एक और कठोर कानून लागू करने की यूपी सरकार की कोशिश!

उत्तर प्रदेश सरकार एक नए कठोर कानून, ‘उत्तर प्रदेश संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम’ (यू.पी.सी.ओ.सी.ए.) को लाने के लिए अपनी पूरी ताक़त लगा रही है। राज्य सरकार ने 2017 के दिसंबर सत्र में यह बिल विधानसभा में पेश किया और बिना किसी बहस के केवल ध्वनि मत से पारित कर दिया। यदि यह बिल विधान परिषद द्वारा पारित कर दिया गया, तो वह राष्ट्रपति के पास स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा। जिस तरह से यूपी सरकार ने इस बिल को पारित करने तथा उसे आगे बढ़ाने में जल्दबाजी की है, उससे यह साफ दिखाई देता है कि यूपी सरकार इस बिल पर किसी भी तरह की चर्चा नहीं चाहती।

इस बिल में कई प्रावधान हैं, जिनके तहत बिना किसी सुनवाई के ही लंबे समय तक जेल में रखना, रिहाई के आदेश के बाद भी जेल की सज़ा को बढ़ाया जाना, पुलिस रिमांड में बढ़ोतरी करके अग्रिम जमानत की अर्जी को ठुकराना। इस कानून के तहत, किसी अन्य मामले में पहले से ही दोषी व्यक्ति की सज़ा के विस्तार के लिए भी एक प्रावधान है। ये सभी प्रावधान पुलिस और जेल अधिकारियों को मानवाधिकारों के उल्लंघन के अनेक अवसर देते हैं।

विभिन्न सरकारों ने ऐसे कानूनों को सही ठहराते हुए कहा है कि “आपराधिक”, “राष्ट्र-विरोधी”, “आतंकवादी” गतिविधियों आदि को रोकने के लिए ये कानून आवश्यक हैं। दरअसल, ऐसे कानूनों का उपयोग हमेशा लोगों के संघर्षों को कुचलने के लिए किया जाता है। हमें इस तरह के सभी कदमों के ख़िलाफ़ एकजुट होना चाहिए, चाहे हम किसी भी पक्ष या पार्टी के हों। हमें लोगों के मानव अधिकारों और राजनीतिक अधिकारों की रक्षा में खड़े होना होगा।

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कठोर कानून    मानवाधिकारों    Feb 1-15 2018    Struggle for Rights    Rights     2018   

पार्टी के दस्तावेज

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इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


पी.डी.एफ. डाउनलोड करनें के लिये चित्र पर क्लिक करें

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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