करना पड़ा है। अब अमरीका यह सुनिश्चित कर रहा है कि पाकिस्तान को विश्व स्तर पर एक आतंकवादी राज्य करार दिया जाए, ताकि उससे “आतंकवाद पर युद्ध” के नाम से निपटा जा सके। पाकिस्तान के अनुभव से, ऐसा लगता है कि उससे सावधान रहना ही अच्छा होगा, ये देखकर कि किस प्रकार अमरीका का सहयोगी होने पर पाकिस्तान ने “दोस्ती” की कीमत चुकाई है। अगर हिन्दोस्तानी राज्य अपने लोगों की सुरक्षा को ध्यान में न रखकर, बल्कि पूंजीपति वर्ग के स्वार्थी व विस्तारवादी हितों को ध्यान में रखते हुए, स्थिति का मूल्यांकन करता है, तो यह स्पष्ट होगा कि अमरीका का सहयोगी होने के कारण बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी। यह केवल विनाश और क्षेत्र की तबाही का कारण होगा। पाकिस्तान को आतंकवादी राज्य करार देने के लिए अमरीका की सराहना करने की बजाय, हिन्दोस्तानी राज्य को अपने कदम से पीछे जाना चाहिए और अमरीका के साथ किये गये सभी गठबंधनों को खत्म कर देना चाहिए। बेहतर होगा कि हिन्दोस्तान इस क्षेत्र में अमरीकी योजनाओं के खिलाफ़, मजबूत मोर्चा सुनिश्चित करने के लिए पाकिस्तान सहित अपने पड़ोसियों के साथ मजबूत संबंध बनाए।

यह एक महत्वपूर्ण विश्लेषणात्मक लेख है। पश्चिम एशिया आज जिस स्थति में है, उन तथ्यों को स्पष्ट रूप से सामने लाने वाली घटनाओं की श्रृंखला का पता चलता है। अर्थात अमरीका ने लाखों निर्दोष जिंदगियों की कीमत पर कैसे-कैसे खेल खेलें हैं, यह सबको दिखाई देता है। कृपया प्रयास करें कि इस तरह के और लेख लिखे जाएं, ताकि सच्चाई और उजागर हो। इससे हमारा ज्ञान भी बढ़ेगा और महत्वपूर्ण बात यह है कि हमारे भविष्य के निर्माण में हम भाग लेने को प्रोत्साहित होंगे।

श्वेता, मुंबई

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आतंकवाद पर जंग    Nov 1-15 2017    Letters to Editor    Communalism     2017   

पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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