देशभर में किसानों का बढ़ता विरोध

देशभर में किसान उनकी फसलों को राज्य द्वारा लाभकारी मूल्य पर खरीदे जाने, और कर्ज़ माफ़ी की मांग को लेकर लगातार संघर्ष कर रहे हैं। उनकी मांगें पूरी न होने पर वे अलग-अलग तरह से अपना गुस्सा दर्शा रहे हैं। केन्द्र और राज्यों की विभिन्न सरकारें वादे करती हैं परन्तु उन्हें पूरा न करके अपराधी तरीके से विश्वासघात करती हैं। किसान अपने जीवन और रोज़ी-रोटी की सुरक्षा के अधिकार के लिये दृढ़ता से लड़ रहे हैं।

जबकि महाराष्ट्र में किसानों ने सैंकड़ों मील चलकर महाराष्ट्र सरकार को अपनी मांगें रखीं, तमिलनाडु में किसान वैसा ही विरोध प्रदर्शन आयोजित करने के लिये एक जिले से दूसरे जिले जाकर अपने साथियों को लामबंध कर रहे हैं।

इसी दौरान तमिलनाडु में दिंडीगुल जिले में किसान अपनी टमाटर की फसल को सड़कों पर फेंकने को मजबूर हो गए, जब बाज़ार में टमाटर की कीमत बेहद नीचे गिर गयी है। अय्यलुर के एक किसान ने बताया कि “दो महीने पहले जो टमाटर थोक बाज़ार में 60 रुपये प्रति किलो और खुदरा बाज़ार में 75 रुपये प्रति किलो बिक रहे थे उनकी कीमत अचानक 10 रुपये से भी नीचे गिर गयी और इससे हम को बड़ा झटका लगा। इसलिए हमने अपनी फसल को सार्वजनिक जगहों पर फेंक दिया।” इस दाम पर उनको अपनी लागत जितनी कीमत भी नहीं मिल रही थी। 

रायाकोत्तई, कृष्णागिरी और सलेम में वलाप्पदी जो कि टमाटर की बड़ी मंडियां हैं, इन मंडियों में जब टमाटर की कीमत 20 रुपये प्रति किलो से गिरकर 2 रुपये पर आ गयी, तब किसानों ने अपनी टमाटर की फसल को तालाबों में फेंक दिया, जिससे तालाब का पानी लाल हो गया।

इस इलाके के किसानों ने टमाटर की फसल इसलिए लगायी क्योंकि यह छोटी अवधि की फसल है, जो केवल तीन महीनों में तैयार हो जाती है, जब इन जिलों में पानी उपलब्ध रहता है। इस इलाके में सिंचाई का पानी एक बुनियादी समस्या है।

उत्तर प्रदेश में आलू की खेती करने वाले किसानों का भी यही हाल है, जहां मंडियों में आलू की कीमत उत्पादन मूल्य के आधे से भी नीचले स्तर तक गिर गयी है। यहां भी किसान अपनी फसल को सड़कों पर फेंकने को मजबूर हो गये हैं। उदाहरण के लिए किसानों ने अपनी आलू की फसल मुख्यमंत्री आदित्यनाथ के लखनऊ स्थित घर के आगे की सड़क पर फेंक कर प्रदर्शन किया।

इसी तरह 2017 में रबी के मौसम में आलू पैदा करने वाले किसानों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ा जब थोक बाज़ार में कीमत उत्पादन मूल्य से बहुत नीचे गिर गयी। यह संकट दिसंबर 2017 में और भी गंभीर हो गया जब राज्य में कोल्ड-स्टोरों ने अपने यहां जमा आलू की फसल को सड़कों पर फेंकना शुरू कर दिया।

अब नयी फसल आने को है और यह समस्या और भी गंभीर होने जा रही है। फसलों की कीमत पहले से ही बेहद निचले स्तर पर है और बाज़ार में नयी फसल की बाढ़ आने जा रही है। जैसे-जैस नयी फसल का समय पास आ रहा है, इस मामले को हल करने के लिए सरकार द्वारा हस्तक्षेप की मांग बढ़ती जा रही है। उत्तर प्रदेश में किसान मांग कर रहे हैं कि सरकार बिना किसी शर्त के किसानों से आलू 1500 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदे, और पिछले मौसम में किसानों को हुए नुकसान की भरपाई करे।

Tag:   

Share Everywhere

बढ़ता विरोध    विश्वासघात    Mar 16-31 2018    Struggle for Rights    Popular Movements     Privatisation    Rights     2018   

पार्टी के दस्तावेज

thumbnail

इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


पी.डी.एफ. डाउनलोड करनें के लिये चित्र पर क्लिक करें

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

(Click thumbnail to download PDF)

यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)

यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)

हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)