ट्रेड यूनियनों द्वारा 15 मार्च को सर्व हिन्द विरोध दिवस

आयोजित करने का फैसला सभी केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने 15 मार्च को देशभर में विरोध प्रदर्शन आयोजित करने का फैसला किया है।

इन सर्व हिंद विरोध प्रदर्शनों के द्वारा सभी ट्रेड यूनियनों ने हुक्मरान वर्ग के मज़दूर-विरोधी, किसान-विरोधी, राष्ट्र- विरोधी और समाज-विरोधी हमलों के ख़िलाफ़ अपना संघर्ष और तेज़ करने का फैसला किया है।

ट्रेड यूनियनों ने इस बात का पर्दाफाश किया कि केंद्र सरकार ने मज़दूरों की किसी भी मांग को मानने से इंकार कर दिया है, जो 12 सूत्रीय मांग-पत्र में उठायी गयी थीं। इसके विपरीत सरकार ने मज़दूर वर्ग के ख़िलाफ़ हमलों को और भी तेज़ कर दिया है। कॉन्ट्रैक्ट लेबर कानून में बदलाव लाकर और फिक्स्ड टर्म एम्प्लॉयमेंट (निश्चित अवधि का रोज़गार) का प्रावधान लाते हुए रोज़गार को पूरी तरह से अस्थायी बनाते हुए सरकार श्रम कानूनों में बदलाव ला रही है।

इसके साथ ही ट्रेड यूनियनों ने निजीकरण के कार्यक्रम को तेज़ किये जाने का जोरदार विरोध किया है। रेलवे का निजीकरण, निजी और विदेशी कंपनियों को बिना किसी रोक के कोयले के खनन के लिए खोल देना, रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर आउटसोर्सिंग करना और आधे से अधिक आयुध निर्माण फैक्ट्रियों को बंद किया जाना, ये कुछ उदाहरण हैं, जो कि सरकार के पूरी तरह से जन-विरोधी और राष्ट्र-विरोधी कार्य हैं। सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को लूटने में निजी पूंजीवादी कंपनियों के साथ मिली हुई है।

ट्रेड यूनियनों ने 2018-19 के बजट को पूरी तरह से मज़दूर-विरोधी और जन-विरोधी करार दिया है। सरकार लोगों को बेवकूफ बनाने के लिए लोकप्रिय नारे दे रही है लेकिन अपने वादों को पूरा करने के लिए पर्याप्त संसाधनों का इंतजाम नहीं कर रही है।

कोयला और यातायात क्षेत्र के मज़दूर और उनकी फेडरेशनें जल्दी ही पूरे क्षेत्र में प्रदर्शन आयोजित करने की तैयारी कर रही हैं। रक्षा उत्पादन क्षेत्र की सभी फेडरेशनों ने 15 मार्च को सर्व हिन्द हड़ताल में शामिल होने का फैसला किया है। कई और क्षेत्रों के मज़दूर और उनकी यूनियनें इसमें शामिल होने जा रही हैं।

ट्रेड यूनियनों ने सभी मज़दूरों और मेहनतकश लोगों को आह्वान किया है कि वे अपने पार्टीवादी मतभेदों से ऊपर उठकर 15 मार्च की सर्व हिन्द हड़ताल में जोरशोर से शामिल हों।

इन विरोध प्रदर्शनों के ज़रिये सभी मज़दूर रक्षा उत्पादन क्षेत्र के म़जदूरों के साथ अपनी एकजुटता का प्रदर्शन करेंगे और रक्षा-उत्पादन क्षेत्र के निजीकरण के राष्ट्र-विरोधी कार्यक्रम का विरोध करेंगे। मज़दूर अपने प्रदर्शन के ज़रिये, मज़दूर-विरोधी और किसान-विरोधी केंद्रीय बजट का पर्दाफाश भी करेंगे।

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विरोध दिवस    आउटसोर्सिंग    Mar 16-31 2018    Struggle for Rights    Privatisation    Rights     2018   

पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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