कांग्रेस, भाजपा पूंजीपतियों के इशारों पर बड़े-बड़े घोटाले करती हैं!

संपादक महोदय,

मैंने मज़दूर एकता लहर के 1-15 अप्रैल, 2018 के अंक में छपे लेख, ‘बैंकिंग व्यवस्था का गहराता संकट - कारण और समाधान’ को पढ़ा। इस लेख में पूंजीवादी बैंकिंग व्यवस्था के संकट को बहुत ही स्पष्ट तरीके से समझाया गया है कि यह व्यवस्था पूरी तरह से पूंजीवादी लूट पर आधारित है। इसका मुख्य लक्ष्य है जनता द्वारा बैंकों में जमा किये गये पैसे को लूटकर, बड़े-बड़े पूंजीपतियों के मुनाफ़ों को बढ़ाने के लिये देना। साथ ही साथ यदि लोगों के पैसों को ये पूंजीपति जानबूझकर नहीं लौटाते तो उसे माफ़ कर देना।

अभी हाल में पंजाब नेशनल बैंक में हुये घोटाले को उठाते हुये यह लेख बहुत ही स्पष्ट रूप से समझाता है कि बड़े अधिकारियों और सरकार में उच्च पदों पर बैठे लोगों की जानकारी के बगैर इतने बड़े, 11,400 करोड़ रुपये के घोटाले नहीं हो सकते हैं। इसके बावजूद भी अभी तक किसी बड़े अधिकारी या सरकार में उच्च पद पर बैठे लोगों में से किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया है।

लेख हमें बतता है कि इस देश की राज्य व्यवस्था पर 150 बड़े इजारेदार पूंजीवादी घरानों का वर्चस्व कायम है। सत्ता में किसी भी पार्टी की सरकार, चाहे वह कांग्रेस की हो या भाजपा की, इन्हीं पूंजीपतियों के इशारों पर बड़े-बड़े घोटालों को अंजाम देते हैं। सत्ता में बैठी पार्टी की सरकार, राज्य और रिज़र्व बैंक इन पूंजीपतियों के साथ सांठगांठ में,  बिना किसी गारंटी के हजारों करोड़ रुपयों का कर्ज़ दे देती है। जिसकी वापसी कभी नहीं होती है। इसके एवज़ में इन पार्टियों और राज्य के पदाधिकारियों को इनकी कंपनियों के बोर्डों में बड़े-बड़े पद मिलते हैं।

एक अनुमान के मुताबिक जनता द्वारा बैंकों में जमा किये गये 8 से 10 लाख करोड़ रुपये इन पूंजीपतियों ने कर्ज़ लेकर वापस नहीं किये हैं। सरकारों ने और राज्य की अफसरशाही ने इसको एन.पी.ए. करार दिया है। जिसमें से 4 लाख करोड़ रुपये सरकार द्वारा माफ़ कर दिये गये हैं।

मैं समझता हूं कि यह लेख मज़दूर वर्ग और मेहनतकश लोगों के लिये बहुत ही महत्वपूर्ण है, जो बताता है कि मज़दूर वर्ग की अगुवाई में एक ऐसी बैंकिंग व्यवस्था स्थापित करनी होगी, जो लोगों की आवश्कताओं को पूरा करने की दिशा में चलेगी न कि पूंजीपतियों के सेवा में।

आपका पाठक

रोशन सिंह, बलिया

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बड़े-बड़े घोटाले    बैंकिंग व्यवस्था    गहराता संकट    Apr 16-30 2018    Letters to Editor    Economy     Rights     2018   

पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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