1984 में राज्य द्वारा आयोजित सिखों के जनसंहार के 33 वर्ष बाद : इंसाफ और गुनहगारों को सज़ा दिलाने के लिए संघर्ष आगे बढ़ायें!

Submitted by cgpiadmin on शुक्र, 17/11/2017 - 01:30

कई कम्युनिस्ट पार्टियों और संगठनों के सदस्यों और कार्यकर्ताओं ने 1 नवम्बर, 2017 को नयी दिल्ली में एक संयुक्त कार्यक्रम आयोजित किया। सिखों के जनसंहार के 33 वर्ष बाद, इंसाफ और गुनहगारों को सज़ा दिलाने की मांग को लेकर यह कार्यक्रम आयोजित किया गया।

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1 Nov demo at Supreme Court
LRS president addressing the rally

लोक राज संगठन, जमात ए इस्लामी हिन्द, पापुलर फ्रंट ऑफ इंडिया, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी, सिख फोरम, युनाइटेड मुस्लिम फ्रंट, सीपीआई (माले) न्यू प्रोलेतेरियन, सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया), सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया, एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स, एस.ए.एच.आर.डी.सी., मज़दूर एकता कमेटी, वेलफेयर पार्टी ऑफ इंडिया, सिटीजन्स फॉर डेमोक्रेसी, आॅल इंडिया मुस्लिम मजलिस ए मुशावरत (दिल्ली राज्य), पुरोगामी महिला संगठन, साइंटिफिक सोशलिज्म जर्नल, हिन्द नौजवान एकता सभा, एन.सी.एच.आर.ओ. और स्टूडेंट्स इस्लामिक आर्गेनाईजेशन इस कार्यक्रम के आयोजक थे।

प्रदर्शनकारियों ने सुप्रीम कोर्ट से संसद तक प्रदर्शन करने की योजना बनाई थी, परन्तु दिल्ली पुलिस ने उन्हें सुप्रीम कोर्ट के सामने ही रोक दिया। उसके बाद, पुलिस की निषेधाज्ञा का उल्लंघन करते हुए, उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के ठीक सामने ही एक जोशीली जनसभा आयोजित की, जिसे सभी सहभागी संगठनों के वक्ताओं ने संबोधित किया।

सुप्रीम कोर्ट परिसर में चारों तरफ सहभागी संगठनों के बैनर लगे थे तथा कई और बैनर लगे थे, जिन पर इस प्रकार के नारे लिखे हुए थे: “नवम्बर 1984 में राज्य द्वारा आयोजित सिखों का जनसंहार मुर्दाबाद!”, “राजकीय आतंकवाद मुर्दाबाद!”, “राजकीय आतंकवाद को खत्म करने के लिए एकजुट हो जाएं!”, “1984 के जनसंहार के गुनहगारों को सज़ा दो!”, इत्यादि।

रैली को संबोधित करते हुए, लोक राज संगठन के अध्यक्ष एस. राघवन ने हिन्दोस्तानी राज्य की साम्प्रदायिक बुनियादों का खुलासा किया। 1984 में सिखों के कत्लेआम, 1992-93 में बाबरी मस्जिद के विध्वंस और 2002 में गुजरात में मुसलमानों के कत्लेआम के उदाहरण देते हुए, उन्होंने समझाया कि 1857 से लेकर आज तक, “बांटो और राज करो” की नीति अपनाई जा रही है, ताकि हमारी एकता तोड़ी जाए और अत्याचार व नाइंसाफी के खिलाफ़ हमारे संघर्ष को कुचल दिया जाए। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि एक ऐसा समाज बनाने के लिए काम करें, जिसमें लोग राज्य सत्ता में होंगे और सभी के अधिकार सुनिश्चित होंगे।

सिख फोरम के महासचिव प्रताप सिंह, एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स से मुश्फिक खान, जमात ए इस्लामी हिन्द के महासचिव सलीम इंजीनियर, सिटीजन्स फॉर डेमोक्रेसी से डा. एन.डी. पंचोली, यूनाइटेड मुस्लिम फ्रंट के अध्यक्ष अधिवक्ता शाहिद अली, सीपीआई (माले) न्यू प्रोलेतेरियन से कामरेड शियोमंगल सिद्धान्तकर और हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के प्रवक्ता कामरेड प्रकाश राव ने भी रैली को संबोधित किया।

सभी वक्ताओं ने राज्य को सांप्रदायिक और आतंकवादी ठहराते हुए उसकी जमकर आलोचना की। यह राज्य नियमित तौर पर, लोगों की एकता को तोड़ने के लिए सांप्रदायिक हिंसा आयोजित करता है। 1984 का जनसंहार, दूसरे सभी सांप्रदायिक जनसंहारों की तरह, राज्य द्वारा आयोजित किया गया था। राज्य की पूरी मशीनरी ने कातिलाना गिरोहों को मदद दी थी। बड़े कार्पोरेट घरानों की अगुवाई में मीडिया लगातार सांप्रदायिक जहर उगलती रहती है।

खास तौर पर, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के प्रवक्ता प्रकाश राव ने विस्तार से समझाया कि हिन्दोस्तान में 150 पूंजीवादी घरानों का राज है, जो लोगों को लूट कर, बांट कर और खूनी सांप्रदायिक हिंसा आयोजित करके, अपना राज चलाते हैं। प्रमुख राजनीतिक पार्टियां, कांग्रेस और भाजपा दोनों ही पूंजीवादी घरानों के इस कार्यक्रम को लागू करने के दोषी हैं। इस देश में लोगों के पास, वोट देने के सिवाय कोई और अधिकार नहीं है। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि एक झंडे तले एकजुट हो जाएं और अपने हाथों में राज्य सत्ता लेने के संघर्ष को आगे बढायें।

“राजकीय आतंकवाद और राज्य द्वारा आयोजित सांप्रदायिक हिंसा मुर्दाबाद!”, नवम्बर 1984 के गुनहगारों को सज़ा दो!”, “इंक़लाब जिंदाबाद!”, इन नारों के साथ रैली समाप्त हुयी।

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पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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