7वें वेतन आयोग को लेकर राजस्थान राज्य कर्मचारियों के प्रदर्शन

Submitted by cgpiadmin on गुरु, 16/11/2017 - 21:30

10 नवम्बर, 2017 को राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में काम करने वाले राज्य कर्मचारियों ने सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को सही तरीके से लागू न करने के विरोध में, अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति की अगुवाई में विभिन्न जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन किये और मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपे।

कर्मचारियों के ज्ञापन में दी गई उनकी मांगें हैं :

  1. सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें केन्द्र सरकार के अनुरूप 1 जनवरी, 2016 से शीघ्र लागू की जायें तथा समस्त परिलाभ देते हुए ऐरियर का नकद भुगतान किया जाये।
  2. राज्य सरकार की अधिसूचना दिनांक 30 अक्तूबर, 2017 द्वारा अनुसूची-5 में किये गये संशोधनों (मूल वेतन कटौती) को निरस्त कर वित्त विभाग द्वारा पूर्व में जारी अधिसूचना दिनांक 28 जून, 2013 के अनुसूची-5 में ग्रेड-पे के अनुसार निर्धारित मूल वेतन के आधार पर ही (मूल वेतन) देते हुए निर्धारित की जाये।
  3. सातवें वेतन आयोग के संबंध में जारी अधिसूचना में स्वीकृत पे मेट्रिक्स में शीघ्र संशोधन करके केन्द्र सरकार द्वारा जारी पे मेट्रिक्स के समान किया जाये।
  4. सुराज संकल्प पत्र-2013 में कर्मचारी कल्याण के लिये की गई घोषणाओं की क्रियान्विति में सभी अधीनस्थ, मंत्रालयिक एवं अन्य संवर्गो की वेतन विसंगतियों को दूर किया जाये तथा रिक्त पदों को भरते हुये राज्य सरकार के अधीन अस्थाई, संविदा, मानदेय के अंतर्गत कार्यरत कर्मचारियों को नियमित किया जाये एवं समस्त चुनावी वायदे पूरे किये जायें।
  5. वर्ष 2004 के बाद नियुक्त राज्य कर्मचारियों के लिये नई पेंशन योजना के स्थान पर शीघ्र पुरानी पेंशन योजना लागू की जाये।
  6. न्यायालयों द्वारा कर्मचारियों के हित में दिये गये समस्त निर्णयों का पालन सुनिश्चित किया जाये।
  7. राज्य में पी.पी.पी., ठेकाप्रथा, निजीकरण, विभागों का आकार घटाना एवं पदों की कटौती बंद की जाये।
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पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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