अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस : महिलाओं का बराबरी, इंसाफ और शोषण से आज़ादी के लिए संघर्ष

इस वर्ष 8 मार्च को दिल्ली में सैकड़ों महिलाओं ने मंडी हाउस से लेकर संसद तक एक विशाल जुलूस निकालकर अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया और शोषण, गैर-बराबरी, नाइंसाफी और हिंसा से मुक्त एक नया समाज बनाने के अपने संघर्ष को आगे बढ़ाने का फैसला दोहराया। मेहनतकश महिलायें और पुरुष, नौजवान और छात्र, बच्चे और बुजुर्ग सभी ने इस कार्यक्रम में पूरे जोश के साथ हिस्सा लिया।

womensday 8 march in delhi
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लोगों के अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे, 20 से अधिक संगठनों ने इस जुलूस में “8 मार्च, साथ मार्च!” के संयुक्त झंडे के तले मिल-जुलकर हिस्सा लिया। वे हाथों में रंग-बिरंगे और चमकदार बैनर और प्लेकार्ड उठाते हुए, अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के लिए और शोषण और नाइंसाफी के खिलाफ़ महिला संघर्ष की विजय के नारे लगाते हुए आगे बढे़। जैसे-जैसे जुलूस मंडी हाउस से होते हुए संसद की ओर बढ़ा, “अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस जिंदाबाद!”, “एक पर हमला सब पर हमला!”, “महिलाओं पर हमला समाज पर हमला!”, “फासीवादी समाज-विरोधी हमले मुर्दाबाद!”, “संगठित हो, हुक्मरान बनो और समाज को बदल डालो”, ये नारे आसमान में गूंजने लगे।

संसद के सामने एक विशाल जनसभा का आयोजन किया गया, जहां सभी संगठनों के प्रतिनिधियों ने बारी-बारी से अपनी बातें जनसभा के सामने रखीं। कई संगठनों के सदस्यों ने नुक्कड़ नाटक, नृत्य और गीत पेश किये, जिनमें अलग-अलग तबकों की महिलाओं के अधिकारों के संघर्षों को दर्शाया गया।

इस कार्यक्रम को संयुक्त रूप से आयोजित करने में ए.आई.डी.डब्ल्यू.ए., एन.एफ.आई.डब्ल्यू., पुरोगामी महिला संगठन, ए.आई.पी.डब्ल्यू.ए., जागोरी, निरंतर, स्वास्तिक महिला समिति, सी.बी.सी., आल इंडिया कॉन्फेडरेशन फॉर द ब्लाइंड, आज़ाद फाउंडेशन, सी.आर.इ.ए., सी.एस.डब्ल्यू., फेमिनिस्म इन इंडिया, नारी शक्ति मंच, तार्शी, जे.डब्ल्यू.पी., राही फाउंडेशन, सहेली, समां, वाई.डब्ल्यू.सी.ए., दिल्ली विकलांग अधिकार मंच, द लेप्रेसी मिशन और कामकाजी महिला संघ सहित कई और संगठन साथ आये।

सभी संगठनों के वक्ताओं ने हमारे समाज में महिलाओं और लड़कियों की दयनीय हालत को उजागर किया। महिलाओं पर हमले, महिलाओं को रोज़गार, शिक्षा, स्वास्थ्य, और साफ पीने का पानी, शौच की सुविधा, सार्वजनिक परिवहन और उनकी आन पर हमलों से सुरक्षा से वंचित रखने के लिए सभी वक्ताओं ने राज्य को ज़िम्मेदार ठहराया। उन्होंने सभी महिलाओं को इन हमलों के खि़लाफ़ एकजुट संघर्ष करने, महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध करने वालों को कड़ी से कड़ी सज़ा की मांग करने का आह्वान किया। उन्होंने समान काम के लिए समान वेतन, पेंशन और सामाजिक सुरक्षा, और ठेका मज़दूरी को ख़त्म करने की मांग दोहरायी। उन्होंने किसानों के लिए कर्ज़ माफ़ी और उनकी फसल के लिए लाभकारी मूल्य की मांग दोहरायी। उन्होंने किसानों के लिए कर्ज़ माफ़ी, सार्वजनिक खरीदी और बकायदा भुगतान की मांग की। उन्होंने विकलांग लोगों के, खास तौर से महिलाओं के और दिव्यांग लोगों के अधिकारों की रक्षा करने की मांग दोहरायी। लोगों की एकता तोड़ने के लिए राज्य द्वारा सांप्रदायिक हिंसा और अन्य हथकंडों के इस्तेमाल को खत्म करने की मांग दोहरायी। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की महिला छात्र कार्यकर्ताओं ने महिलाओं पर लैंगिक हिंसा पर विश्वविद्यालय प्रशासन की उदासीनता, जी.एस.सी.ए.एस.एच. के बर्खास्त किये जाने और छात्रों के अधिकारों और आज़ादी पर हमलों को उजागर किया।

पुरोगामी महिला संगठन के वक्ता ने सबको याद दिलाया कि 1910 के कोपनहेगन, डेनमार्क में सम्पन्न हुए समाजवादी महिलाओं के दूसरे अंतर्राष्ट्रीय महासम्मेलन ने फैसला लिया था कि हर साल, 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में मनाया जायेगा। हिन्दोस्तानी महिलाओं के जीवन का अनुभव इस बात की पुष्टि करता है कि महिला मुक्ति के संघर्ष का समाजवाद के लिये संघर्ष से अटूट नाता है - यानी कि मानवीय श्रम के पूंजी के मालिकों द्वारा किये जाने वाले शोषण से मुक्ति के संघर्ष से। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की स्थापना करने वाले इस नतीजे पर 108 साल पहले पहुंचे थे। यह नतीजा वक्त की परीक्षा में खरा उतरा है। पुरोगामी महिला संगठन के वक्ता ने सभी मौजूद संगठनों के कार्यकर्ताओं और नेताओं को बुलावा देते हुए कहा कि हम सब संघर्ष में इस नज़रिये से एकजुट हों जिससे हम इस नाइंसाफी और दमन पर आधारित व्यवस्था को ख़त्म करने के लिए अपने हाथों में राजनीतिक सत्ता लें और एक शोषण मुक्त समाज की रचना करें।

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पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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