गुटवादी नफ़रत और आतंक फैलाने वाली राजनीति की निंदा करें! एक पर हमला, सब पर हमला!

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति का बयान, 9 मार्च, 2018

त्रिपुरा विधानसभा के चुनाव में भाजपा की जीत के पश्चात वहां पर कम्युनिस्टों व ट्रेड यूनियन नेताओं पर वहशी हमले हो रहे हैं। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के दफ्तर को लूटा गया और उसमें आग लगाई। लेनिन की मूर्ति पर हमला किया गया और उसको तोड़ा-फोड़ा गया है।

त्रिपुरा की घटनाओं के तुरंत बाद, देश के अन्य भागों में गुटवादी नफ़रत का अभियान शुरू कर दिया गया। तमिलनाडु में, पेरियार की मूर्ति पर हमला किया गया जो जाति व्यवस्था के खिलाफ़ लड़ने वाले योद्धाओं में प्रसिद्ध हैं। इसके बाद एक मंदिर के बाहर कुछ ब्राह्मणों को अपमानित करने की एक घटना हुई। पश्चिम बंगाल में श्यामा प्रसाद मुखर्जी और उत्तर प्रदेश में भीम राव अंबेडकर की मूर्तियों पर भी हमले हुए हैं। सुनियोजित ढंग से कोशिश की जा रही है कि लोगों में उन्माद भड़काया जाये और उन्हें राजनीतिक व विचारधारात्मक आस्थाओं, जाति, धर्म, भेष या जीवन शैली के आधार पर एक दूसरे के खिलाफ़ लड़ाया जाये।

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी लोगों और उनकी आस्थाओं पर इन सभी हमलों की कड़ी निंदा करती है। गुटवादी नफ़रत और आतंक फैलाना सत्ताधारियों की फूट डालकर राज करने की अपराधी राजनीति का एक अभिन्न हिस्सा है।

ये शासक ही हैं जो एक दूसरे के ख़िलाफ़ लोगों में हिंसा का आयोजन करते हैं। फिर वे झूठा प्रचार करते हैं कि हिंसा के लिये लोग और उनकी आस्थाएं ज़िम्मेदार हैं। त्रिपुरा में लेनिन की मूर्ति को गिराने की सफाई में यह दावा किया गया है कि यह लोगों के “मन में दबे हुए गुस्से” की अभिव्यक्ति थी। परन्तु तथ्य दिखाते हैं कि हमलों को केन्द्र व राज्य के सुरक्षा बलों की निगरानी में भाजपा के नेताओं ने अगुवाई दी थी। त्रिपुरा के राज्यपाल द्वारा सोशल मीडिया में ट्वीट के ज़रिये इन हमलों को जायज़ ठहराना, साफ दिखाता है कि इन हमलों को सत्ताधारियों का पूरा समर्थन था।

समस्या की जड़ है कि इजारेदार घरानों की अगुवाई में मौजूदा पूंजीवादी व्यवस्था लोगों की ज़रूरतें पूरी नहीं कर सकती है। मौजूदा व्यवस्था को बरकरार रखने के लिये सत्ताधारियों को लोगों में फूट डालने और उन्हें भटकाने के लिये अपराधी तौर-तरीकों को इस्तेमाल करना पड़ता है।

लोगों की सभी समस्याओं का स्रोत करीब 150 इजारेदार घरानों की अगुवाई में चलाया जाने वाला पूंजीपति वर्ग का दमनकारी व शोषक राज है। ये इजारेदार घराने मज़दूर-विरोधी, किसान-विरोधी, समाज-विरोधी और राष्ट्र-विरोधी उदारीकरण व निजीकरण के ज़रिये वैश्वीकरण के कार्यक्रम पर आगे बढ़ने के लिये अडिग हैं। वे लोगों से झूठे वायदे करते हुए, इस कार्यक्रम को आगे बढ़ाने के लिये अपनी भरोसेमंद पार्टियों में से, एक नहीं तो दूसरी पर निर्भर रहते हैं। अतीत में वे मुख्य तौर पर कांग्रेस पार्टी पर भरोसा रखते थे। वर्तमान में वे मुख्य तौर पर नरेन्द्र मोदी की अगुवाई में भाजपा पर भरोसा कर रहे हैं।

जबकि उपनिवेशवादी शासन 70 से भी अधिक साल पहले ख़त्म हो गया था, लेकिन अंग्रेज शासकों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली बांटो और राज करो की राजनीति खत्म नहीं हुई। 1984 में कांग्रेस पार्टी की अगुवाई में केन्द्र सरकार ने स्वर्ण मंदिर जैसे पूजा के स्थान पर कैसे हमला किया था इसे हम कभी भूला नहीं सकते हैं। हम नहीं भूला सकते कि भाजपा और कांग्रेस पार्टी, दोनों की सांठ-गांठ में बाबरी मस्जिद का विध्वंस किया गया था। हम यह भी नहीं भूल सकते कि गुजरात का नरसंहार भाजपा की निगरानी में हुआ था। इन सभी करतूतों का मकसद रहा है हिंसा का माहौल बनाना तथा मेहनतकश बहुसंख्यक लोगों को बांटकर रखना व उन्हें आतंकित करना।

हाल की गुटवादी नफ़रत व आतंक फैलाने वाली करतूतें भी इसी मकसद के लिये हैं। ये भी लोगों के बीच झगड़े भड़काने का काम करती हैं और लोगों के विभिन्न गुटों पर हिंसा व आतंक को जायज़ ठहराने का काम करती हैं।

लोगों की एकता व उनके बीच भाईचारे को नष्ट करने के लिये शासक वर्ग अराजकता और हिंसा छेड़ता है। कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी ज़मीर वाले सभी हिन्दोस्तानी लोगों से आह्वान करती है कि हर तरह की गुटवादी हिंसा व नफ़रत फैलाने के अभियानों की निंदा करें। चलो हम राजनीतिक व विचारधारात्मक भिन्नताओं के निपटारे के लिये बल प्रयोग का विरोध करें। चलो हम बांटो और राज करो की राजनीति को अस्वीकार करें और उसे परास्त करें। चलो हम राजकीय आतंकवाद के ख़िलाफ़ एकजुट हों। चलो हम सर्वव्यापी मानव व लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा करें।

चलो हम एक ऐसी राज्य व्यवस्था को स्थापित करने के नज़रिये से गुटवादी हिंसा व आतंक के खिलाफ़ संघर्ष करें जो सभी की खुशहाली और रक्षा की गारंटी देगी। ऐसी राज्य व्यवस्था ज़मीर के अधिकार की अनुल्लंघनीयता की गारंटी देगी। यह हर व्यक्ति की अपनी धार्मिक आस्थाओं और उपासना के तरीकों का अनुसरण करने के अधिकार की रक्षा करेगी और साथ ही यह किसी भी धर्म में विश्वास न करने वालों के अधिकार की भी रक्षा करेगी। समाज की किसी भी समस्या पर, बिना डर या झिझक के अपने मत देने के सभी के अधिकार की यह रक्षा करेगी। यह उन्हें कठोर दंड देगी जो धर्म, जाति, विचारधारा या किसी और बहाने से समाज के किसी भी सदस्य के अधिकारों का उल्लंघन करता है।

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पार्टी के दस्तावेज

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इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


पी.डी.एफ. डाउनलोड करनें के लिये चित्र पर क्लिक करें

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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