राज्य और समाजिक व्यवस्था को बदलने में महिलाओं को अगुवाई देनी होगी! पूंजीवाद से समाजवाद का परिवर्तन ही महिला मुक्ति का मार्ग है!

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति का बयान, 1 मार्च, 2018

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 2018 के अवसर पर कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी सभी देशों की संघर्षरत महिलाओं का अभिवादन करती है! यह महिलाओं और मज़दूर वर्ग की संयुक्त ताक़त को दर्शाने का अवसर है। महिला मुक्ति के लिये संघर्ष की समीक्षा करने और इस संघर्ष को आगे बढ़ाने की योजना बनाने का यह एक अवसर है।

दुनियाभर में उदारीकरण, निजीकरण तथा सार्वजनिक व सामाजिक सेवाओं में कटौतियों के खिलाफ़ बढ़ते संघर्ष में महिलाएं अगुवा भूमिका निभा रही हैं। वे राष्ट्रीय अधिकारों के लिये संघर्षों में सक्रिय हैं जिन अधिकारों पर बहुराष्ट्रीय कंपनियों तथा साम्राज्यवादी राज्यों द्वारा हमला हो रहा है। अमरीकी साम्राज्यवाद व उसके सहयोगियों द्वारा किये जा रहे नाज़ायज़ जंग, जिससे बड़े पैमाने पर तबाही हो रही है और लाखों-लाखों शरणार्थी युद्ध के इलाकों से पलायन कर रहे हैं, वे इन युद्धों का विरोध कर रही हैं। वे पूंजीवादी-साम्राज्यवादी राज्यों की नस्लवादी नीतियों का विरोध कर रही हैं।

Massive Farmer Protests In Rajasthan

महिलाएं मांग कर रही हैं कि महिला होने के नाते और इंसान होने के नाते उनके अधिकारों की रक्षा करने की ज़िम्मेदारी राज्य ले। मेहनतकश पुरुषों और नौजवानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर महिलाएं मांग कर रही हैं कि शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा व दूसरी सामाजिक सेवाएं हमारे अधिकार हैं। राज्य को इनकी गारंटी देनी ही होगी।

जबकि हिन्दोस्तान को “दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र” कहा जाता है, यहां महिलाओं और अधिकांश पुरुषों के अधिकारों का रोज़ाना उल्लंघन होता है। प्रसूति के दौरान माताओं की मृत्यु दर यहां दुनियाभर में सबसे ज्यादा है।

राजनीतिक सत्ता मुट्ठीभर शोषकों के हाथों में है, जो अधिकांश महिलाओं और पुरुषों के हितों की बलि चढ़ाकर अपने खुदगर्ज़ हित पूरे करते हैं। अर्थव्यवस्था उत्पादन के साधनों की निजी मालिकी पर आधारित है। अब यह निजी मालिकी इतने कम हाथों में संकेद्रित हो गयी है कि करीब 150 इजारेदार घराने राज्य और पूरी अर्थव्यवस्था पर नियंत्रण रखते हैं तथा समाज की दिशा तय करते हैं।

सामाजिक उत्पादन की पूरी प्रक्रिया मानवीय श्रम के अधिकतम शोषण, छोटे उत्पादकों पर डाका डालकर और प्राकृतिक संसाधनों की लूट के ज़रिये पूंजीवादी इजारेदार घरानों तथा विदेशी निवेशकों का अधिकतम मुनाफ़ा सुनिश्चित करती है। आर्थिक व राजनीतिक व्यवस्था महिलाओं को अपमानित करने और उनके अतिशोषण को जारी रखती है और ऐसा करने से यह फलती-फूलती है। महिलाएं बिना खौफ के सड़कों पर नहीं चल सकती हैं। हर कदम पर उनके खि़लाफ़ भेदभाव होता है और उन्हें नीचा दिखाया जाता है।

सरकारी स्वास्थ्य सेवा योजनाओं की महिला मज़दूर, जिनमें आशा व आंगनवाड़ी कर्मी शामिल हैं, जो अतिशोषण का शिकार हैं और अपने देश में वे हजारों की संख्या में सड़कों पर उतर रही हैं। मज़दूर होने के नाते वे अपने अधिकारों की मांग कर रही हैं। सभी क्षेत्रों में काम करने वाली महिलाएं अपनी काम की जगहों पर सुरक्षा की मांग कर रही हैं। वे मांग कर रही हैं कि जब वे घर और कार्यस्थलों के बीच यात्रा करती हैं तो उनके साथ छेड़छाड़ और उनपर शारीरिक हमले न हों।

किसानों की ऋणमुक्ति तथा लाभकारी मूल्यों पर खरीद की मांगों के आंदोलन में महिलाएं अगुवा भूमिका अदा कर रही हैं। वे जातिवादी दमन, साम्प्रदायिक हिंसा, सैनिक व पुलिस के अत्याचार तथा हर तरह के राजकीय आतंकवाद के खिलाफ़ संघर्षों में सबसे आगे हैं।

पिछले 25 वर्षों से अधिक समय से, हिन्दोस्तानी सरकार उदारीकरण व निजीकरण के ज़रिये वैश्वीकरण के समाज-विरोधी कार्यक्रम को आगे बढ़ा रही है। एक के बाद एक चुनावों से इस कार्यक्रम में कोई अंतर नहीं आया है। एक के बाद एक, भाजपा और कांग्रेस पार्टी एक दूसरे की जगह लेते रहते हैं। नारे बदलते हैं परन्तु अजेंडा वही रहता है। उद्देश्य वही रहता है - अधिकांश मेहनतकश महिलाओं व पुरुषों के तीव्र शोषण व दमन के ज़रिये इजारेदार पूंजीपतियों का अधिक से अधिक मुनाफ़ा सुनिश्चित करना।

आर्थिक हमलों के साथ-साथ राजनीति का अपराधीकरण व साम्प्रदायिकीकरण हो रहा है। जवान लड़कियों और महिलाओं के खिलाफ़ क्रूर अपराध और भी अधिक व वहशी होते जा रहे हैं। पार्टियां जो लोगों का प्रतिनिधित्व करने का दावा करती हैं वे खुद ही महिलाओं के खिलाफ़ सबसे भयानक अपराधों के लिये ज़िम्मेदार हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी “मन की बात” कार्यक्रम में घोषणा की है कि हम “महिलाओं के लिये विकास” से अब “महिलाओं के नेतृत्व में विकास” की तरफ बढ़ रहे हैं। वे इस सच्चाई को छुपाने की कोशिश कर रहे हैं कि उनकी सरकार पूंजीवादी विकास को और तेज़ करने के लिये प्रतिबद्ध है, जो महिलाओं के भले के लिये नहीं है।

पूंजीवादी विकास सिर्फ पूंजीपति वर्ग के हित में होता है। नतीजन, अधिकांश मेहनतकश लोगों को नीचे धकेल कर यह मुट्ठीभर बड़े पूंजीपतियों की धन-दौलत को बढ़ाता है। यह महिला-विरोधी, मज़दूर-विरोधी और किसान-विरोधी है।

महिलाओं का लक्ष्य पूंजीवादी विकास का नेता बनना नहीं है। इसके विपरीत, महिलाओं को ऐसा आर्थिक विकास चाहिये जो सभी को समृद्धि दिला सके। महिलाओं को एक ऐसा समाज चाहिये जो हर तरह के भेदभाव, शोषण और दमन से मुक्त हो। ऐसे समाज का निर्माण करने के लिये ज़रूरी है कि मेहनतकश बहुसंख्यक लोग राजनीतिक सत्ता अपने हाथों में लें और पूंजीवाद को समाजवाद में तब्दील कर दें। सामाजिक उत्पादन को इजारेदार पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने की जगह मानवीय ज़रूरतों को पूरा करने की दिशा में मोड़ना होगा।

महिला आंदोलन का लक्ष्य मौजूदा संसद में आरक्षण पाना नहीं है। हमारा लक्ष्य है बाज़ारू बातें करने वाली संसद की जगह पर एक ऐसा संस्थान स्थपित करना, जो मेहनतकश महिलाओं व पुरुषों का वास्तव में प्रतिनिधित्व करता हो। हमारा लक्ष्य एक नये राज्य और राजनीतिक प्रक्रिया की नींव डालना है जिसमें सत्ता मेहनतकश लोगों के हाथों में होगी न कि बड़े पूंजीपतियों व अन्य शोषकों द्वारा समर्थित राजनीतिक कुलीनों के हाथों में। हमारा लक्ष्य एक ऐसी राजनीतिक सत्ता स्थापित करना है जो समाज में महिलाओं को अपमानित करने वाले सभी पुराने विचारों व रीति-रिवाज़ों के ख़िलाफ़ एक क्रांतिकारी अभियान चलायेगी।

महिलाओं को अपने रहने के स्थानों व कार्यस्थलों में संगठित होना होगा। उन्हें महिला बतौर और सभी तरह के शोषण का अंत करने के मज़दूर वर्ग के क्रांतिकारी आंदोलन के एक दस्ते बतौर संगठित होना होगा।

मेहनतकश महिला और पुरुष, मज़दूरों व किसानों के परिवारों से आने वाले लड़के व लड़कियों को अपने अधिकारों के संघर्ष में संगठित होना होगा। इस संघर्ष में लड़ते हुए, हमें समाज का नेता बनने की तैयारी करनी होगी।

एक ऐसे नये संसार के लिये, जहां नाजायज़ युद्ध न हों, जिसमें मनुष्यों के बीच लिंग या किसी और पहचान के आधार पर भेदभाव न हो, अपने इस संघर्ष का दृढ़ संकल्प दोहराने के लिये अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस एक अवसर है।

जीवन का अनुभव दिखा रहा है कि बार-बार संकट, अराजकता, तथा जीविका के विनाश के बिना पूंजीवाद जीवित नहीं रह सकता। साम्राज्यवादी युद्ध, राजकीय आतंक तथा हर तरह के पुराने व नये दमन के ज़रिये बेकसूर लोगों की जिन्दगी बर्बाद किये बिना पूंजीवाद अस्तित्व में नहीं रह सकता।

1910 में डेनमार्क के कोपनहेगन में, हुए समाजवादी महिलाओं के दूसरे अंतर्राष्ट्रीय महासम्मेलन ने फैसला लिया था कि हर साल, 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में मनाया जायेगा। यह ऐतिहासिक फैसला 17 देशों के 100 से भी अधिक प्रतिनिधियों ने लिया था और तब से हर साल 8 मार्च को दुनियाभर में महिलाओं द्वारा जन प्रदर्शन और सभाएं की जाती हैं।

जीवन का अनुभव इस बात की पुष्टि करता है कि महिला मुक्ति के संघर्ष का समाजवाद के लिये संघर्ष से अटूट नाता है - यानी कि मानवीय श्रम के पूंजी के मालिकों द्वारा किये जाने वाले शोषण से मुक्ति के संघर्ष से। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की स्थापना करने वाले इस नतीजे पर 108 साल पहले पहुंचे थे। यह नतीजा वक्त की परीक्षा में खरा उतरा है।

कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी हिन्दोस्तान की सभी महिलाओं को आह्वान देती है कि उदारीकरण, निजीकरण व वैश्वीकरण के समाज-विरोधी कार्यक्रम को रोकने व उलटने के लिये एकजुट हों! चलो हम हिन्दोस्तान के नव-निर्माण के लिये संघर्ष करें, एक ऐसे आधुनिक लोकतांत्रिक राज्य के सृजन के लिये जो लोगों को संप्रभुता प्रदान करेगा! चलो हम लोकतांत्रिक, उपनिवेशवाद-विरोधी, सामंतवाद-विरोधी और साम्राज्यवाद-विरोधी संघर्ष को पूरा करने की शर्त बतौर पूंजीवाद को उखाड़ फैंकने के लिये एकजुट हों! चलो हम क्रांति के ज़रिये समाजवाद के निर्माण के लिये एकजुट हों!

हम सामाजिक प्रगति के लिये वचनबद्ध सभी महिलाओं को आह्वान देते हैं कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी से जुड़ें और समाजवाद व कम्युनिज़्म के लिये क्रांतिकारी आंदोलन को अगुवाई दें!

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Mar 1-15 2018    Statements    Privatisation    Rights     2018   

पार्टी के दस्तावेज

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इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


पी.डी.एफ. डाउनलोड करनें के लिये चित्र पर क्लिक करें

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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