लेनिनवाद पर चर्चा

22 अप्रैल, 2018 को कामरेड लेनिन के जन्म की 148वीं वर्षगांठ पर हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट गदर पार्टी के साथियों की एक महत्वपूर्ण मीटिंग दिल्ली में हुई। पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह ने इस मीटिंग अध्यक्षता की। मीटिंग की शुरुआत लेनिनवाद की प्रमुख विशेषताओं पर एक प्रस्तुति से की गयी, जिसे संक्षिप्त में यहां पेश कर रहे हैं।

मार्क्स और एंगेल्स का जीवनकाल और उनका कार्य ऐसे युग में रहा जब विकसित साम्राज्यवाद का जन्म अभी हुआ नहीं था। यह ऐसा काल था जब श्रमजीवी क्रांति का एक तत्काल व्यावहारिक कार्य बनकर उभरना बाकी था। लेनिन का कार्यकाल ऐसे युग में था जब साम्राज्यवाद पूरी तरह से विकसित हो चुका था और वह युग श्रमजीवी क्रांति के उदय का युग था। श्रमजीवी क्रांति द्वारा सरमायदारी जनतंत्र को चकनाचूर करने से लेकर श्रमजीवी जनतंत्र के युग की शुरुआत के दौर में, उन्होंने बोल्शेविक पार्टी को अगुवाई दी। इसीलिए लेनिनवाद मार्क्सवाद का ही आगे का विकास है। लेनिनवाद साम्राज्यवाद और श्रमजीवी क्रांति के दौर का मार्क्सवाद है।

लेनिन ने पूंजीवाद के सबसे उच्चतम पड़ाव साम्राज्यवाद के पड़ाव पर पूंजीवाद की पांच विशेषताओं की पहचान की है, ये पांच विशेषतायें हैं-1) पूंजी का संकेंद्रीकरण और इजारेदारों का वर्चस्व, 2) वित्त पूंजी का उदय, 3) पूंजी का निर्यात, 4) बाजारों और कच्चे माल की स्त्रोतों के लिए इजारेदार पूंजीपतियों के बीच टकराव, 5) गिने-चुने साम्राज्यवादी ताकतों के बीच दुनिया का संपूर्ण बंटवारा हो जाना, और जिसका नतीजा है दुनिया के पुनः बंटवारे के लिए जंग।

लेनिन ने पूंजीवाद के उच्चतम पड़ाव पर उभरे प्रमुख अंतर्विरोधों की पहचान इस तरह से की - हर एक देश के भीतर शोषक और शोषितों के बीच अंतर्विरोध, साम्राज्यवाद और दमन किये जा रहे राष्ट्रों के बीच अंतर्विरोध और अंतर-इजारेदारी और अंतर-साम्राज्यवादी अंतर्विरोध। यह प्रमुख अंतर्विरोध पूंजीवाद और समाजवाद के बीच, बुनियादी अंतरविरोध को ऐसे मुकाम पर ला खड़ा करते है, जहां उसका हल हो सकता है।

लेनिन ने देशों के असमान आर्थिक और सामाजिक विकास के नियम की खोज की और यह पूर्वानुमान लगाया कि श्रमजीवी क्रांति साम्राज्यवादी जंजीर को ऐसे जगह पर तोड़ेगी, जहां उसकी कड़ी सबसे कमजोर होगी। 1917 में उनका यह पूर्वानुमान सच साबित हुआ जब यह जंजीर रूस में टूट गयी।

लेनिन ने हमको सिखाया है कि श्रमजीवियों द्वारा सत्ता पर कब्जा करना, क्रांति की केवल शुरुआत है। असली चुनौती उस सत्ता को बरकरार रखना, उसको मजबूत करना और उसे अपराजेय बनाना है। इसके लिए बेहद जरूरी है कि श्रमजीवियों की हुकुमशाही को श्रमजीवी क्रांति के हथियार बतौर स्थापित किया जाये, और उसको मजबूत किया जाये।

लेनिन ने कम्युनिस्ट पार्टी को एक क्रांतिकारी तरीके से संगठित पार्टी के रूप में निर्माण करने के संघर्ष में अगुवाई दी। श्रमजीवियों की हिरावल पार्टी का संगठनात्मक सिद्धांत बतौर उन्होंने जनतान्त्रिक केन्द्रवाद की व्याख्या की। उन्होंने बर्न्सटीन, कौत्स्की जैसे द्वितीय इंटरनेशनल के प्रभावशाली नेताओं के संशोधनवाद और मौकापरस्ती का पर्दाफाश करने और उसको हराने के संघर्ष में अगुवाई दी।

लेनिनवाद पर की गयी इस प्रस्तुति के बाद मीटिंग ने संशोधनवाद की समस्या पर चर्चा की - उन धाराओं पर चर्चा की जो मार्क्सवाद और लेनिनवाद का संशोधन करते है ताकि उसकी क्रांतिकारी आत्मा को निकाल दिया जाये और उसे सरमायदारों के लिए स्वीकार्य बनाया जाये।

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लेनिनवाद पर चर्चा    May 1-15 2018    Voice of the Party    Rights     Theory    2018   

पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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