महाराष्ट्र के आंगनवाड़ी मज़दूर बहुत क्रोधित हैं

महाराष्ट्र के आंगनवाड़ी मज़दूर बहुत ही क्रोधित हैं क्योंकि जिन वायदों को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने उनसे किया था, उन्हें निभाया नहीं जा रहा है। महाराष्ट्र के आंगनवाड़ी कर्मचारी पूरी ज़िम्मेदारी के साथ 97000 आंगनवाड़ी केंद्रों को चलाते हैं, जहां 73 लाख से भी ज्यादा बच्चों को भोजन उपलब्ध करवाया जाता है। आंगनवाड़ी केंद्र हिन्दोस्तान के गांवों में बुनियादी स्वास्थ्य देखभाल सेवायें प्रदान करते हैं। इनमें शामिल हैं परिवार नियोजन संबंधी परामर्श व गर्भ निरोधक सामग्रियों की आपूर्ति, पोषक तत्वों के बारे में जानकारी देना और उपलब्ध कराना, साथ ही साथ विद्यालय पूर्व शैक्षिक गतिविधियां। इन केंद्रों को जलजनित बिमारियों की रोकथाम के लिये वितरित होने वाले इलेक्ट्रोल पाउडर, बुनियादी दवाओं और गर्भ निरोधकों के लिए भंडार केंद्र के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है। यही कारण है कि ये केन्द्र सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था के बहुत ही अल्प परन्तु महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

जैसा कि मज़दूर एकता लहर के अक्तूबर 2017 के अंक में यह रिपोर्ट किया गया था कि देशभर के 2 लाख से अधिक आंगनवाड़ी मज़दूर सितम्बर 2017 में हड़ताल पर चले गए थे। उनकी यह मांग थी कि उन्हें इंसानों की तरह जीने का हक़ होना चाहिए तथा उनको सरकारी कर्मचारियों का दर्ज़ा दिया जाना चाहिये। सितम्बर 2017 की हड़ताल के बाद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने उनसे यह वादा किया था कि वे अप्रैल 2018 से उनके वेतनों में 5 प्रतिशत की वृद्धि करेंगे और यह बढ़ोतरी अक्तूबर 2017 में 1500 रुपये की वृद्धि की घोषणा के अतिरिक्त होगी। लेकिन आंगनवाड़ी मज़दूरों को अभी भी उनके वेतनों में 1500 रुपये की वृद्धि नहीं दी गयी है जबकि चार महीने बीत चुके हैं। कई स्थानों पर आंगनवाड़ी मज़दूरों को जनवरी 2018 का वेतन 16 फरवरी, 2018 तक नहीं मिला था।।

प्राप्त खबरों से यह पता चला है कि आंगनवाड़ी मज़दूरों के लिये वेतन वृद्धि, जो कि अप्रैल 2018 से उन्हें देने का वायदा किया गया था, उसका बजट में कोई भी प्रावधान नहीं किया गया है। महाराष्ट्र की सरकार यह दावा करके आंगनवाड़ी केंद्रों की संख्या में कटौती करना चाहती है कि वे प्रबंधन के लिए बहुत ही छोटे हैं। संघर्ष कर रहे कर्मचारियों से महाराष्ट्र की सरकार स्पष्ट कह रही है कि “यदि वेतन वृद्धि के लिए संघर्ष करोगे तो हम तुम्हारी संख्या कम करेंगे”। मज़दूर एकता लहर महाराष्ट्र की सरकार के इस अनुचित व्यवहार की निंदा करती है और आंगनवाड़ी मज़दूरों और संगठनों के प्रति अपना समर्थन देती है जिन्होंने अपनी लड़ाई की शुरुआत फिर से करने का निर्णय लिया है।

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आंगनवाड़ी    शैक्षिक    Mar 1-15 2018    Struggle for Rights    Privatisation    Rights     2018   

पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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