नई भर्तियों को ख़त्म करने की भारतीय रेल की ख़तरनाक योजनाओं का विरोध करें

हाल ही में भारतीय रेल ने घोषणा की है कि वह रखरखाव, संचालन और व्यवसायिक विभागों में मज़दूरों की सभी श्रेणियों के खाली पदों को भरने के लिए सेवानिवृत्त मज़दूरों को “पुनः नियुक्त” करेगी। इस योजना के तहत, उन मज़दूरों को “पुनः नियुक्त” करना शुरू कर दिया गया है जो इन विभागों से 60 साल की उम्र पर सेवानिवृत्त हो गये थे। अब उनकी सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ाकर 65 साल कर दी गई है। इन मज़दूरों को आवास के भत्ते और परिवहन भत्ते के बिना आखिरी वेतन के 50 प्रतिषत वेतन पर दो साल के लिए “पुनः नियुक्त” किया गया है। उन्हें सभी मज़दूरों की तरह पूरे कार्य दिवस का काम करना होगा। यदि उनका काम संतोषजनक पाया जाता है, तो उनका कार्यकाल और दो साल तक बढ़ाया जा सकता है जब तक कि उनकी उम्र 65 वर्ष से अधिक नहीं हो जाती। केवल रेल चालकों और गार्डों को “पुनः नियुक्त” नहीं किया जा रहा है।

हाल ही में लोकसभा में एक लिखित प्रश्न के लिए रेल मंत्री पियूष गोयल द्वारा दिए गए एक जवाब के अनुसार, भारतीय रेल में रिक्त पदों की कुल संख्या 2,22,509 है। अप्रैल 2017 के आंकड़ों के अनुसार, इनमें से, सुरक्षा श्रेणी के रिक्त पद, जो सीधे ट्रेनों की सुरक्षित संचालन के लिए ज़िम्मेदार है, जिसमें रेल चालक, गार्ड, स्टेशन मास्टर तथा ट्रेकमेन (गैंगमेन), सिग्नल एवं टेलिकम्युनिकेशन (दूरसंचार) स्टाफ इत्यादि, की संख्या 1,28,942 है।

सेवानिवृत्त मज़दूरों को “पुनः नियुक्त” करने की नीति एक तरीका है, नए मज़दूरों की भर्ती को रोकने के लिए। जिससे वेतन पर व्यय को कम किया जायेगा, क्योंकि भर्ती किये गये सभी मज़दूर भत्तों के साथ वेतन के पूर्ण लाभ की हकदार होंगे। इसके अलावा सेवानिवृत्त मज़दूरों को “पुनः नियुक्त” करके, इन सेवानिवृत्त मज़दूरों द्वारा भरे गए पद अब उनसे निचले पदों पर काम करने वाले मजदूरों की पदोन्नति के लिए खाली नहीं हैं। साथ ही यह भी गौर करने वाली बात है कि ये सेवानिवृत्त मज़दूर, युवा मज़दूरों जैसा काम नहीं कर सकते हैं, जो प्रत्येक विभाग में आवश्यक हैं, क्योंकि ज्यादातर मामलों में, एक जगह बैठकर करने वाले कामों के अलावा, ज्यादातर काम ख़तरनाक और कठोर परिश्रम लगाने वाले हैं। कार्यशालाओं, ट्रैक रखरखाव, एस. एंड टी. विभागों, स्टेशन मास्टर्स नौकरियों आदि में ऐसे काम हैं। 60 साल से अधिक उम्र के बुजुर्ग मज़दूर, युवा मज़दूरों जैसा काम कैसे कर सकते हैं? यह नीति भारतीय रेल के सुरक्षित और सुचारू संचालन के ख़िलाफ़ है।

हाल ही में, रेलवे ने 90,000 रेल मज़दूरों की भर्ती की घोषणा की है। इन 90,000 पदों के लिए करीब 3 से 5 करोड़ आवेदन प्राप्त हुए। आवेदकों के चयन की तारीख की कोई प्रतिबद्धता नहीं है। यह साफ दिखाता है कि इस सबका मकसद असल में भर्ती नहीं है बल्कि बेरोज़गार युवाओं के गुस्से को ठंडा करना है। इसके विपरीत, रेलवे ने आवेदन प्रक्रिया से बहुत पैसा कमाया है। 31 मार्च, 2018 को इन 90,000 नौकरियों के लिए आवेदन बंद किए गए। रेलवे एस.सी./एस.टी. उम्मीदवारों को छोड़कर, बाकी सभी से 500 रुपये प्रति आवेदन ले रही थी। यदि हम यह मानकर चलते हैं कि 70 प्रतिशत गैर एस.सी/एस.टी उम्मीदवार थे, तो रेलवे ने केवल आवेदनों से ही 1200 करोड़ रुपयों का संग्रह किया है!

ऐसा लगता है कि अधिकारी 2019 के आम चुनावों तक सभी नई भर्ती रोकने की योजना बना रहे हैं और इसके बाद उम्मीद कर रहे हैं कि वे निश्चित कार्य अनुबंधों पर नए मज़दूरों को रोजगार देंगे। इसलिए “पुनः नियुक्ति” की नीति लागू की जा रही है। यह ध्यान में रखना चाहिए कि 20 मार्च, 2018 को केंद्र सरकार ने सभी क्षेत्रों में निश्चित अवधि के रोज़गार की अनुमति देने के लिए अधिसूचना जारी की थी। इस निश्चित अवधि के रोज़गार का मतलब यह है कि निश्चित अवधि नियोक्ता के द्वारा कितने भी समय तक लागू हो सकती है। जिसके बाद काम के लिए एक ही मज़दूर को फिर से नियोजित करना है या एक नया मज़दूर उस जगह पर रखना है, इसका फैसला लेने की पूरी ताक़त केवल नियोक्ता के पास होगी। यदि निश्चित अवधि का रोज़गार वास्तविकता बन जाता है तो ट्रेड यूनियन आंदोलन कमजोर हो जाएगा। क्योंकि मज़दूर यूनियन से जुड़ने से डरेंगे यह सोचकर कि उनका निश्चित अवधि अनुबंध ख़त्म होने के बाद उन्हें काम के लिए विस्तारण नहीं मिलगा।

भारतीय रेल के मज़दूरों को रेलवे अधिकारियों द्वारा लागू की जा रही इन नीतियों का एकजुटता से विरोध करना चाहिए। मज़दूर वर्ग को अन्य सभी वर्गों के साथ एकजुट होकर, सरकार द्वारा अपनाए जाने वाले निश्चित अवधि के रोज़गार के साथ-साथ अन्य मज़दूर-विरोधी उपायों का डटकर विरोध करना चाहिए।

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पार्टी के दस्तावेज

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इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


पी.डी.एफ. डाउनलोड करनें के लिये चित्र पर क्लिक करें

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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