महिंद्रा के मज़दूरों ने अपने दृढ़ संघर्ष से जीत हासिल की

Submitted by cgpiadmin on बुध, 01/11/2017 - 21:30

उत्तराखंड में महिंद्रा के दो कारखानों के मज़दूरों ने दृढ़ संघर्ष के बाद, अपनी मांगों को जीत लिया है। उन्होंने यह संघर्ष 18 मई, 2017 को महिन्द्रा सी.आई.ई. मज़दूर संगठन के बैनर तले तब शुरू किया, जब वार्षिक वेतन में वृद्धि की उनकी मांग लागू नहीं हुई। मज़दूरों ने कारखाने में विरोध के कई तरीकों का इस्तेमाल करते हुए चार महीने तक संघर्ष किया।

2016 में, उत्तराखंड में महिंद्रा के दो कारखानों के मज़दूरों ने 45 दिनों से अधिक समय तक एकजुट संघर्ष चलाया था। इसमें ‘टूल-डाउन’ हड़ताल के तीन दिन भी शामिल थे। यह संगठित प्रतिरोध दो बर्खास्त मज़दूरों, हेमचंद और शत्रुधन, को बहाल करने की मांग को लेकर था। इन दोनों मज़दूरों को वार्षिक वेतन में वृद्धि की मांग को लेकर किये गये संघर्ष के बाद निलंबित कर दिया गया था। आखिरकार मज़दूर सफल हुए और इन दोनों मज़दूरों को बहाल किया गया।

Mahindra workers demonstrationइस वर्ष, संघर्ष के पहले चरण में, विरोध के एक तरीके के रूप में, मज़दूरों ने बिना भोजन किये काम करना शुरू कर दिया। चूंकि इसका प्रबंधन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा, मज़दूरों ने 18 जुलाई से दो घंटे का दैनिक ‘टूल-डाउन’ शुरू किया, जो 20 जुलाई से तीन घंटे तक कर दिया गया। 28 जुलाई को, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने हस्तक्षेप किया और मज़दूरों को अपना ‘टूल-डाउन’ संघर्ष तरीका रोकना पड़ा। हालांकि, मज़दूरों ने बिना भोजन किये काम करने के अपने विरोध को जारी रखा।

3 अगस्त को अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट ने मज़दूरों को आश्वासन दिया कि उनकी मांगों को पूरा किया जाएगा और उनसे 80 दिन के ” बिना भोजन किये काम“ की हड़ताल को समाप्त करने का अनुरोध किया। मज़दूर सहमत हो गये और उन्होंने हड़ताल खत्म कर दी। हालांकि, प्रबंधन ने उनकी मांगों पर कोई ध्यान नहीं दिया, इसलिए उन्होंने 18 अगस्त को एक और ”टूल-डाउन“ हड़ताल शुरू कर दी। 21 अगस्त को प्रबंधन ने इन दोनों कारखानों में से एक कारखाने के दरवाजे़ को बंद कर दिया ताकि मज़दूर अंदर ही फंसे रहें। फिर उन्होंने पुलिस को बुलाया और मज़दूरों पर लाठी चार्ज करवाया, जिसमें कई मज़दूर घायल हो गए। शाम को, पुलिस ने दोनों कारखानों के मज़दूरों को गिरफ्तार किया और रात में उन्हें 2 घंटे के लिए हिरासत में रखा।

26 अगस्त की शाम को प्रबंधन ने अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में निम्नलिखित मांगों पर अपनी सहमति जताई:

  1. 3 वर्षों के लिए 5,000 रुपये की वेतन वृद्धि की जाएगी, जिसमें प्रथम वर्ष में 60 प्रतिशत वृद्धि और दूसरे व तीसरे वर्ष में 20 प्रतिशत की वृद्धि शामिल है।
  2. यह समझौता 1 जनवरी, 2017 से 31 दिसंबर, 2019 तक प्रभावी रहेगा।
  3. नवंबर, 2019 में मज़दूर अपनी अगली मांगों को पेश करेंगे और प्रबंधन 15 दिसंबर, 2019 को इस मांग पत्र का जवाब देगा।
  4. जनवरी-जुलाई, 2017 की अवधि के बकाये का भुगतान, जनवरी 2018 के वेतन के साथ किया जाएगा।
  5. संघर्ष के इस चरण में निलंबित किये गए 10 मज़दूरों के मुद्दे पर एक आंतरिक जांच की जाएगी। समझौते की तारीख के 45 दिनों के भीतर जांच पूरी की जाएगी।
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पार्टी के दस्तावेज

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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