एक ऐतिहासिक पहल की 25वीं सालगिरह पर मीटिंग : लोगों के हाथों में संप्रभुता लाने के लिए संघर्ष को आगे बढ़ायें!

हमारी पार्टी के इतिहास और देश में वर्ग संघर्ष के इतिहास में इस महत्वपूर्ण मीलपत्थर की 25वीं वर्षगांठ के अवसर पर, कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी ने, 18 फरवरी को नयी दिल्ली में एक सभा आयोजित की थी। पार्टी के सदस्यों और कार्यकर्ताओं - जिनमें से कुछ सदस्यों ने 25 वर्ष पहले उस विरोध प्रदर्शन को आयोजित करने और अगुवाई देने में सक्रिय भूमिका निभायी थी - और उसके बाद पार्टी के साथ जुड़ने वाली अनेक जवान महिलाओं और पुरुषों ने बहुत ही जोश के साथ सभा में भाग लिया।

पच्चीस वर्ष पहले, 22 फरवरी, 1993 को हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की पहल पर, दिल्ली के फिरोजशाह कोटला पर एक ऐतिहासिक विरोध प्रदर्शन हुआ था।

LRS formation

सभा के दौरान नौजवान सामूहिक चर्चा में भाग लेते हुये

उससे ढाई महीने पहले, 6 दिसंबर, 1992 को कांग्रेस पार्टी और भाजपा ने बाबरी मस्जिद के विध्वंस को आयोजित करने में सांठगांठ की थी। उसके बाद कुछ हफ्तों तक, कांग्रेस पार्टी और भाजपा ने खूब सांप्रदायिक नफ़रत भड़काई और पूरे देश में सांप्रदायिक खून-खराबा फैलाया।

दिल्ली में उस समय लागू निषेधाज्ञा को चुनौती देते हुए, हमारी पार्टी के सदस्यों और कार्यकर्ताओं ने, मज़दूर आन्दोलन, महिला आन्दोलन और मानव अधिकार आन्दोलन के कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर, एक पुण्य शपथ ली थी - ठीक उसी स्थल पर, जहां शहीद भगत सिंह और उनके साथियों ने देश को उपनिवेशवादी शासन और सभी प्रकार के शोषण से मुक्त कराने के उद्देश्य के साथ हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन का गठन किया था। हमने शपथ ली थी कि :

“एक ऐसे हिन्दोस्तान को बनाने के लिए संघर्ष को आगे बढ़ाएंगे, जिसमें हर नागरिक को जीने, काम करने और अपने श्रम के फलों का आनंद लेने का अधिकार सुनिश्चित होगा, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा पाने, अपनी नैतिकता और विचारों का पालन करने व उनके अनुसार काम करने का अधिकार सुनिश्चित होगा; एक ऐसा हिन्दोस्तान जिसमें जाति, लिंग, धर्म या वर्ग के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होगा, एक ऐसा हिन्दोस्तान जिसमें सभी नागरिकों के जीवन और खुशहाली को सुरक्षित रखना शासकों का फर्ज़ होगा;

जो ताक़तें अपने तंग, खुदगर्ज़ हितों की खातिर, हमारे समाज में ज़हर घोल रही हैं और उसे नष्ट कर रही हैं, उनका विरोध करने और उन्हें मिटा देने के लिये, हिन्दोस्तानी लोगों की एकता और संकल्प को मजबूत करेंगे;

जब तक हमारे पूर्वजों की आकांक्षायें पूरी नहीं होतीं, तब तक संघर्ष को जारी रखना”।

सभा की शुरुआत में कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के प्रवक्ता, कामरेड प्रकाश राव ने उस ऐतिहासिक घटना के महत्व तथा आज हमारे सामने चुनौतियों के विषय पर अपनी बातें रखीं।

हमारी पार्टी अपनी उस शपथ के प्रति वफादार रही है, इस बात पर फक्र महसूस करते हुए, कामरेड प्रकाश राव ने कहा कि हमारी जनता और समाज की समस्याएं आज भी हल नहीं हुयी हैं। बल्कि, ये समस्याएं बद से बदतर होती जा रही हैं। परन्तु उस विरोध प्रदर्शन में हमने आगे बढ़ने का जो रास्ता बताया था, आज भी वही रास्ता है एक ऐसा हिन्दोस्तान बनाने का, जिसमें सबकी सुख और सुरक्षा सुनिश्चित होगी और जनता के जीवन व खुशहाली की सुरक्षा करना हुक्मरानों का फर्ज़ होगा। 

उस समय की परिस्थिति का वर्णन करते हुए, कामरेड प्रकाश राव ने याद दिलाया कि 22 फरवरी, 1993 को संसद का बजट सत्र शुरू होने वाला था। हजारों बेकसूर लोगों के खून से रंगे हुए हाथों के साथ, कांग्रेस पार्टी और भाजपा 1991 में शुरू किये गए उदारीकरण और भूमंडलीकरण के मज़दूर-विरोधी, किसान-विरोधी, राष्ट्र- विरोधी और समाज-विरोधी कार्यक्रम को लागू करने जा रही थीं। विश्व स्तर पर, एक अहम परिवर्तन हुआ था। सोवियत संघ का विघटन हुआ था और दुनिया का दो ध्रुवों में बंटवारा ख़त्म हुआ था। अमरीका की अगुवाई में साम्राज्यवादी ताक़तों ने बड़ी हेकड़बाजी के साथ ऐलान किया था कि पूंजीवाद का कोई विकल्प नहीं है, “बाज़ार उन्मुख अर्थव्यवस्था” का कोई विकल्प नहीं है, बहुपार्टीवादी प्रतिनिधित्ववादी लोकतंत्र का कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने यह मांग की कि हरेक देश को इन व्यवस्थाओं का पालन करना होगा, वरना उनके साथ बुरा अंजाम होगा। अंतर्राष्ट्रीय पूंजीपति वर्ग के इस समाज-विरोधी हमले के साथ-साथ शासन के फासीवादी तरीके अपनाए गए और नाजायज़ जंग भी फैलाए गए।

भाजपा और कांग्रेस पार्टी, दोनों ने उस समय राजनीतिक सभाओं पर लगाई गयी पाबंदियों का समर्थन किया था। उस तनावपूर्ण स्थिति में हमारी पार्टी ने 22 फरवरी, 1993 के बहादुर राजनीतिक कार्यक्रम को आयोजित किया। हमने “सभी ज़मीर वाली महिलाओं और पुरुषों को एक अपील” जारी की, जिसमें हमने संसद में पारित किये जा रहे जन-विरोधी आर्थिक कदमों को फौरन रोकने की मांग की। अपील में हमने मांग की कि बाबरी मस्जिद का विध्वंस कराने वाले सभी गुनहगारों को पकड़ कर सज़ा दी जाये, चाहे वे कितने ही ऊंचे पद पर हों।

कामरेड प्रकाश राव ने अपील के कुछ अंशों को पढ़कर सुनाया, जिनमें पार्टी ने लोगों को सत्ता में लाने के लिए ज़रूरी कदमों का विस्तारपूर्वक विवरण किया था।

“प्रशासन, न्यायपालिका और सुरक्षा बलों के सभी उपकरणों और स्तरों को सबसे पहले जनता के प्रति जवाबदेह होना चाहिए, किसी राजनीतिक पार्टी या उसके हाई कमान के प्रति नहीं। जनता को चुने गए प्रतिनिधियों और सरकारी अफ़सरों को वापस बुलाने का अधिकार होना चाहिए।

“हिन्दोस्तान के संविधान को फिर से लिखा जाना चाहिए, और उसमें नागरिकों के अल्लंघनीय अधिकारों व फर्ज़ों की परिभाषा दी जानी चाहिए। इन अल्लंघनीय अधिकारों में शामिल हैं जीवन और आज़ादी के अधिकार, ज़मीर का अधिकार, समानता का अधिकार, रोज़ी-रोटी, स्कूली शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा के अधिकार। हर नागरिक को यह मांगने का हक़ होना चाहिए कि राज्य उसके इन अधिकारों को सुनिश्चित करे। राज्य को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हर नागरिक को ये सभी अधिकार प्राप्त हों, चाहे उसका कोई भी सामाजिक या आर्थिक दर्ज़ा हो।

“हिन्दोस्तान के संविधान को हिन्दोस्तान के अन्दर रहने वाली राष्ट्रीयताओं और आदिवासी लोगों के लोकतान्त्रिक अधिकारों, अपने अलंघनीय राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक अधिकारों समेत उनके अपने मामलों का प्रशासन करने के अधिकार को मान्यता देनी होगी। सभी लोगों की सहमति के साथ, हिन्दोस्तानी संघ को स्वेच्छा के आधार पर पुनर्गठित करना होगा।

नए लोकतान्त्रिक संविधान को लिखने में सभी लोगों को अवश्य ही शामिल करना चाहिए। इससे संविधान और राज्य के ढांचे का लोकतांत्रिक रूप व सार, दोनों सुनिश्चित होंगे। जनता और जन संगठनों के चुने गये प्रतिनिधियों को नई संविधान सभा का गठन करना होगा, जो इन विषयों पर वाद-विवाद करके फैसले लेगी।”

उस जन प्रदर्शन और अपील ने हिन्दोस्तान के ज़मीर को झकझोर दिया, कामरेड प्रकाश राव ने कहा। राजनीतिक महत्व रखने वाले नागरिकों, शिक्षकों, छात्रों, सेवानिवृत्त जजों और भूतपूर्व सरकारी कार्यकर्ताओं ने बड़ी संख्या में आगे आकर, 25 वर्ष पहले उस दिन को जारी की गई अपील पर हस्ताक्षर किये। 11 अप्रैल, 1993 को नई दिल्ली में एक जनसभा में कमेटी फॉर पीपल्स एंपावरमेंट की स्थापना हुई।

कमेटी फॉर पीपल्स एंपावरमेंट ने उस संयुक्त अपील में किये गये विश्लेषण को और गहराई तक ले जाते हुये, हिन्दोस्तान और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर, व्यापक पैमाने पर लोगों को उसके इर्द-गिर्द लामबंध किया। मई 1998 को पुणे विश्वविद्यालय में आयोजित एक जनसभा में यह फैसला लिया गया कि देश में लोक राज स्थापित करने के लिये हिन्दोस्तानी लोगों को लामबंध और संगठित करने के उद्देश्य से एक राजनीतिक संगठन स्थापित करने का समय आ गया था। इस तरह लोक राज संगठन का जन्म हुआ।

कामरेड प्रकाश राव ने दो अहम सवालों को उठाया। पहला सवाल था कि सांप्रदायिक हिंसा और राजकीय आतंकवाद, जो आज भी बढ़ती गति और उग्रता के साथ होता रहता है, उसका स्रोत क्या है? दूसरा सवाल था कि कम्युनिस्टों और प्रगतिशील ताक़तों को इसका कैसे मुकाबला करना चाहिये, यानी वह विकल्प क्या होना चाहिये जिसके इर्द-गिर्द हमें लोगों को एकजुट करना होगा?

1980 और 1990 के दशकों की पूरी अवधि से कई उदाहरण देते हुये - जून 1984 में अमृतसर के स्वर्ण मंदिर पर सैनिक हमला, “राष्ट्रीय एकता व क्षेत्रीय अखंडता” की हिफ़ाज़त के नाम पर पंजाब में राजकीय आतंकवाद, इंदिरा गांधी की हत्या और उसके बाद नवम्बर 1984 में राज्य द्वारा आयोजित सिखों का जनसंहार, 1985 में लोक सभा चुनावों के लिये सांप्रदायिक और उग्रराष्ट्रवादी, “हिन्दू, हिन्दी, हिन्दुस्तान!” के नारे के साथ कांग्रेस पार्टी का अभियान, अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिये आंदोलन छेड़ने में कांग्रेस पार्टी और भाजपा की मिलीभगत, ओ.बी.सी. के लिये आरक्षण के पक्ष में व खिलाफ़ आंदोलनों को उन दोनों पार्टियों द्वारा दिया गया गुप्त समर्थन, इत्यादि - कामरेड प्रकाश राव ने दर्शाया कि किस तरह पूरे देश में सांप्रदायिक और गुटवादी आंदोलन फैलाये गये थे, ताकि हुक्मरान इजारेदार पूंजीपति वर्ग उदारीकरण और निजीकरण के ज़रिये भूमंडलीकरण के अपने कार्यक्रम को आसानी से बढ़ावा दे सके। इन सब उदाहरणों से उन्होंने यह निष्कर्ष निकाला कि राजकीय आतंकवाद और सांप्रदायिक हिंसा बड़े सरमायदारों के शासन का पसंदीदा तरीका है, जिसके सहारे वे जनता पर अपनी हुक्मशाही को थोपते हैं, लोगों का ध्यान भटकाकर उन्हें बांटते हैं तथा हर प्रकार के जन-विरोध को बलपूर्वक कुचलते हैं। लोग सांप्रदायिक नहीं हैं, उन्होंने इस पर ज़ोर दिया। सांप्रदायिक और फासीवादी आतंक का स्रोत शासक वर्ग और उसका राज्य है। भाजपा और कांग्रेस पार्टी, दोनों ही इस राज्य के हिस्से हैं। न्यायपालिका तथा राज्य के अन्य उपकरण, सभी इजारेदार पूंजीवादी घरानों की अगुवाई में पूंजीपति वर्ग के शासन के हिस्से हैं। हमारी पार्टी द्वारा इस समस्या के स्रोत के सही विश्लेषण की वजह से हम राज्य द्वारा आयोजित सांप्रदायिक हिंसा और राजकीय आतंकवाद के खिलाफ़ संघर्ष को बहादुरी से अगुवाई देने तथा गैर-सामुदायिक और पक्ष-निरपेक्ष तरीके से, विचारधारात्मक भेदभाव को परे रखते हुये, सभी के अधिकारों की हिफ़ाज़त में राजनीतिक एकता बनाने में सक्षम रहे हैं।

दूसरा सवाल यानी वह विकल्प जिसके इर्द-गिर्द हम कम्युनिस्टों को लोगों की एकता बनानी होगी, उसे उठाते हुये कामरेड प्रकाश राव ने समझाया कि वर्तमान व्यवस्था और राजनीतिक प्रक्रिया मुट्ठीभर शोसकों को समाज पर अपनी मनमर्जी थोपने की पूरी ताक़त देती है। जनता को राजनीतिक सत्ता से पूरी तरह बाहर रखा जाता है, उन्होंने समझाया। लोगों के पास चुनाव के लिये अपने उम्मीदवारों का चयन करने, चुने गये प्रतिनिधियों से हिसाब मांगने या जनता के खिलाफ़ काम करने पर उन्हें अपने पदों से हटाने की कोई ताक़त नहीं है। लोगों के पास अपने हितों की हिफ़ाज़त में कानून प्रस्तावित करने का कोई तरीका नहीं है। अतः यह सोचना एक झूठा सपना मात्र है कि वर्तमान राजनीतिक प्रक्रिया के चलते, सांप्रदायिक और फासीवादी आंतक को ख़त्म किया जा सकता है। कम्युनिस्ट आंदोलन में प्रचलित धारा, कि हमें “धर्मनिरपेक्ष हिन्दोस्तानी संविधान” की रक्षा करनी चाहिये, कि हमें “भाजपा के फासीवाद” को हराने के लिये “कम बुरी” कांग्रेस पार्टी के साथ जुड़ जाना चाहिये, इनके ख़तरे के बारे में सभी को सतर्क करते हुये, उन्होंने समझाया कि इससे सांप्रदायिक हमला कम नहीं हुआ है, बल्कि ठीक इसके वितरीत ही हुआ है। इससे वर्तमान राज्य, उसके संविधान और प्रतिनिधित्ववादी लोकतंत्र की राजनीतिक प्रक्रिया के बारे में लोगों में ख़तरनाक भ्रम फैलाये गये हैं।

अगर समस्या का स्रोत पूंजीपति वर्ग का शासन और राज्य का दमनकारी सांप्रदायिक स्वभाव है तो इसका एकमात्र असली विकल्प है एक ऐसे नये राज्य व राजनीतिक प्रक्रिया की स्थापना करना, जिसमें लोग संप्रभु हों। 25 वर्ष पहले हम इस निष्कर्ष पर पहुंचे थे। उसके बाद, जीवन के अनुभव ने बार-बार उस निष्कर्ष की पुष्टि की है। लोक राज ही एकमात्र विकल्प है। अपने हाथों में राजनीतिक सत्ता लेकर, हम अर्थव्यवस्था को एक नई दिशा दिला सकते हैं ताकि सभी की खुशहाली और सुरक्षा सुनिश्चित हो, उन्होंने कहा।

अंत में उन्होंने यह उत्साहजनक आह्वान किया कि हमें हिन्दोस्तान का मालिक बनना होगा। यही वह लक्ष्य है जिससे 1857 से लेकर आज तक, देश के अनगिनत शहीद प्रेरित हुये हैं। आज हमारा काम है उस लक्ष्य को हासिल करने के लिये संघर्ष को आगे बढ़ाना।

कामरेड प्रकाश राव की प्रस्तुति के बाद, सभा में भाग लेने वालों ने अलग-अलग समूहों में बैठकर, भाषण में उठाये गये विषयों पर चर्चा की। पार्टी के अनेक नौजवान सदस्यों को, 25 वर्ष पहले की राजनीतिक परिस्थिति तथा उसके बाद हुई गतिविधियों के विवरण और विश्लेषण से काफी राजनीतिक शिक्षा मिली। अलग-अलग समूहों में चर्चा का मुख्य विषय यह था कि भाजपा और कांग्रेस पार्टी दोनों ही इजारेदार पूंजीपति शासक वर्ग की सेवक हैं, उनके राज्य की मैनेजर हैं। अतः उनमें से किसी एक पर भी सांप्रदायिक हिंसा को खत्म करने या हमारी जनता की खुशहाली और सुरक्षा सुनिश्चित करने का भरोसा नहीं रखा जा सकता है। नौजवान महिलाओं और पुरुषों ने अपने अनुभवों से कई उदाहरण दिये जिनसे यह स्पष्ट होता है कि लोग सांप्रदायिक नहीं हैं बल्कि शासक ही सांप्रदायिक तनाव और हिंसा आयोजित करते हैं। चर्चा में भाग लेने वालों ने लोक राज के विकल्प पर भी बात की और लोक राज स्थापित करने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द लोगों को लामबंध करने की कई रणनीतियां प्रस्तावित कीं।

समूहों में चर्चा के पश्चात, हर समूह के एक सदस्य ने आगे आकर अपने समूह में की गई चर्चाओं का संकलन पेश किया। नौजवानों ने बुनियादी अधिकारों और नागरिक सुविधाओं के अभाव, सरकारी स्कूलों और अस्पतालों की जघन्य स्थिति, आदि की बात की। उन्होंने बेरोज़गारी, काम की जगह पर शोषण और बड़े इजारेदार पूंजीवादी घरानों द्वारा जनता की दौलत की लूट के विरोध में अपना गुस्सा जाहिर किया। उन्होंने राज्य द्वारा आयोजित सांप्रदायिक हिंसा व राजकीय आतंक और महिलाओं पर हमलों के ख़िलाफ़ अपना गुस्सा जाहिर किया। कई नौजवानों ने कहा कि उन्हें इस बात पर फक्र है कि वे ऐसी पार्टी से जुड़े हैं जिसने 25 वर्ष पहले ही वर्तमान व्यवस्था और प्रक्रिया का इतना स्पष्ट विश्लेषण किया था। उन्होंने कहा कि इससे आज वे संघर्ष में आगे बढ़ने को प्रोत्साहित हैं।

सभा के अंत में नौजवानों ने बड़े उत्साह के साथ, अपने स्कूल-कालेजों, सहकर्मियों, परिवार के सदस्यों और मित्रों के बीच जाकर वर्तमान व्यवस्था का पर्दाफश करने और वर्तमान समाज की तमाम समस्याओं के समाधान बतौर लोक राज स्थापित करने के विकल्प के इर्द-गिर्द सबको लामबंध करने का कार्यक्रम बनाया।

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पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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