सीरिया : साम्राज्यवादी झूठ और बहाने

संपादक महोदय, “सीरिया पर मिसाइल द्वारा बर्बर हमलों की निंदा करे!” 14 अप्रैल के हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के इस बहादुर और असूलों पर आधारित बयान को जारी करने के लिए मैं आपको धन्यवाद देता हूं। जैसा कि बयान में कहा गया है, दुनियाभर के सभी अमन-पसंद लोगों को एकजुट होकर अमरीका, इंग्लैंड, और फ्रांस इन तथाकथित “सहयोगी देशों” द्वारा आयोजित किये गए बर्बर हमलों की निंदा करनी चाहिए, जो कि सभी अंतर्राष्ट्रीय कानूनों का सीधा उल्लंघन है।

इन बर्बर हमलों को आयोजित करने के लिए हमलावरों ने यह बहाना दिया कि बशर अल-असद की सरकार ने अपने ही लोगों के ख़िलाफ़ रासायनिक हथियारों से हमला किया है। इससे बड़ा कोई और झूठ नहीं हो सकता है। पिछले कुछ महीनों से सीरिया की सरकार लगातार “बागियों” पर जीत हासिल करती आ रही है। इन “बागियों” को इन्हीं साम्राज्यवादी हमलावरों ने धन देकर तैयार किया था। ऐसी हालत में, सीरिया की सरकार इस तरह की कार्यवाही करेगी, यह किसी भी तर्क के ख़िलाफ़ है, क्योंकि यदि सीरिया की सरकार वाकई ऐसा कुछ करती है तो साम्राज्यवादियों के लिए सीरिया पर हमला करने के लिए अच्छा बहाना मिल जायेगा। हकीकत तो यह है कि अमरीकी साम्राज्यवादियों और उसके सहयोगी देशों द्वारा पोषित तथाकथित “बागी” गिरोह कई सालों से ऐसे रासायनिक हथियार इकठ्ठा करते आये हैं। सीरिया की सरकार और रासायनिक हथियार निगरानी संगठन ओ.पी.सी.डब्लू. में रूस के प्रतिनिधि के पास ऐसे सबूत हैं जो यह साफ तौर से दिखाते हैं कि रासायनिक हमलों की यह कार्यवाई गैर सरकारी संगठनों द्वारा आयोजित की गयी है, जो साम्राज्यवादी हमलावरों की जेब में है।

इस मामले में और ऐसे कई अन्य मामलों में ऐसे कई सबूत सामने आये हैं जिससे यह पता चलता है कि साम्राज्यवादी हमलावर पहले खुद या फिर अपने द्वारा बनाये गए तमाम तरह के खुफिया गिरोहों के ज़रिये फरेबी-कार्यवाहियों को अंजाम देते हैं और ऐसे हालात पैदा करते हैं जिसमें वे किसी भी देश पर हमला कर सकते हैं, जो उनके साम्राज्यवादी एजेंडे के रास्ते में रुकावट बने हुए हैं। 2002 और 2003 में इराक के मामले में यही किया गया था जब ऐसे दस्तावेज पैदा किये गए जिससे यह “साबित” किया जा सके कि इनके पास “जनसंहार के हथियार” हैं। ऐसा बहाना बनाकर इराक पर हमला किया गया और सद्दाम हुसैन की सरकार का तख़्ता पलट किया गया। उसके बाद इराक पर पूरी तरह से कब्जा किया गया। इसी तरह के बहाने अफगानिस्तान और लीबिया पर कब्ज़ा करने के लिए बनाये गए थे।  

अमरीका, मध्यपूर्व में उसका सहयोगी देश, इज़राइल और इस इलाके की भूतपूर्व बस्तीवादी ताकतें इंग्लैंड और फ्रांस की नजर हमेशा से सीरिया पर टिकी हुई थी। इन चारों साम्राज्यवादी ताकतों ने पश्चिम एशिया और उत्तरी अफ्रीका पर अपना वर्चस्व जमाने के लिए मिलकर एक योजना बनायी है और इस योजना की कामयाबी के लिए सीरिया में उनके समर्थन की सत्ता कायम करना जरूरी है। लम्बे तौर पर, ये ताकतें ईरान की भी घेराबंदी करना चाहते हैं ताकि इस तेल-समृद्ध इलाके पर अपना पूरा दबदबा कायम कर सकें और साथ ही रूस और भूतपूर्व सोवियत संघ के गणतंत्रों की घेराबंदी की जा सके।

अपने इस मकसद के लिए ये ताकतें सीरिया में अलग-अलग बागी गिरोहों का समर्थन कर रही है। हाल के महीनों में इन गिरोहों को मुंह की खानी पड़ रही है, जब इनके द्वारा कब्ज़ा किये गए इलाकों पर सीरिया की सरकार की पकड़ बढ़ती जा रही है। यह बदलते हालात इन साम्राज्यवादी ताकतों के एजेंडे के लिए निश्चित हार हैं और इनके द्वारा पोषित गिरोहों के लिए सैनिकी तौर पर बड़ी हार हैं। सीरिया पर यह मिसाइल हमले, आने वाले समय में, इस इलाके में इस तरह की और अधिक तेज कार्यवाहियों की संभावना की ओर इशारा करते हैं। अमरीका और उसके सहयोगी देशों द्वारा की जा रही तमाम भड़काऊ कार्यवाहियां, दुनिया को तीसरे महायुद्ध के और करीब ले जा रही है। अमरीकी हमलावर और उसके सहयोगी देश और उसके प्रभाव क्षेत्र में आने वाले देष लगातार जंग का प्रचार चला रहे हैं और रूस को एक दानव के रूप में पेश किया जा रहा है। ऐसे हालात में सभी अमन-पसंद लोगों को अंतर्राष्ट्रीय नियमों के उल्लंघन की कड़ी निंदा करनी चाहिए। इस बात पर गौर किया जाना चाहिए कि इन हमलों के छेड़े जाने से पहले, इन देशों की संसद में किसी भी तरह की चर्चा नहीं की गयी है, और न ही इस मसले पर वोट लिया गया है। इस तरह से, ये हमले पूरी तरह से गैर-कानूनी है, और ट्रम्प, की और मैक्रॉन की उनके देशों में जंग के गुनहगार के रूप में निंदा की जानी चाहिए और उनके ख़िलाफ़ महाभियोग चलाया जाना चाहिए तथा उनकी इस गुनहगार कार्यवाही के लिए सज़ा दी जानी चाहिए।

हिन्दोस्तान के लोगों को इस समय बेहद सतर्क रहने की जरूरत है और सरकार पर दबाव बनाया जाना चाहिए कि वह इन गुनहगार हमलों का समर्थन न करें और संयुक्त राष्ट्र सहित सभी अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर इस बात को उठाए। मैं, फिर एक बार, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी को इस बहादुर और बेख़ौफ बयान के लिए बधाई देना चाहता हूँ।

आपका,

ए नारायण, बंगलुरु

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सीरिया    साम्राज्यवादी झूठ    May 1-15 2018    Letters to Editor    Rights     War & Peace     2018   

पार्टी के दस्तावेज

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इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


पी.डी.एफ. डाउनलोड करनें के लिये चित्र पर क्लिक करें

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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