एयर इंडिया के निजीकरण के ख़िलाफ़ मज़दूरों का सम्मेलन

एयर इंडिया के निजीकरण के विरोध में, 12 मई को एयर इंडिया की यूनियनों के संयुक्त मंच ने सरकार द्वारा एयर इंडिया के निजीकरण के लिये किये जा रहे प्रयासों के ख़िलाफ़ चेन्नई में एक सम्मेलन आयोजित किया। एयर इंडिया के मज़दूरों, सेवानिवृत्त कर्मचारियों, वर्कर्स यूनिटी मूवमेंट समेत विभिन्न यूनियनों के कार्यकर्ताओं ने इस सम्मेलन में भाग लिया।

Air India workers' Convention against Privatization

सम्मलेन की अध्यक्षता एयर कॉर्पोरेशन कर्मचारी यूनियन (ए.सी.ई.यू.) के पूर्व अध्यक्ष कॉमरेड मनोहरन ने की। सम्मलेन को ए.सी.ई.यू. के अखिल भारतीय महासचिव कॉमरेड जे.बी. केडियन, ए.सी.ई.यू. के अध्यक्ष और दक्षिण क्षेत्र के सचिव कॉमरेड उदय शंकर, ए.सी.ई.यू. के दिल्ली क्षेत्र के सचिव सुरेंद्र कुमार, ए.सी.ई.यू. के पूर्व अखिल भारतीय महासचिव कॉमरेड आर. रामनाथन, ए.आई.ए.आर.पी.ए. के अध्यक्ष डब्ल्यू.टी.एस. डेविड, सहित यूनियन के कई कार्यकर्ताओं तथा समर्थकों और एयर इंडिया के मज़दूरों

द्वारा संबोधित किया गया। सम्मलेन को वर्कर्स यूनिटी मूवमेंट के कॉमरेड कबीलन, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन कर्मचारी यूनियन के दक्षिणी क्षेत्र के अध्यक्ष कॉमरेड सुरेश और एयरपोर्ट अथॉरिटी एम्प्लाइज यूनियन के क्षेत्रीय संयुक्त सचिव कॉमरेड बासकर ने भी संबोधित किया। क्षेत्र के विधायक कॉमरेड अंबरासन ने भी एयर इंडिया के निजीकरण के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों पर बात रखी और इसका विरोध किया।

सभी वक्ताओं ने एयर इंडिया को बेचने के लिए सरकार द्वारा किये जा रहे प्रयासों की निंदा की। उन्होंने इस मुद्दे पर भी रोशनी डाली कि एयर इंडिया को हिन्दोस्तानी लोगों द्वारा दिए गए टैक्स के धन और हमारे देश के मज़दूरों की कड़ी मेहनत तथा समर्पण से एक विशाल संगठन के रूप में खड़ा किया गया था। एयर इंडिया के पास लगभग 140 विमानों का बेड़ा है और हिन्दोस्तान को अंतर्राष्ट्रीय स्थानों से जोड़ने वाले मार्गों पर हवाई यातायात का 17 प्रतिशत हिस्सा एवं घरेलू बाज़ार का 13 प्रतिशत हिस्सा भी है। एयर इंडिया विश्व की सबसे बड़ी एयरलाइन ग्रुपिंग स्टार एलायंस का हिस्सा है। इसके दुनियाभर के हवाई अड्डों में प्रमुख आवंटित क्षेत्र हैं। इसकी मुंबई, दिल्ली, लंदन, हांगकांग, नैरोबी, टोक्यो, मॉरीशस और कई अन्य देशों में भूमि और इमारतों के रूप में मूल्यवान संपत्तियां हैं।

अगर आज एयर इंडिया पर सरकार द्वारा की गई ख़राब व्यवस्था के कारण 48,000 करोड़ रुपये का कर्ज़ है, तब भी एयर इंडिया की संपत्ति उससे बहुत अधिक है। कई अंतर्राष्ट्रीय और हिन्दोस्तानी विमान कंपनियों की नज़र एयर इंडिया को हड़पने पर है।

अब तक जिन कंपनियों का निजीकरण किया गया है, उनके मज़दूरों का यही अनुभव रहा है कि उन्हें अपनी नौकरियों के साथ-साथ जमा किए गए लाभ भी खोने पड़े हैं। इससे कोई फर्क़ नहीं पड़ता कि निजीकरण के समय क्या वादे किए गए थे। मज़दूरों ने इस बात पर जोर डाला कि एयर इंडिया की संपत्ति एक मूल्यवान गहना है जिस पर हिन्दोस्तानी लोगों और एयर इंडिया के मज़दूरों का हक़ है। और यह संपत्ति निजी कंपनियों को नहीं बेची जानी चाहिए।

सम्मेलन में भाग लेने वाले मज़दूरों और लोगों ने एयर इंडिया की रक्षा करने के लिए अपना दृढ़ संकल्प व्यक्त किया और प्रण लिया कि इसका निजीकरण नहीं होने देंगे। वे आने वाली अवधि में एयर इंडिया की रक्षा के लिए दिल्ली में अखिल भारतीय सम्मेलन आयोजित करने के अलावा और अधिक विरोध कार्यक्रमों की योजना बना रहे हैं। सभी वक्ताओं ने बताया कि सार्वजनिक क्षेत्र के सभी सरकारी कर्मचारी, भारतीय रेल और बी.एस.एन.एल. सहित, अन्य महकमों के कर्मचारी निजीकरण के ख़िलाफ़ एकजुट हैं और निजीकरण के ख़िलाफ़ एकजुट कार्यों की योजना बना चुके हैं। निजीकरण के ख़िलाफ़ एयर इंडिया के मज़दूरों का संघर्ष मज़दूरों के समर्थन के योग्य है।

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एयर इंडिया. निजीकरण के ख़िलाफ़    मज़दूरों का सम्मेलन    Jun 1-15 2018    Struggle for Rights    Privatisation    Rights     2018   

पार्टी के दस्तावेज

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पूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि
उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई
विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है।
इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि
लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि
पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को।
यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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