चिकित्सा सेवा को लेकर धरना जारी

Submitted by cgpiadmin on बुध, 01/11/2017 - 20:30

राजस्थान के जिला हनुमानगढ़ की तहसील नोहर के गांव रामगढ़ के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में रिक्त पदों को भरने व रोगियों की जांच के लिए उपकरणों की आपूर्ति की मांग को लेकर रामगढ़ सतर्कता एवं संयुक्त संघर्ष समिति की अगुवाई में 18 अक्तूबर, 2017 से, खबर लिखे जाने तक क्रमिक धरना जारी है।

Protests continue for health servicesसमिति के सदस्यों द्वारा चिकित्सा मंत्री को दिए गये ज्ञापन में, सी.एच.सी. के रिक्त पद भरने, एक्स-रे मशीन, सी.बी.सी. मशीन, आदि उपकरण उपलब्ध करवाने, स्वास्थ्य केन्द्र के कर्मचारियों के लिए आवासीय भवन का निर्माण करने, आदि की मांग की गई।

समिति के सदस्यों का कहना है कि सरकार दावा कर रही है कि वह चिकित्सा सेवाओं पर पानी की तरह धन बहा रही है, लेकिन राज्य के चिकित्सालयों की दशा में कोई सुधार देखने को नहीं मिल रहा। उन्होंने कहा कि रामगढ़ में सी.एच.सी. तो बना दिया गया लेकिन लंबे समय से एकमात्र चिकित्सक के सहारे इसका संचालन हो रहा है। जांच योजना के नाम पर बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं लेकिन हकीक़त ये है कि सी.एच.सी. में जांच के लिए पर्याप्त उपकरण तक नहीं हैं। ऐसे में रोगियों की जांच कैसे होगी।

उन्होंने सरकार को चेतवनी दी है कि यदि सी.एच.सी. की दशा में सुधार नहीं किया गया तो आंदोलन और तेज़ किया जायेगा।

धरने में लोक राज संगठन के सर्व हिन्द उपाध्यक्ष कामरेड हनुमान प्रसाद शर्मा सहित, रामप्रसाद जांगिड़, मनीराम नैण, कन्हैयालाल जैन, मनीराम लकेसर, पालाराम भांभू, दिनेश स्वामी, सूरज भांभू, भीम सहारण, रामसिंह, प्रदीप कुमार, सुरदीप खाती, मनजीत भांभू, देवेन्द्र शर्मा, बबलू देव, देवकीनंदन खीचड़ आदि उपस्थित थे।

इसके साथ ही साथ, भादरा उप-तहसील मुख्यालय छानीबड़ी के राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के समक्ष 18 अक्तूबर को गांववासियों ने छः पदों में से तीन पद समाप्त किए जाने को लेकर प्रदर्शन किया।

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पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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