ऑल इंडिया गाड्र्स काउंसिल की 37वीं आम सदस्य सभा

ऑल इंडिया गाड्र्स काउंसिल (ए.आई.जी.सी.) 25-26 मई, 2018 को ओड़िशा के पुरी में अपनी 37वीं द्विवार्षिक आम सदस्य सभा आयोजित कर रहा है।

ए.आई.जी.सी. भारतीय रेल के 28,000 गार्डों का प्रतिनिधित्व करने वाला यूनियन है। आने वाली सभा में करीबन एक हज़ार गार्ड विचार-विमर्श में शामिल होंगे और यूनियन के नये पदाधिकारियों का चुनाव भी करेंगे। भारतीय रेल के गार्डों की आम समस्याओं के साथ-साथ इसमें ज़ोन/डिविज़न/ब्रांच की समस्याओं के बारे में भी चर्चा होगी।

गार्डों के अधिकारों के लिए लगातार संघर्ष करने का ए.आई.जी.सी. का लंबा इतिहास है।

पिछले एक साल में ए.आई.जी.सी. ने सातवें वेतन आयोग के सामने प्रस्तुतियां कीं, जिनमें अपनी शिकायतों तथा मांगों को पेश किया; 26 अप्रैल, 2017 को ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन के साथ मिलकर नयी दिल्ली के जंतर-मंतर पर तथा देशभर में डीआरएम ऑफिसों के सामने 36 घंटे की भूख हड़ताल की थी; 2 फरवरी, 2017 को नयी दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना किया; 20 फरवरी, 2017 को देशभर के डीआरएम आफिसों के सामने धरनों के बाद उनके द्वारा रेलमंत्री को तथा रेलवे के चेयरमैन को, रेलवे बोर्ड को मांगपत्र दिये; गाड्र्स काउंसिल ने नागपुर की श्रम अदालत में तथा मुम्बई सी.ए.टी. में मुकदमे दर्ज़ किये हैं। 18 जनवरी, 2018 से 21 जनवरी तक ए.आई.जी.सी. के सदस्यों ने देशभर में काली पट्टियां बांधकर “विरोध दिवस” मनाया।

ए.आई.जी.सी. ने वेतन आयोग द्वारा गार्डों को पर्याप्त भत्ते तथा बेसिक वेतन न देने की कोशिशों के ख़िलाफ़, वेतन एलिमेंटों को नामंजूर करने के ख़िलाफ़, प्रस्तावित से कम पेंशन वृद्धि के ख़िलाफ़, नयी पेंशन योजना के ख़िलाफ़, श्रम-विरोधी नीतियों के ख़िलाफ़, ई.ओ.टी.टी. के ख़िलाफ़, उपनगरीय लोकल ट्रेनों में गार्डों की जगहों पर मोटरमैनों की नियुक्ति के ख़िलाफ़ तथा भल्ला समिति द्वारा प्रस्तावित रनिंग एलावेन्स दरों के लिए संघर्ष किये गये हैं।

मज़दूर एकता लहर भारतीय रेल के गार्डों के न्यायपूर्ण और जायज़ संघर्षों का समर्थन करती है। वह लगातार इन संघर्षों के बारे में ख़बरें देती आयी है। मज़दूर एकता लहर पुरी में हो रहे उनके द्विवार्षिक अधिवेशन को भ्रात्रीय बधाइयां तथा शुभकामनाएं देती है। गार्डों के, इंजन चालकों के साथ तथा ट्रैकमैनों, सिग्नलिंग स्टाफ, स्टेशन मास्टर्स, टिकट चेकिंग स्टाफ, इत्यादि के साथ एकता बनाने की कोशिशों का भी समर्थन करती है।

रेल अधिकारियों द्वारा बनायी जा रही श्रम-विरोधी नीतियों का ये सब भी बुरी तरह शिकार हो रहे हैं। रेल के निजीकरण के छुपे कार्यक्रम को नाकामयाब बनाने के लिए हर प्रकार के काम करने वाले रेल मज़दूरों की संघर्ष में एकता अत्यावश्यक है।

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वेतन आयोग    ऑल इंडिया गाड्र्स काउंसिल    May 16-31 2018    Struggle for Rights    Rights     2018   

पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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