स्कूली शिक्षा का निजीकरण

Submitted by cgpiadmin on गुरु, 02/11/2017 - 00:30

संपादक महोदय,

मैंने, “स्कूली षिक्षा का निजीकरण: राज्य ने अपने दायित्व को निभाने से इंकार किया” - लेख को पढ़ा। मेरी नज़र लेख में दिये गए आंकड़ों पर गई। ये आंकड़े सरकारी स्कूलों की दुर्दषा को दर्षाते हैं। स्कूलों का प्रतिषत, जिनमें लड़कियों के लिये षौचालय की उपलब्धता है। जो कम से कम 51 प्रतिषत है और सर्व हिन्द के तौर पर 91.2 प्रतिषत है। ये आंकड़े देखने में तो अच्छे लग रहे हैं।लेकिन क्या यह हक़ीक़त है? गांव तो क्या, राजधानी

जैसे षहर में भी यह सुविधा देखने को नहीं मिलती। गांव में 12 साल के बाद, माता-पिता लड़कियों की पढ़ाई छुड़वा देते हैं। उनके लिये स्कूल दूर होते हैं। षौचालय नहीं होता है। कहीं षौचालय होता है तो पानी नहीं होता है, सफाई नहीं होती है। कई स्कूलों में षौचालय की चाभी पुरुष षिक्षकों के पास होती है। लड़कियां चाभी मांगने में शर्म महसूस करती हैं।

मुझे ऐसा लगता है कि सभी राज्यों की राजधानी या पुराने बसे हुए गांवों के षौचालयों की गिनती आंकड़ों में है। ये आंकड़े पूरे देष का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं।

राजस्थान सरकार की घोषणा कि असंतोषजनक रूप से चलने वाले 300 सरकारी स्कूलों को निजी हाथों में सौंप दिया जायेगा। यह एक खतरनाक फैसला है। स्कूलों को राज्य पूंजीपतियों के मुनाफ़ों के लिये देकर, हमें षिक्षा जैसे हमारे मौलिक अधिकार से वंचित कर रहा है। हमें सरकार की बातों में नहीं फंसना चाहिए। एक के बाद एक, प्रत्येक राज्य इसे अपनाने से पीछे नहीं हटेगा। हम सभी जानते हैं कि निजीकरण के बाद, हमें मुफ्त षिक्षा नहीं मिल सकती। देष के कितने ही लोग ऐसे हैं जिनके पास दो वक्त के लिये रोटी नहीं होती, उनके बच्चों की पढ़ाई कैसे होगी। इसलिए हम सभी को मिलकर इसे रोकना होगा। स्कूली षिक्षा जो सभी बच्चों के भविष्य को तय करती है, उसे हमें निजी मुनाफ़े बनाने के लिये नहीं छोड़ देना चाहिये। हमें यह मांग करनी होगी कि सभी को मुफ्त और समान षिक्षा मिले, यह जिम्मेदारी हमारे देष की हर राज्य सरकार को निभानी ही होगी। षिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 में पास हुआ। हमें इस संघर्ष को जारी रखना होगा, जब तक यह हमें प्राप्त नहीं हो जाता।

रेणू,

कटक

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स्कूली शिक्षा    निजीकरण    Nov 1-15 2017    Letters to Editor    Rights     2017   

पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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