देशभर के मज़दूरों ने अपनी मांगों को लेकर किया आंदोलन

trade union Satyagraha
दिल्ली की ट्रेड यूनियनें संसद मार्ग पर जुलूस निकालते हुये

30 जनवरी, 2018 को देशभर के करोड़ों मज़दूरों ने अपनी 12 सूत्रीय मांगों के समर्थन में देश के जिले-जिले में प्रदर्शन किये और गिरफ्तारियां दीं।

केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच ने 30 जनवरी को देशव्यापी ‘सत्याग्रह’ के तहत जेल भरो आंदोलन करने का आह्वान किया था। इस देशव्यापी ‘सत्याग्रह’ का फैसला 9,10 और 11 नवम्बर, 2017 को संसद के समक्ष हुये मज़दूरों के महापड़ाव में किया गया था।

देशव्यापी स्तर पर न्यूनतम वेतन 18,000 रुपये लागू करने व उसे महंगाई के साथ जोड़ने, सार्वजनिक संपत्तियों/उपक्रमों के निजीकरण पर रोक लगाने, 3000 रुपये मासिक पेंशन लागू करने, सभी मज़दूरों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने, ठेकाप्रथा पर रोक लगाने व समान काम का समान वेतन देने, श्रम कानूनों में मज़दूरों के हक़ों के खि़लाफ़ सुधार करने पर रोक लगाने, 45 दिन के अंदर ट्रेड यूनियन का पंजीकरण अनिवार्य करने, रेलवे, रक्षा और बीमा में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश पर रोक लगाने, महंगाई पर रोक लगाने इत्यादि 12 सूत्री मांगों को लेकर, देशभर की ट्रेड यूनियनें बीते कई सालों से लगातार संघर्ष कर रही हैं।

पूरे देश से प्राप्त जानकारी के अनुसार, जनवरी के अंतिम तीन दिनों के अंदर, अलग-अलग राज्यों की राजधानियों सहित राज्यों के अलग-अलग जिलों में ट्रेड यूनियनों ने संयुक्त रूप से प्रदर्शन किये और गिरफ्तारियां दीं।

दिल्ली की तमाम ट्रेड यूनियनों ने 30 जनवरी को नई दिल्ली के संसद मार्ग पर स्थित बैंक ऑफ बड़ोदा से लेकर संसद मार्ग थाने तक प्रदर्शन किया और अपनी गिरफ्तारी दी। जिसमें अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों के मज़दूर शामिल हुए।

सभी मज़दूर बैंक ऑफ बड़ोदा के सामने एकत्रित हुए। मज़दूर अपने-अपने हाथों में मांगों की तख्तियां लिए, जोशभरे नारे लगाते हुए संसद की ओर बढ़े, लेकिन संसद मार्ग थाने के पास पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए मज़दूर एकता कमेटी के वक्ता कामरेड संतोष ने कहा कि आज पूरे देश में मज़दूर-विरोधी, किसान-विरोधी और राष्ट्र-विरोधी नीतियों के खिलाफ़ सभी ट्रेड यूनियनें मिलकर सत्याग्रह कर रही हैं। मोदी सरकार उन्हीं नीतियों को लागू कर रही है जिनको कांग्रेस पार्टी ने 1990 के बाद लागू किया था। पूंजीपति अपनी सत्ता को चलाने के लिये वक्त-वक्त पर और नये-नये नारों के साथ, पार्टियां बदलते रहते हैं, कभी कांग्रेस पार्टी की जगह पर भाजपा या किसी और पार्टी को लाते हैं। मोदी की सरकार जैसे-जैसे बदनाम हो रही है वैसे-वैसे उसके विकल्प के रूप में पूंजीपति कांग्रेस पार्टी को तैयार कर रहे हैं। हमारे न्यायालय, संविधान, संसद, पुलिस, फौज आदि राज्य के तंत्र हैं, जो पूंजीपति वर्ग की सत्ता को बरकरार रखते हैं। अंत में उन्होंने सभी मज़दूरों से आह्वान किया कि पार्टियां बदलने से मज़दूरों-किसानों की मुक्ति नहीं होगी। 150 इजारेदार पूंजीपतियों के वर्तमान राज्य को ख़त्म करके नये राज्य का निर्माण करना होगा, जिसकी अगुवाई इस देश के मज़दूर-किसान करेंगे। जो राज्य मज़दूरों किसानों की सुख-सुरक्षा को सुनिश्चित करेगा।

प्रदर्शनकारियों को संबोधित करने वालों में थे - एटक से कामरेड अमरजीत कौर, सीटू से कामरेड तपन सेन, ए.आई.सी.सी.टी.यू. से कामरेड संतोष राय, इंटक से सुनील, ए.आई.यू.टी.यू.सी. से कामरेड आर.के. शर्मा, हिन्द मज़दूर सभा से कामरेड राजेन्द्र सिंह, यू.टी.यू.सी. से कामरेड मोन्टू और आई.सी.टी.यू. से कामरेड नरेन्द्र ने संबोधित किया।

प्राप्त रिपोर्टों के अनुसार पूरे हरियाणा के अलग-अलग जिलों में, सर्व कर्मचारी संघ सहित अन्य दर्जनों कर्मचारियों की यूनियनों ने संयुक्त रूप से जेल भरो आंदोलन चलाया और गिरफ्तारियां दीं।

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पार्टी के दस्तावेज

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इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
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गोष्ठी में पेश किया था।


पी.डी.एफ. डाउनलोड करनें के लिये चित्र पर क्लिक करें

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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