अमरीकी रक्षा मंत्री का दौरा : रक्षा सहयोग बढ़ाने के लिये सैन्य उपकरणों की बिक्री

Submitted by cgpiadmin on बुध, 01/11/2017 - 22:30

अमरीकी रक्षा मंत्री (सेक्रेटरी ऑफ स्टेट), रेक्स टिलरसन, पहली बार हिन्दोस्तान के तीन-दिवसीय औपचारिक दौरे पर, 24 अक्तूबर की रात दिल्ली पहुंचे। उनके और सुषमा स्वराज के बीच वार्ता के दौरान दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय रक्षा व सुरक्षा रिश्तों को ज्यादा मजबूत करने पर तथा इस क्षेत्र में आतंकवाद का सामना करने पर चर्चा की।

टिलरसन ने दक्षिण एशिया में हिन्दोस्तान के एक अहम शक्ति के रूप में उभरने पर जोर दिया ताकि अमरीकी राज्य द्वारा हिन्दोस्तान को “सैन्य आधुनिकीकरण के प्रयासों के लिये सबसे अच्छी टेक्नोलाॅजी प्रदान करने की सफाई दी जा सके, जिसमें अमरीकी उद्योगों द्वारा एफ-16 व एफ-18 लड़ाकू हवाई जहाज बेचने की महत्वाकांक्षी योजना भी शामिल है।”

ऐसी रिपोर्ट की गई है कि क्लार्क, फिलिपींस में आसियान रक्षा मंत्रियों के सम्मेलन की पाश्र्व रेखा में रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण ने अमरीकी रक्षा सचिव, जेम्स मैटिस के साथ द्विपक्षीय चर्चा की।

2016 के अगस्त में हिन्दोस्तान और अमरीका ने एक युगांतरकारी समझौता किया जिसके अंतर्गत दोनों देश सैनिक सहयोग के लिये बाध्य होंगे। इस अंतराल में, अमरीकी राज्य और हिन्दोस्तानी राज्य के बीच सहयोग बढ़ता गया है। उसी वर्ष बराक ओबामा के पिछले प्रशासन ने हिन्दोस्तान को ’प्रमुख रक्षा सांझेदार’ का दर्जा प्रदान किया था, जिसके तहत रक्षा क्षेत्र में टेक्नोलॉजी ट्रांसफर व गहरा सहयोग संभव किया गया।

ट्रम्प प्रशासन भी उसी रास्ते पर चल रहा है। रेक्स टिलरसन ने पहले कहा था कि हिन्दोस्तान के प्रमुख रक्षा सांझेदार होने के नाते और समुद्री सहयोग बढ़ाने के दोनों पक्षों के हितों के आधार पर, ट्रम्प प्रशासन ने हिन्दोस्तान को रक्षा सामग्री की एक विकल्प सूची गौर करने के लिये दी थी।

पिछले तीन वर्षों में, हिन्दोस्तान को रक्षा सामग्री बेचने वाले देशों में अमरीका करीब 44,000 करोड़ डाॅलर के साथ दूसरे नंबर पर है। सैन्य अभ्यासों में वह हिन्दोस्तान का सबसे बड़ा सांझेदार है। इस समय रक्षा सामग्री के आयात में हिन्दोस्तान सबसे आगे है। अमरीका के साथ हथियारों के सौदों में हिन्दोस्तान, न के बराबर से, 2013 में 80,000 करोड़ डॉलर तक पहुंच गया है। अब तक यह 1.2 लाख करोड़ डॉलर तक पहुंच गया होगा। दोनों देशों के बीच हथियारों के सौदे बृहद भू-राजनीतिक सहयोग का एक हिस्सा हैं। परन्तु इनसे अमरीका के मिलिटरी इंडस्ट्रीयल कांप्लेक्स को ही फायदा होता है।

हिन्दोस्तानी शासक वर्ग अपने आप को दुनिया की एक उभरती बड़ी शक्ति बतौर देखता है। वह अपनी पूंजी का निर्यात करता है व बाज़ारों का विस्तार करता है। बढ़ते तौर पर उसकी कोशिश है कि ऊर्जा व कच्चे माल के स्रोतों पर कब्ज़ा जमाये। “बड़ी शक्ति” होने के नाते, दक्षिण एशिया में और उससे भी विस्तृत क्षेत्र में, अपनी चैधराहट जमाने को वह अपना “अधिकार” समझता है। अफ्रीका से मलक्का जलडमरूमध्य तक पूरे हिन्द महासागर को वह अपना प्रभाव क्षेत्र मानता है। अपने साम्राज्यवादी मंसूबों के लिये, वह बेताबी से हथियार खरीद रहा है तथा विभिन्न देशों के साथ गठबंधन बना रहा है।

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पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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