आल इंडिया गाड्र्स काउंसिल के महासचिव कामरेड ए.के. श्रीवास्तव के साथ साक्षात्कार

मज़दूर एकता लहर (म.ए.ल.) के संवाददाता ने रेल श्रमिकों के साथ-साथ अन्य कर्मचारियों के सामने आने वाले मौजूदा मुद्दों पर कामरेड ए.के. श्रीवास्तव के विचार जानने के लिए उनसे मुलाकात की।

म.ए.ल.: हाल ही में भारतीय रेल द्वारा 90,000 रिक्त पदों को भरने के घोषणा की गयी और कहा गया है कि रिक्त पदों को भरने की अब तक की यह सबसे बड़ी योजना है। इस बारे में आपकी क्या राय है?

ए.के.एस.: रेलमंत्री पीयूष गोयल द्वारा लोकसभा में दिए गए लिखित उत्तर के अनुसार, भारतीय रेल में रिक्त पदों की कुल संख्या 2,22,509 है। रेलवे के सभी मंडलों में सुरक्षा केडरों में, जिनमें रेल चालक, गार्ड, स्टेशन मास्टर आदि शामिल हैं, के खाली पदों की संख्या अप्रैल 2017 तक 1,28,492 थी। रेल चालकों के खाली पद 17,500 हैं और गार्डों के 4,500 हैं। रेलवे के

अधिकारियों ने यह भी घोषणा की है कि सभी खाली पदों पर स्थायी नियुक्ति नहीं की जायेगी, बल्कि अनिवार्य पदों के लिए ही भर्ती होगी और बाकी पद ठेके पर दे दिए जायेंगे। इस पृष्ठभूमि में, यह देखा जा सकता है कि 90,000 श्रमिकों की भर्ती से आधे रिक्त पद भी नहीं भरे जा रहे हैं और बाकी पद ठेके पर दे दिए जायेंगे। यहां इस बात को भी नज़रंदाज़ नहीं करना चाहिये कि पिछले दो वर्षों से भारतीय रेल में कोई बड़ी भर्ती नहीं की गयी है जिसके फलस्वरूप श्रमिकों की कमी के कारण गार्ड और चालक समेत रेलवे के मज़दूरों को गंभीर और तनावपूर्ण परिस्थितियों में ज्यादा कार्य करना पड़ता है। 20 मार्च, 2018 को मुंबई में रेलवे प्रशिक्षुओं द्वारा किये गये आंदोलन का उल्लेख करना ज़रूरी है, कि वे प्रशिक्षण पूर्ण होने के बावजूद रेलवे में नौकरी न मिलने की वजह से बड़े पैमाने पर असन्तुष्ट थे ।

म.ए.ल.: 90,000 की इस भर्ती में कितने गार्ड भर्ती किये जा रहे हैं?

ए.के.एस.: रेलवे द्वारा दी जाने वाली 90,000 नौकरियों के विवरण के अनुसार (1) 26,500 सहायक रेल चालकों और तकनीशियनों (2) 63,000 ग्रुप डी के कर्मचारियों (3) 420 जूनियर इंजीनियरों और (4) 410 प्वाइंटमैनों और स्टेशन मास्टरों के खाली पदों को भरने की योजना है। यहां पर देखा जा सकता है कि गार्डों के रिक्त पदों को भरने का कोई विचार नहीं है। रेलवे के अधिकारियों ने माल गाड़ियों के गार्डों की जगह पर ई.ओ.टी.टी. मशीनें लगाने की योजना बनायी है जो कि एक खतरनाक कदम है। यह कदम भविष्य में बड़ी दुर्घटनाओं का प्रमुख कारण हो सकता है। रेलवे सुरक्षा के मुख्य आयुक्त (सी.सी.आर.एस.) ने भी गार्ड की महत्वपूर्ण भूमिका पर बल दिया है। जब भी कोई रेल दुर्घटना होती है तो उस वक्त ड्यूटी पर मौजूद गार्ड ही दुर्घटना के कारणों की पूरी रिपोर्ट देता है, जिसका इस्तेमाल रेलवे के अधिकारियों द्वारा ऐसी दुर्घटनाओं को दुबारा होने से रोकने के लिए किया जाता है। इसलिए रेल की यात्रा की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए यह बहुत महत्वपूर्ण है कि गार्ड का एक भी पद रिक्त न रहे और सभी खाली पदों को योग्य स्नातकों द्वारा भरा जाये, जो कि वर्तमान समय में बड़ी संख्या में बेरोज़गार हैं। ए.आई.जी.सी., गार्डों की संख्या में कमी करने की सभी कोशिशों का भरपूर विरोध करेगी क्योंकि यह सीधे-सीधे यात्रियों के हितों के साथ-साथ कामगारों और भारतीय रेल की संपत्ति के हित में भी नहीं है।

म.ए.ल.: केंद्र सरकार द्वारा 2004 में प्रस्तावित की गई नई पेंशन योजना (एन.पी.एस.) पर रेलवे कर्मचारियों के बीच बहुत गुस्सा है। इस पर आपके क्या विचार हैं?

ए.के.एस.: इस पर कार्य योजना तैयार करने के लिये 35 संगठनों ने नई दिल्ली के रामलीला मैदान में 30 अप्रैल, 2018 को एक रैली का आह्वान किया है। ये सभी संगठन केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करते हैं। श्रेणी 1 से लेकर श्रेणी 4 तक सभी के प्रतिनिधि वहां पर होंगे। वे सभी एन.पी.एस. को समाप्त करने की मांग कर रहे हैं और पुरानी पेंशन योजना को लागू करवाना चाहते हैं। सभी कर्मचारियों के लिए एक समान नियम होने चाहिए। 2004 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में एनडीए सरकार ने नियमों को इस प्रकार बदला कि केन्द्र सरकार और राज्य सरकारों के कर्मचारी जो 2004 के बाद सेवा में शामिल हुए वे मौजूदा नियमों के अनुसार पेंशन प्राप्त करने के लिए पात्र नहीं होंगे, अपितु एक नई पेंशन स्कीम (एन.पी.एस.) में शामिल किये जायेंगे। यह एन.पी.एस. पूरी तरह से कर्मचारियों को अस्वीकार्य है। अब 2018 में, जबकि 2004 से पूर्व कार्यरत कर्मचारियों की संख्या में कमी आ रही है और 2004 के उपरान्त कार्यरत लोगों की संख्या बढ़ रही है, ये युवा कर्मचारी एन.पी.एस. को रद्द करने की मांग कर रहे हैं। वे सवाल कर रहे हैं कि राजनेताओं, सांसदों और विधायकों को पुरानी पेंशन योजना के तहत पेंशन क्यों मिल रही है, जबकि सरकारी कर्मचारियों को इससे वंचित रखा जा रहा है। वे पूछ रहे हैं कि सेना, वायुसेना और नौसेना कर्मियों को पुरानी पेंशन योजना के तहत पेंशन क्यों मिल रही है, जबकि उन्हें नहीं दी जा रही है। क्या ऐसा इसलिए है क्योंकि अधिकारीगण सशस्त्र बलों से भयभीत हैं कि उनके पास हथियार हैं इसलिए उनकी पेंशन को कम करने की हिम्मत नहीं करते हैं? यदि सरकार अपने कर्मचारियों को अनसुना करती है, तो उन्हें भी विवश होकर लड़ाकू संघर्ष छेड़ना पड़ सकता है। शुरुआत में दो दिन की अखिल भारतीय हड़ताल की योजना बनाई जा रही है।

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गाड्र्स काउंसिल    रेलवे प्रशिक्षुओं    Apr 1-15 2018    Struggle for Rights    Rights     2018   

पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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