कठुआ और उन्नाव की घटनाओं से सीख : लोगों को संगठित होकर एक ऐसे राज्य के लिये संघर्ष करना होगा जो महिलाओं और लड़कियों को सुरक्षा की गारंटी देगा

हाल ही में जम्मू के कठुआ में छोटी बच्ची के साथ हुए बलात्कार और उत्तर प्रदेष के उन्नाव में एक किशोरी के साथ हुए बलात्कार के ख़िलाफ़ बड़े पैमाने पर सार्वजनिक आक्रोश दिखाई दिया। देश के हर कोने से लोग भारी संख्या में सड़कों पर निकलकर यह मांग कर रहे हैं कि गुनहगारों को तुरंत कड़ी से कड़ी सज़ा मिले चाहे वे कितने भी ऊचे पद पर बैठे हों।

शासक वर्ग की कई पार्टियां और उनके नेता इन घटनाओं को हिन्दू-मुस्लिम के झगड़े में बदलने की कोशिश कर रहे हैं। परन्तु इन दोनों घटनाओं का धर्म से कोई लेना-देना नहीं है। सच तो यह है कि राज्य व्यवस्था, जिसे समाज के सभी सदस्यों की सुरक्षा करनी चाहिए, वह विशेषाधिकार प्राप्त कुछ गिने-चुने लोगों की ही रक्षा कर रहा है। राज्य शासक वर्ग के सदस्यों द्वारा बहुसंख्य शोषित लोगों के ख़िलाफ़ भयानक अपराध करने की अनुमति दे रहा है।

वर्तमान राज्य महिलाओं की रक्षा नहीं करता है। वह सार्वभौमिक मानव और लोकतांत्रिक अधिकारों की गारंटी नहीं देता है। वह हमारा शोषण करने वाले तथा हमारे श्रम और भूमि की लूट करने वाले मुट्ठीभर अमीर पूंजीपतियों के “अधिकार” की रक्षा करता है। यह राजनीतिक और आर्थिक समस्या है। धर्म का इससे कुछ लेना-देना नहीं है।

इन दोनों घटनाओं में सत्ता में बैठे लोग, जिनकी जिम्मेदारी है कि वे अपने चुनाव क्षेत्र के सभी लोगों के लिए सुख और सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे, वे ही आरोपियों में शामिल हैं। एक मामले में विशेष पुलिस अधिकारी और दूसरे मामले में विधायक।

राज्य के अधिकारियों ने न केवल उन्नाव में बलात्कार की पीड़िता द्वारा न्याय के लिए की गई गुहार को अनसुना किया, बल्कि इस मामले को आगे लाने की हिम्मत करने के लिए पीड़िता के पिता को, आरोपी विधायक के भाई ने पुलिस के सामने पीट-पीट कर मार डाला। कठुआ की घटना में पीड़िता के पूरे समुदाय को धमकी दी गई थी, कुछ समय खौफ़ में रहने के बाद, उन्हें अपनी जान की रक्षा के लिए उस जगह से दूर जाना पड़ा।

कठुआ के अपराधियों को जम्मू और कश्मीर की सरकार के नेताओं का खुल्ला समर्थन मिला। जिन पुलिस अफ़सरों को अपराध की तहकीकात करनी थी उन्होंने ही सबूत मिटाने की कोशिश की। उन्नाव में भाजपा के विधायक को तुरंत गिरफ्तार नहीं किया गया। राज्य सरकार ने उसे गिरफ्तार होने से बचाने की कोषिष की। बढ़ते सार्वजनिक दबाव के बाद ही उसे हिरासत में लिया गया।

बार-बार होने वाली ऐसी घटनाओं से साफ निष्कर्ष निकलता है कि वर्तमान राज्य महिलाओं की सुरक्षा और उनके अधिकारों की गारंटी देने के क़ाबिल नहीं है। ये अपराध, सत्ता में बैठे लोगों की सक्रिय सांझेदारी में किये जाते हैं, कई मामलों में वे स्वयं ही इन अपराधों के आयोजक होते हैं।

बलात्कार जैसे हिंसक अपराधों से बचाव के लिए महिलाएं पुलिस पर निर्भर नहीं कर सकतीं। न्यायतंत्र न्याय सुनिश्चित नहीं करता है। अधिकतर मामलों में तो वह गुनहगारों की रक्षा करता है और उन्हें बिना दंड दिए रिहा कर देता है। तथाकथित जनप्रतिनिधि महिलाओं के हक़ों की रक्षा नहीं करते हैं। इसके विपरीत, वे अक्सर उन सबसे पिछड़े विचारों को बढ़ावा देते हैं, जो महिलाओं के साथ किये जा रहे भेदभाव और उनके उत्पीड़न को न्यायसंगत ठहराते हैं। सांसदों और विधायकों में से कई, खुद महिलाओं के ख़िलाफ़ भयानक अपराधों के दोषी हैं, जैसा कि हाल की घटनाओं ने एक बार फिर से खुलासा किया है।

निष्कर्ष यह है कि ऐसे भयानक अपराध तब तक होते रहेंगे जब तक हम लोग, खुद हिन्दोस्तान का मालिक बनने और दमनकारी स्थितियों को बदलने के लिए संगठित नहीं होते।

मज़दूरों, किसानों, महिलाओं और नौजवानों को हरेक शहरी इलाके में और ग्रामीण क्षेत्रों के हर गांव में लोगों की समितियां स्थापित करनी होगी। हमें सभी के सामान्य हितों और सार्वभौमिक अधिकारों के लिए लोगों के सभी तबकों के एकजुट संघर्ष को बढ़ाने और मजबूत करने के लिए काम करना होगा। हमें एक ऐसी एकजुट राजनीतिक ताकत तैयार करनी होगी जो एक दिन सत्ता ले सके तथा राजनीतिक व्यवस्था में परिवर्तन ला सके और अर्थव्यवस्था की दिशा को बदल सके। हमें एक ऐसे राज्य और आर्थिक व्यवस्था की मांग करनी होगी और उसके लिए लड़ना होगा जो बिना किसी अपवाद के सभी मनुष्यों के लिए समृद्धि और सुरक्षा की गारंटी देता है। हमारा लक्ष्य एक नये हिन्दोस्तान, एक नयी राज्य व्यवस्था और अर्थ व्यवस्था की रचना करना है जो सभी की समृद्धि और सुरक्षा की गारंटी देता है।

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पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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