जनता के बीच जाने से रेल मज़दूरों को और मजबूती मिलेगी

संपादक महोदय,

मैंने आपके वेब संस्करण में रेलवे के गार्डों की परिस्थिति के बारे में दो लेख पढ़े। इसमें कोई शक नहीं है कि उनकी मांगें न केवल उनके हित में हैं बल्कि यात्रियों व आम लोगों के हितों में भी हैं। परन्तु ऐसे महत्वपूर्ण मुद्दों के बारे में जानकारी सिर्फ मज़दूर एकता लहर जैसे मेहनतकश-हितैषी मीडिया के ज़रिये ही मिलती है। दूसरी तरफ, जब मेहनतकश लोग जब अपना संघर्ष करते हैं तब बड़े पूंजीपतियों के नियंत्रण का मीडिया उन पर सिर्फ हमले करता है। उसकी पूरी कोशिश होती है कि संघर्षों को लोगों से अलग किया जाये। यहां तक कि वे संघर्षरत मज़दूरों के ख़िलाफ़ लोगों को भड़काते हैं और ऐसा करने में अधिकतर सफल भी हो जाते हैं। उदाहरण के लिये, लगातार व्यापक पूंजीवादी प्रचार के कारण लोग ऐसा सोचने लगते हैं कि “सार्वजनिक क्षेत्र के मज़दूर कामचोर हैं”। अतः यह ज़रूरी है कि मेहनतकशों के लड़ाकू संगठन लोगों के बीच अपना प्रचार लेकर जायें। उन्हें लोगों के बीच सभाएं करनी चाहियें।

गार्डों के बारे में ही देखिये -

अधिकांश लोगों को गार्डों की अत्याधिक महत्वपूर्ण भूमिका के बारे में पता ही नहीं होता। अगर गार्डों की यूनियनें लोगों के बीच अपना प्रचार ले जाती हैं तो उन्हें लोगों का समर्थन मिलेगा और सरकार को उनकी मांगों को मानने के लिये मजबूर होना पड़ेगा। कुछ महीनों पहले मैं मुंबई में एक जनसभा में गया था जिसमें यात्री संगठनों व रेलवे की कुछ यूनियनों ने रेलवे में हो रही दुर्घटनाओं के कारणों पर चर्चा की थी। जो जानकारी वहां दी गयी थी उसने यात्री संगठनों की आंखें खोल दीं। यात्री संगठनों ने उन्हें आश्वासन दिया कि मज़दूरों के रिक्त पदों को भरने की मांग का वे समर्थन करेंगे।

मैं अपना सुझाव आपके माध्यम से रेलवे मज़दूरों तक पहुंचाना चाहता हूं।

भवदीय,

अमित, मुंबई

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पूंजीवादी प्रचार    दुर्घटनाओं    Feb 1-15 2018    Letters to Editor    Privatisation    Rights     2018   

पार्टी के दस्तावेज

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इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


पी.डी.एफ. डाउनलोड करनें के लिये चित्र पर क्लिक करें

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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