दिल्ली में मज़दूरों की तीन-दिवसीय विशाल रैली

Submitted by cgpiadmin on शुक्र, 17/11/2017 - 03:30

नवम्बर 9-11, 2017 तीन दिन तक हिन्दोस्तान के हर राज्य से मज़दूरों की लहरें संसद के सामने सर्व हिन्द तीन-दिवसीय महापड़ाव में भाग लेने के लिये आयीं। संसद के सामने मज़दूरों के समुद्र जैसा था। लाल झंडे, मज़दूरों की मांगों के प्लेकार्ड और सहभागी यूनियनों के बैनर महापड़ाव में चारों ओर दिख रहे थे। वह मज़दूरों का उत्सव जैसा लग रहा था। मज़दूर वर्ग के नेताओं ने लगातार मज़दूरों को संबोधित किया, सांस्कृतिक कर्मियों ने अलग-अलग भाषाओं में गीत गाये और मज़दूरों को सभी प्रकार के शोषण और दमन से मुक्त समाज के लिये अपने संघर्ष को तेज़ करने को प्रेरित किया।

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इस महापड़ाव में तीन लाख से अधिक मज़दूरों ने भाग लिया। उनमें अर्थव्यवस्था के अलग-अलग क्षेत्रों - पावर प्लांट, इस्पात प्लांट, सड़क परिवहन, रक्षा, शिक्षा व तमाम अन्य क्षेत्रों - के मज़दूर शामिल थे। देश के सभी राज्यों से आई आंगनवाड़ी कर्मियों, आशा कर्मियों और मध्याह्न भोजन कर्मियों समेत एक लाख से अधिक महिला मज़दूर उपस्थित थीं। मज़दूरों में इतना जोश था कि प्रतिदिन मज़दूरों की संख्या बढ़ती गयी। 11 नवम्बर को, शाम 5 बजे जब महापड़ाव समाप्त होने जा रहा था, तब भी मज़दूरों के नये-नये प्रतिनिधिमंडल आते जा रहे थे।

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी इस शानदार कार्यक्रम के लिये देश के मज़दूर वर्ग को बधाई देती है। अपने-अपने जिलों, राज्यों और काम के स्थानों पर वापस जाते हुए मज़दूरों में अपने अधिकारों की हिफ़ाजत के लिये, पूंजीपतियों के हमलों के खिलाफ़ मिलकर संघर्ष करने का जोश और संकल्प भरा हुआ था। यह घोषणा की गयी कि अगले कुछ महीनों तक मज़दूरों के संयुक्त संघर्ष को और तेज़ किया जायेगा तथा उसके बाद एक अनिश्चितकालीन सर्व हिन्द आम हड़ताल होगी।

हर जिले और शहर में, हर औद्योगिक क्षेत्र में, अर्थव्यवस्था के हर क्षेत्र में हमें अपने अधिकारों पर हमलों के खिलाफ़ मज़दूरों की एकता मजबूत करने की अपनी कोशिशों को दुगुना करना होगा। हमें मज़दूर एकता समितियां बनानी होंगी और उन्हें मजबूत करना होगा। ये समितियां अलग-अलग पार्टियों और ट्रेड यूनियनों के कार्यकर्ताओं को एक साथ लाने का काम करती हैं। इन समितियों में मज़दूर वर्तमान ज्वलंत राजनीतिक समस्याओं पर चर्चा कर सकते हैं, मज़दूर वर्ग का कार्यक्रम निर्धारित कर सकते हैं और मज़दूर वर्ग के सांझे संघर्ष को सामूहिक नेतृत्व दे सकते हैं।

हमें बड़े धैर्य के साथ मज़दूरों को यह सच्चाई समझानी होगी कि चुनावों के ज़रिये भाजपा की सरकार को बदल कर कांग्रेस पार्टी की सरकार लाने से यह समाज-विरोधी हमला खत्म नहीं होगा। हमारा दुश्मन सत्ता में बैठा हुआ पूंजीपति वर्ग है, जिसकी अगुवाई कुछ 150 बड़ी इज़ारेदार कंपनियां कर रही हैं। हमारा दुश्मन सिर्फ यह या वह पार्टी नहीं है। इस व्यवस्था के चलते, जो भी पार्टी सत्ता में आती है, वह सत्ता में बैठे पूंजीपति वर्ग के मज़दूर-विरोधी, किसान-विरोधी, समाज-विरोधी और राष्ट्र-विरोधी कार्यक्रम को ही लागू करती है। हमें इस बात पर जोर देना होगा कि मज़दूर वर्ग की सभी पार्टियां व संगठन इस मूल सवाल पर ध्यान दें कि हम अपने देश में इन चंद शोषकों के शासन को कैसे खत्म करेंगे और मज़दूरों और किसानों का शासन स्थापित करेंगे। हमें किसी भी बहाने पर इस सवाल से नहीं भटकना चाहिये। आइये, आने वाले संघर्षों के लिये मज़दूर वर्ग को तैयार करें।

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पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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