काम की बेहतर हालतों की मांगों के लिये ईस्ट कोस्ट रेलवे के गार्डों की एकजुटता

आल इंडिया गाड्र्स कौंसिल (ए.आई.जी.सी.) के सर्व हिन्द सचिव कॉमरेड ए.के. श्रीवास्तव की अगुवाई में केंद्रीय कार्यालय के पदाधिकारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने 30 नवंबर से 8 दिसंबर के बीच ईस्ट कोस्ट रेलवे की यात्रा की। काम की हालतों को बेहतर करने के लिए सभी गार्डों की एकता को मजबूत करना, इस यात्रा का मकसद था। ईस्ट कोस्ट रेलवे ओड़िशा और आंध्र प्रदेश के तटवर्ती इलाकों में चलाया जाता है। इस यात्रा के दौरान ए.आई.जी.सी. के प्रतिनिधिमंडल ने इस इलाके के कई जंक्शनों का दौरा किया, जिनमें शामिल हैं - संबलपुर, तालचेर, पारादीप, खुर्दा रोड, पुरी, विशाखापट्टनम, इत्यादि। इस यात्रा के बारे में, मज़दूर एकता लहर के संवाददाता ने कामरेड श्रीवास्तव से वार्तालाप किया। यहां हम उस वार्तालाप के दौरान मिली जानकारी पर एक संक्षिप्त रिपोर्ट पेश कर रहे हैं।

उनकी इस यात्रा के दौरान गार्डों की काम की हालतों को लेकर कई चैकाने वाली हकीक़तें सामने आईं। इस बात का खुलासा हुआ कि कमर्शियल मैनुअल में दिये गये मानदंडों को खुल्लम-खुल्ला नज़र अंदाज़ किया जा रहा है और कोयला और लौह अयस्कों सहित दूसरे हानिकारण पदार्थों के कणों का गार्डों के शरीर में जाने का बहुत ख़तरा है। सांस के ज़रिये ये पदार्थ भारी मात्रा में शरीर के अंदर जाने के कारण एक मालगाड़ी के गार्ड का चेहरा विकृत हो गया है।

मानदंडों के इस तरह के उल्लंघनों के लिये सरकारी व निजी क्षेत्र के सबसे बड़े निगम ज़िम्मेदार हैं।

उदाहरण के लिए पारादीप एक बन्दरगाह शहर है और इसके आसपास सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की कई बड़ी कंपनियां लगाई गयी हैं, जैसे इफ्को (इंडियन फार्मर्स एंड फर्टिलाइज़र कोआपरेटिव लिमिटेड), एस्सार स्टील, पारादीप फॉस्फेट लिमिटेड। इन सभी बड़ी कंपनियों की अपनी रेल सेवायें हैं जो प्लांट के भीतर काम करती हैं और बाहर ये सेवायें भारतीय रेल के साथ जुड़ी हुई हैं, जिससे कच्चा माल अन्दर लाया जाता है और उत्पादित की गयी वस्तुओं को बाहर ले जाया जाता है। इनमें कोयला, लौह अयस्क और रासायनिक खाद शामिल हैं।

गार्ड और इंजन ड्राईवर काम के अवकाश के समय आराम करने के लिए रनिंग रूम का इस्तेमाल करते हैं। पुरी में एक ऐतिहासिक जगन्नाथ मंदिर है जो दुनियाभर में मशहूर है और हर साल लाखों लोग यहां आते हैं। इसी शहर में एक रेस्ट रूम है, जो कि स्टेशन से एक किलोमीटर की दूरी पर है। इस रेस्ट रूम तक पहुंचने के लिए गार्डों और इंजन ड्राईवरों को कई रेल लाइनों को पार करके गुजरना पड़ता है। इस स्टेशन पर रेलगाड़ियों की आवाजाही बहुत होती है और यह बेहद ख़तरनाक है, क्योंकि वे पहले से ही दिन-रात के काम से थके होते हैं। दरअसल कानून के मुताबिक बिना लिखित इजाज़त के रेलवे लाइन लांघना गैर-कानूनी है। लेकिन यहां तो रेल अधिकारी ही गार्डों और इंजन ड्राईवरों को रेल लाइन लांघने के लिए मजबूर कर रहे हैं और उनकी जान जोखिम में डाल रहे हैं।

कामरेड श्रीवास्तव ने मज़दूर एकता लहर के संवाददाता को बताया कि उन्होंने वहां के सभी गार्डों से आह्वान किया कि केवल उनका एकजुट संघर्ष ही रेल अधिकारियों के इस भ्रष्टाचार को खत्म कर सकता है। उन्होंने ईस्ट कोस्ट रेलवे के सभी गार्डों से अपील की कि वे अपनी इन समस्याओं और अन्य मांगों के समाधान के लिए ए.आई.जी.सी. के साथ मिलकर अपने संघर्ष को तेज़ करें।

ए.आई.जी.सी. के प्रतिनिधिमंडल की इस यात्रा के दौरान हुई सभाओं में सैकड़ों गार्ड शामिल हुए और उन्होंने अपनी सदस्यता का नवीकरण किया। साथ ही कई नए सदस्यों ने भी अपना नामांकन कराया। उन्होंने अपने एकजुट संघर्ष के द्वारा अधिकारियों को अपने काम की हालतों को बेहतर बनाने के लिए मजबूर करने का भी संकल्प लिया।

मज़दूर एकता लहर ए.आई.जी.सी. की सभी मांगों का पूरा समर्थन करती है और भारतीय रेल से यह मांग करती है कि रेलवे गार्डों की सुख और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तुरंत सभी ज़रूरी कदम उठाये।

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ईस्ट कोस्ट रेलवे    गैर-कानूनी    Feb 1-15 2018    Struggle for Rights    Rights     2018   

पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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